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जिम्मेदारों की उदासीनता, सुरक्षा विहीन घाट, गंगा की लहरों ने निगली चार जिंदगियां, कसूरवार कौन? यमराज या?

 


कब सचेत होगा बलिया का प्रशासन 

शशि कुमार /मधुसूदन सिंह 

बलिया।। जनपद का जिला प्रशासन लगातार हो रही गंगा नदी मे डूबने की घटनाओ से लगता है, सबक न लेने की कसम खा रखी है। प्रशासन को पता है लग्न के सीजन मे मुंडन संस्कार की भी भीड़ रहती है।हजारों की छोड़ियों लाखों की भीड़ गंगा घाट पर पहुंचती है। इतनी भीड़ को कंट्रोल करने के लिये मुट्ठी भर पुलिस के जवान को लगाया जाता है। जिस चीज को प्राथमिकता के साथ लगानी चाहिये, वो एसडीआरएफ की टीम को लगाया ही नहीं जाता है। यही नहीं यहां के स्थानीय गौतखोरो को भी नहीं लगाया जाता है। जिसका परिणाम यह होता है कि जो डूबता है उसके जिंदा बचाने का प्रयास होता ही नहीं है। मौत के देवता यमराज कहे जाते है लेकिन गंगा नदी मे डूबने से होने वाली मौतों के लिये उदासीन अधिकारियों को यमराज कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होंगी। रविवार की सुबह 4 लोगों के डूब कर मरने की घटना के बाद तो यही कहा जा सकता है।

         गंगा की गहराइयां बनी यमराज का निवास 

बता दे कि बलिया जनपद में गंगा की गहराई,यमराज का स्थायी निवास  बन चुकी है। शिवरामपुर गंगा घाट पर उस समय चीख पुकार मच गई जब लोग मुंडन संस्कार से जुड़ी परंपरा में व्यस्त थे। इसी दौरान कुछ युवतियां गंगा में स्नान करने गयी जो अचानक गहरे पानी में जाने से डूबने लगी। ये देखते ही दो युवक उन्हें बचाने के लिए  नदी में कूद गए लेकिन यमराज तो मानो पहले से ही अपने दरवाजे पर उनका इंतज़ार कर रहे हो, युवकों ने किसी तरह दो युवतियों को बचा लिया। शायद यह  बात यमराज को नागवार लगी और उन दोनों युवकों को भी अपना शिकार बना लिया। घाट पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया, चारो तरफ चीख पुकार मचने लगी, ऐसा कोई नही था जो उन्हें यमराज के दरवाजे से खींच कर ला सके, घाट पर सब बेबस और लाचार थे। परिजनों के आंखों के सामने दोनों युवक और युवतियां गंगा की कोख में समा गई। कई घण्टो के मशक्कत के बाद मानो यमराज ने शरीर से प्राण अपने पास रख कर निर्जीव शरीर को वापस शव के रूप मे गंगा को सौंप दिया। बारी-बारी से चारो शव नदी से बाहर निकाले गए, जहां थोड़े देर पहले मुंडन संस्कार की खुशियां थी वहां अब अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हो गयी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल पोस्मार्टम के लिए भेज दिया। अजीब है लेकिन सच है, पहले गंगा की गहराई मे यमराम ने प्राण हर लिया , शव को गंगा की गोद मे डाल दिया , अब इंसान इन चारों शवो को टुकड़े टुकड़े जांच के नाम पर करने को तैयार है।

घटना से उठे कई सवाल, आखिर कौन है जिम्मेदार 

बलिया के शिवरामपुर घाट पर हुए इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए। ऐसा पहली बार नही हुआ जब यहां खुशियां मातम में बदल गयी हो, इसके पूर्व भी शिवरामपुर गंगा घाट पर अनगिनत बार ऐसी तस्वीरें सामने आ चुकी है। आखिर इसका जिम्मेदाद कौन? धार्मिक भवनाओं और परम्पराओं के पीछे भागने वाले लापरवाह लोग या जिले के जिम्मेदार अधिकारी जिनके ऊपर सुरक्षा की जिम्मेदारी है?  ग्राम प्रधान नरेंद्र सिंह चौहान का सीधे तौर पर कहना था कि पुलिस तो मौके पर जरूर पहुंच गयी लेकिन उन्हें बचाने के लिए उनके पास कोई उपकरण नहीं थे।बताया कि मछुआरों की मदद से सभी शव को बाहर निकाला गया। घाट पर प्रशासन के द्वारा सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे जबकि लग्न में सैकड़ों परिवार मुण्डन संस्कार या अन्य मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन करते है। जिसमे हजारों/लाखों की संख्या वाली भीड़ होती है। कहा अगर यहां सुरक्षा के इंतजाम कर होते तो शायद कई जिंदगी को बचाया जा सकता था। 








सूचना पर शिवराम पुर घाट पहुंचे डीएम एसपी, दिया मातहतो को निर्देश 

आप को बताते चले कि सदर तहसील के अंतर्गत शिवरामपुर संगम घाट पर चार युवक-युवतियों के डूबने की सूचना मिलने पर डीएम-एसपी घटनास्थल पर पहुंचे। हालात का जायजा लिया और पीड़ितों के माता- पिता से मुलाकात कर घटना की पूरी जानकारी ली।

डीएम ने बताया कि सुबह करीब 08:30 बजे मुण्डन संस्कार के दौरान गंगा नदी में स्नान करते समय चार किशोर-किशोरियां गहरे पानी में चले गए। बताया गया कि ये सभी मोबाइल से सेल्फी और रील बना रहे थे, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से गहरे पानी में डूब गए। हादसे में हर्षिता चौहान (17) और नंदिता चौहान (12)  अरुण चौहान (20) और अर्जुन चौहान (21) की डूबने से मौत हो गई। घटना के दौरान अर्पिता और साधना नाम की दो बालिकाओं को स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन, स्थानीय गोताखोरों, नाविकों तथा अग्निशमन एवं आपात सेवा की टीम ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चलाया। कड़ी मशक्कत के बाद चारों शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि मृतकों के परिजनों को राज्य आपदा मोचक निधि से आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस दर्दनाक घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है, वहीं प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। 


जिम्मेदारों को सख्ती से जिम्मेदारी का पालन कराने और जिले की रैंकिंग को लेकर फड़फड़ाने वाले बलिया के डीएम साहब को अब समझ आया कि यहां सुरक्षा के कड़े इंतेजाम होने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। जब चार लोगों ने अपनी जान गंवा दी जबकि इससे पहले भी अनगिनत बार ऐसी घटनाएं सामने आती रही है।