माननीय उच्च न्यायालय व राजस्व परिषद का स्थगन आदेश भी नही रोक पा रहा है निर्माण कार्य, प्रशासन की चुप्पी से बड़े संघर्ष का बढ़ता जा रहा है अंदेशा
न थम रहा पूर्वांचल सिनेमा व उसके पास वाली जमीन का विवाद, तुतु मै मै के बाद किसकी तैयारी? प्रशासन की चुप्पी से हो सकता है बड़ा हादसा
बलिया।। समरथ के नहि दोष गोसाई, यह चौपाई मोहन तुरहा व पशुपतिनाथ के भूमि विवाद पर माननीय उच्च न्यायालय व राजस्व परिषद के द्वारा जारी स्थगन आदेश के बाद लगातार चल रहे निर्माण पर पूरी तरह से सटीक बैठ रही है। उपरोक्त न्यायालयों द्वारा पूर्वांचल सिनेमा हाल के निर्माण पर रोक लगायी है, वावजूद निर्माण भी हुआ, सिनेमा हाल मे फ़िल्म दिखाने का लाइसेंस भी मिला और फ़िल्म दिखायी भी जा रही है। अन्य भूखंड पर भी स्थगन आदेश के वावजूद निर्माण कार्य जारी है। सोमवार को मोहन तुरहा द्वारा निर्माण का मौके पर विरोध करना, 112 को बुलाना, बाद मे स्थानीय पुलिस का भी पहुंचना और दोनों पक्षो को उप जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होने का आदेश यह दर्शाने के लिये काफ़ी है कि मुद्दा वास्तव मे गरम है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि माननीय उच्च न्यायालय और माननीय राजस्व परिषद के स्थगन आदेश के वावजूद स्थानीय प्रशासन निर्माण कार्य रोक क्यों नहीं रहा है? यह भी कटु सत्य है कि उपरोक्त न्यायालयों के आदेश को निरस्त करने का अधिकार सिर्फ उपरोक्त न्यायालयों या माननीय सर्वोच्च न्यायालय को है, फिर बलिया मे उपरोक्त आदेश का अनुपालन क्यों नहीं हो रहा है?क्या जिला प्रशासन इस विवाद मे कोई बड़े संघर्ष का इंतजार कर रहा है?
माननीय उच्च न्यायालय और माननीय राजस्व परिषद प्रयागराज के द्वारा जारी स्थगन आदेश के वावजूद जब विपक्षियों द्वारा लगातार निर्माण कार्य कराया जा रहा हो और सिनेमा हाल भी चल रहा हो तो पीड़ित क्या कर सकता है, यह मोहन तुरहा के द्वारा विवादित भूखंड पर विरोध प्रदर्शन के द्वारा देखा जा सकता है। एक तरफ मोहन तुरहा विवादित भूखंड को अपना बताते है तो दूसरी तरफ विरोधी पशुपतिनाथ के पुत्रों द्वारा इसे अपना बता कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
दोनों पक्षो के कागजातों को देखने के बाद इतना तय है कि माननीय राजस्व परिषद व माननीय उच्च न्यायालय प्रयागराज द्वारा इस विवादित भूखंड पर स्थगन आदेश दिया गया है और साफ हिदायत भी है कि दोनों पक्ष किसी भी प्रकार का नव निर्माण नही करेंगे। यहां तक कि सिनेमा हाल के विवाद मे भी स्थगन आदेश है। लेकिन सिनेमा हाल बन भी गया और चल भी रहा है। जबकि इस मामले मे तत्कालीन जिलाधिकारी अदिति सिंह, तत्कालीन एसडीएम जुनेद अहमद, तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर खंड 1 बलिया और अपर आयुक्त प्रशासन को कोर्ट की अवमानना के आरोप मे व्यक्तिगत पेश होना पड़ा था।
विवादित भूखंड के पहले स्वामी थे टेंगरी मियां
टेंगरी मियां पुत्र वजीर मियां ने 1912 मे रजिस्ट्री के माध्यम से 19 बीघा 2 कट्ठा 10 धूर रकबे वाला बाग बगीचा ख़रीदा था। टेंगरी मियां ने 1929 मे उपरोक्त भूखंड मे से 4 बीघा जमीन चरितर तुरहा पुत्र सोमारु तुरहा को रजिस्टर्ड इस्तमरारी पट्टा के माध्यम से बेच दिया। सन 1939 तक चरितर तुरहा ने अंग्रेजी सरकार को इस भूखंड के राजस्व के रूप मे 200 रूपये (50 रूपये /बीघा )जमा किये। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह भूखंड टेंगरी मियां ने रजिस्ट्री के माध्यम से ख़रीदा था, यह पुस्तैनी नहीं थी, जिसके कारण भाई हिस्सेदार हो सके।
भगत मियां व इनके पुत्र अलख मियां ने 1953 मे पशुपतिनाथ को किया रजिस्ट्री
उपरोक्त विवादित भूखंड मे निर्माण कार्य करा रहे पशुपतिनाथ के पुत्र गोपाल जी का कहना था कि हमारे पिता जी ने यह भूखंड भगत मियां (टेंगरी मियां के भाई )और इनके पुत्र अलख मियां से पहले 1952 मे मकबूल पर लिया था जिसको 1953 मे रजिस्ट्री करा लिया गया। उसी समय से यह भूखंड हमारा है, मोहन जी बिना हक के हम लोगों को परेशान कर रहे है।
जब भूमिधरी थी तो क्यों लिया किरायेपर?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब पशुपतिनाथ विवादित भूखंड के भूमिधर थे तो 1972 मे चरितर तुरहा के एक मात्र पुत्र शिवपूजन से जमीन को चूना का गोदाम बनाने के लिये इकरारनामा के आधार पर किराये पर क्यों लिये?
1984 मे शिवपूजन ने क्यों किया विरोध, क्यों दाखिल किया मुकदमा?
माननीय न्यायालय मे दाखिल दस्तावेजों के अनुसार 1984 मे जब चूना वाले गोदाम की जगह सिनेमा हाल का निर्माण शुरू हुआ तो शिवपूजन तुरहा ने इसका विरोध किया कि मैंने किराये पर दिया था, यह निर्माण क्यों हो रहा है। तब बताया गया कि भगत मियां और इनके पुत्रों से रजिस्ट्री करायी गयी है। जब 1952 मे रजिस्ट्री ली गयी थी तो फिर 1972 मे किराये पर लेने की क्यों जरूरत पड़ी। इसके बाद शिवपूजन तुरहा ने माननीय न्यायालय मे 229B का मुकदमा दायर कर दिया। इसके दाखिल होने के बाद माननीय न्यायालय ने कमिश्नर श्री बागची को मौका मुआयना के लिये भेजा। श्री बागची ने अपनी रिपोर्ट मे 122 हरे पेड़ों के होने और कटे हुए पेड़ों की जड़ो को देखने की बात लिखी हुई है। इस पर माननीय न्यायालय ने स्थगन आदेश दे दिया।
इस स्थगन आदेश के खिलाफ पशुपतिनाथ माननीय राजस्व परिषद इलाहबाद मे एक वाद प्रस्तुत किये। दोनों पक्षो को सुनने के बाद माननीय राजस्व परिषद ने स्थगन आदेश 1.9.86 को जारी करते हुए कहा कि दोनों पक्ष विवादित संपत्ति की वर्तमान स्थिति मे कोई बदलाव नही करेंगे। साथ ही सिनेमा हाल के संबंध मे यह कहा कि सिनेमा हाल का निर्माण, निर्माण कर्ता अपने रिस्क पर करेगा, बोर्ड व्यापार की अनुमति नही देता है।







