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प्राइवेट हॉस्पिटल की तो जांच, पर सरकारी डॉक्टर्स के हॉस्पिटल्स की कौन करेगा जांच सीएमओ साहब?

 



मधुसूदन सिंह 

बलिया।। जनपद मे प्राइवेट हॉस्पिटल्स की जांच के लिये जिलाधिकारी हो या सीएमओ बलिया हो, हमेशा आदेश करते रहते है। लेकिन उपरोक्त अधिकारी अपने चिकित्सकों के हॉस्पिटल्स पर जांच करने का आदेश देने से न जाने क्यों कन्नी काट लेते है। आलम यह है कि जिला अस्पताल हो या महिला अस्पताल हो, यह चिकित्सकों को मरीज अपने अपने हॉस्पिटल पहुंचाने का जरिया मात्र है। यही कारण है कि जब ये लोग मरीजों मे फेमस हो जाते है तो नौकरी से त्यागपत्र दे देते है। कुछ तो ऐसे है कि जबतक त्यागपत्र स्वीकार नही होता है, तब तक प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते है और 8-10 साल बाद अगर मन बदल गया तो पुनः वापस आकर नौकरी करने लगते है और पिछला वेतन भी एक मुश्त ले लेते है।

बलिया के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल मे तैनात लगभग 90 प्रतिशत चिकित्सकों के अपने अपने हॉस्पिटल है। लेकिन जांच कौन करेगा? सीएमओ बलिया तो इस मामले मे धृतराष्ट्र की तरह कुर्सी पर बैठे रहते है। ऐसा नही है कि इनको पता नही है कि किस डॉक्टर्स का प्राइवेट हॉस्पिटल कहां है? लेकिन वह सीएमओ बलिया हो या इनकी टीम हो, उसको दिखायी देता ही नही है।

सीएमओ ऑफिस के आसपास बिना मान्यता के चलते है पैथलॉजी, अल्ट्रासाउंड 

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सीएमओ कार्यालय के आसपास दर्जनों पैथलॉजी अल्ट्रासाउंड और बिना रजिस्ट्रेशन के हॉस्पिटल संचालित है, लेकिन यह न तो सीएमओ साहब को दिखते है, न ही इसके नोडल व जांच टीम को ही। देहातों मे ये लोग छापमारी करके बिना रजिस्ट्रेशन वालों पर कार्यवाही कभी कभी कर भी देते है लेकिन अपने ऑफिस के आसपास न जाने क्यों नही करते है?

अब देखना है कि प्राइवेट हॉस्पिटल और चिकित्सकों की जांच करने व कराने वाले लोग सरकारी डॉक्टर्स के हॉस्पिटल्स की भी जांच कर कार्यवाही करते है?