योगी राज मे भी डंके की चोट पर रिश्वत की मांग, न देने पर बलिया के 10 विद्यालयों का वेतन जीपीएफ रोका, उच्च शिक्षा मंत्री से हुई शिकायत
मधुसूदन सिंह
बलिया।। एक तरफ योगी सरकार जीरो टॉलरन्स की नीति को कड़ाई से पालन कराती है, तो उच्च शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ डॉ रमेश सिंह जैसे लोग सरकार को अपनी घूसखोरी के बदनाम करने का प्रयास करते है। सूच्य हो कि बलिया मे 10 ऐडेड महाविद्यालय है। सभी विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन व अन्य मदो का भुगतान पहले उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी के हस्ताक्षर से होता था। लेकिन शासन ने उच्च शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ को बलिया जनपद के सभी ऐडेड महा विद्यालयों के वेतन व अन्य मदों के भुगतान करने के लिये अधिकृत कर दिया। जब से इनको चार्ज मिला है, बलिया के सभी महा विद्यालयों के अकाउंटेंट इनके यहां बिल ले जाने से मना कर दिये है। शिक्षणेत्तर कर्मचारी संगठन ने पत्र के माध्यम से अपने साथियों के साथ उच्च शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ डॉ रमेश सिंह द्वारा किये जा रहे दुर्व्यवहार की शिकायत सभी प्रचार्यों से की है।
क्या है आरोप
कर्मचारियों का वेतन बिल व जीपीएफ भुगतान को ट्रेजरी के माध्यम से भुगतान मिलने के पहले उच्च शिक्षा अधिकारी से पास कराना पड़ता है।यह कार्य पहले वाराणसी से होता था, लेकिन शासन ने कुछ माह पहले आजमगढ़ के अधिकार क्षेत्र मे बलिया के सभी 10 महा विद्यालयों को शामिल कर दिया है। उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ रमेश सिंह ने अवैध वसूली के लिये बलिया के महा विद्यालयों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के देयको के भुगतान के लिये खुलेआम रिश्वत की मांग करने लगे। रिश्वत नहीं देने पर एक तारीख को मिलने वाला वेतन कब मिलेगा, किसी को पता नहीं है। वेतन बिल के भुगतान के लिये डॉ रमेश सिंह ने प्रति महा विद्यालय 1 हजार रूपये प्रतिमाह की ऐसी डिमांड कर दी, जिससे पूरा बलिया ही उद्वेलित हो गया है। इन महा विद्यालयों के सभी अकाउंटेंट्स ने आजमगढ़ जाने से ही मना कर दिया।
जीपीएफ न मिलने से सेवानिवृत्त प्रोफेसर अवसाद मे
टाउन डिग्री कॉलेज बलिया के पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी प्रो अमलदार निहार, जो उच्च कोटि के साहित्यकार प्रो अमलदार निहार ने एक वर्ष पूर्व बेटी की शादी के लिये जीपीएफ से अपने पैसे को निकालने की दरखास्त दिये थे, लेकिन बेटी की शादी कर्ज लेकर तो हो गयी लेकिन डॉ रामेश सिंह चढ़ावा न मिलने से खासे नाराज है और आजतक उनका जीपीएस का पैसा खाते मे नहीं भेजनें का टोकन ट्रेजरी को भेजें है, जिससे प्रोफेसर अमलदार निहार अवसाद मे है या यूं कहे कि मानसिक विक्षिप्त की हालत मे है। यह हालत कर्ज लिये हुए रूपये के तगादा और न दें पाने के कारण हुई है। इसके लिये सीधे तौर पर उच्च शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ डॉ रमेश सिंह जिम्मेदार है। योगी सरकार का यह भी आदेश है किसी भी कर्मचारी या अधिकारी के सारे देयको का भुगतान हर हाल मे सेवानिवृत्त की तिथि तक हो जाना चाहिये, तो भी एक साल बाद भी क्यों नहीं हुआ? यही नहीं डॉ धर्मात्मा नन्द पूर्व प्राचार्य मथुरा डिग्री कॉलेज रसड़ा,प्रो आरपी सिंह, प्रो अरुण कुमार सिंह का भी सेवानिवृत्त हो जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है। अब ये लोग डॉ धर्मात्मा नन्द के नेतृत्व मे माननीय उच्च न्यायालय की शरण मे जाने वाले है। यह भी बता दे कि प्रो अमलदार निहार का लगभग 61 लाख का भुगतान लंबित है जिस पर अगस्त 2024 से कोई भी व्याज नहीं लगा है। कोर्ट जाने की चिट्ठी मिलने के बाद अब डॉ रमेश सिंह ने धन नहीं होने के कारण भुगतान नहीं हो रहा है, का पत्र चारों लोगों के प्रचार्यो को भेजकर पुनः बिल मांगे है ।
खाते मे ढाई करोड़, फिर भी भुगतान नहीं
गुरुवार को टाउन डिग्री कॉलेज के सभागार मे आहूत आपात बैठक मे टीडी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर दयालानन्द राय, सतीश चंद कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर बैकुंठ नाथ पांडेय, कुंवर सिंह महा विद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह, कमला देवी बाजोरिया डिग्री कॉलेज दुबहर के प्राचार्य प्रोफेसर आशुतोष सान्याल,देवेंद्र पीजी कॉलेज बेल्थरा रोड के प्राचार्य प्रो हरेराम सिंह की उपस्थिति मे उच्च शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ डॉ रमेश सिंह की घोर निंदा की गयी। सभी ने समवेत स्वर मे कहा कि हम लोग अपने खून पसीने की कमाई वेतन मे से एक पैसा भी भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने देंगे।
जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रो बृजेश कुमार सिंह ने डॉ रमेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब खाते मे लगभग ढाई करोड़ रूपये पड़े हुए है तो उच्च शिक्षा अधिकारी आजमगढ़, धन न होने की बात लिख कर भुगतान कैसे रोक सकते है? कहा कि कई कर्मचारियों का एक लाख, दो लाख, तीन लाख जैसी छोटी रकम है, उसको भी चढ़ावा न मिलने से रोकना, उत्तरप्रदेश सरकार को बदनाम करने का प्रयास है। कहा कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारी की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिये।
सभी प्राचार्यों ने उच्च शिक्षा मंत्री को भेजा शिकायती पत्र, की मोबाइल से वार्ता
वेतन भुगतान के लिये प्रति महा विद्यालय 1 हजार का प्रति माह चढ़ावा मांगने वाले उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ रमेश सिंह के खिलाफ बलिया जनपद के सभी 10 ऐडेड महा विद्यालयों के प्राचार्यों ने भी मोर्चा खोल दिया है। इन लोगों ने संयुक्त हस्ताक्षर के द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा,आयुक्त आजमगढ़ मंडल आजमगढ़,जिलाधिकारी बलिया को शिकायती पत्र भेजकर ऐसे भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग की है। टीडी कॉलेज के प्राचार्य ने मोबाइल से उच्च शिक्षा मंत्री उत्तरप्रदेश सरकार को सारे घटनाक्रम की जानकारी दे दी है। उच्च शिक्षा मंत्री ने आश्वस्त किया है कि जांचोपरान्त कठोर कार्यवाही की जायेगी।
शिकायती पत्र के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ का पत्र भी संलग्न किया गया है। हस्ताक्षर करने वालों मे टाउन डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर दयालानंद राय, कुंवर सिंह डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह,प्रोफेसर डॉ बैकुंठ नाथ पांडेय प्राचार्य सतीश चंद कॉलेज,डॉ निवेदिता श्रीवास्तव प्राचार्य गुलाब देवी बालिका डिग्री कॉलेज,डॉक्टर उदय पासवान प्राचार्य दादर आश्रम डिग्री कॉलेज, सिकंदरपुर,डॉ हरेराम सिंह प्राचार्य देवेंद्र पीजी कॉलेज बेल्थरा रोड,डॉ धनंजय सिंह प्राचार्य मथुरा डिग्री कॉलेज रसड़ा,डॉ आशुतोष सान्याल प्राचार्य कमला देवी बाजोरिया महा विद्यालय दुबहर, डॉ गीता प्राचार्य अमर नाथ पीजी कॉलेज दूबे छपरा,डॉ संतोष सिंह प्राचार्य सुदिष्ट पूरी महा विद्यालय सुदिष्टपुरी बैरिया शामिल है।
शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने कहा -भूखों मरना मंजूर, पर हम नहीं जायेंगे बिल लेकर आजमगढ़
उच्च शिक्षा अधिकारी आजमगढ़ डॉ रमेश सिंह के व्यवहार से उपरोक्त सभी दस महा विद्यालयों के एकाउंटेंट इतने आहत है कि उन लोगों ने साफ कह दिया है कि हम लोगों को भूखो मरना मंजूर है लेकिन हम लोगों को डॉ रमेश सिंह के द्वारा किया जाने वाला दुर्व्यवहार मंजूर नहीं है। कहा कि न तो वहां हम लोगों को बैठने की व्यवस्था है, न ही वहां पहुंचने के लिये सीधे साधन की। कहा है कि आजमगढ़ से लगभग 50 किमी की दूरी पर स्थित कार्यालय पर उच्च शिक्षा अधिकारी तीन बजे के पहले आते ही नहीं है और आने के बाद भी 12 बजे रात तक बैठाते रहते है और टोकन भी नहीं देते है। ऐसे मे हम लोगों को बलिया वापस आने के लिये कोई साधन नहीं मिल पाता है। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि डॉ सिंह हम लोगो से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से भी बुरा व्यवहार इस लिये करते है कि हम लोग उनको चढ़ावा नहीं चढ़ा रहे है। कहा कि इसके पहले जब हम लोगों का काम उच्च शिक्षा अधिकारी वाराणसी के यहां से होता था तो हम लोगों से कोई भी चढ़ावा नहीं लिया जाता था। वेतन भुगतान के लिये चढ़ावा, यह तो पूरे भारत मे कही नहीं होता है, सिर्फ आजमगढ़ मे डॉ रमेश सिंह के यहां है।अपनी व्यथा सुनाने वालों मे एकाउंटेंट कुंदन शुक्ला, मनोज सिंह, अभय सिंह, हरे कृष्ण, अमित श्रीवास्तव आदि प्रमुख रहें।










