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फर्जी आईएएस बनकर 26 शादियां करने वाले प्रीतम निषाद को गोरखपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार

 




फर्जी IAS बनकर रचाई शादी, 15 लाख की ठगी के बाद दुल्हन को गोवा ले जाकर बेचने की साजिश; इटावा से आरोपी गिरफ्तार

गोरखपुर।। भरोसे, रिश्ते और सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर रचा गया एक ऐसा छलावा सामने आया है, जिसने न सिर्फ एक परिवार के सपनों को तोड़ा बल्कि एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र की आशंका भी खड़ी कर दी है। इटावा का रहने वाला युवक प्रीतम कुमार निषाद खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बताकर गोरखपुर के एक परिवार के संपर्क में आया और देखते ही देखते उसने पूरे विश्वास के साथ उस परिवार की बेटी से शादी कर ली।


कैंट थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर इलाके में रहने वाला परिवार अपनी बेटी के लिए योग्य वर की तलाश में था। इसी दौरान एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से प्रीतम निषाद का बायोडाटा सामने आया, जिसमें उसने खुद को मनिकपुर में तैनात अधिकारी बताया। उसने अपने दावों को मजबूत दिखाने के लिए कथित इंटरव्यू के वीडियो, सरकारी कार्यालय में बैठी तस्वीरें और प्रभावशाली लोगों के साथ फोटो साझा किए। उसकी बातचीत और आत्मविश्वास ने परिवार को पूरी तरह आश्वस्त कर दिया और दिसंबर 2025 में हुई मुलाकात के बाद रिश्ता तय हो गया।



शुरुआत में उसने बिना दहेज शादी की बात कहकर विश्वास और मजबूत किया, लेकिन सगाई से ठीक पहले उसने शादी के खर्च का हवाला देते हुए 15 लाख रुपये की मांग रख दी। परिवार सामाजिक दबाव और रिश्ते को बचाने की मजबूरी में इस मांग को मान गया। सगाई के समय 10 लाख और शादी के दौरान 5 लाख रुपये उसे दे दिए गए। इसके अलावा शादी समारोह पर भी करीब 30 लाख रुपये खर्च किए गए।


11 मार्च 2026 को नंदानगर स्थित एक मैरिज लॉन में पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी संपन्न हुई। बारातियों के ठहरने और स्वागत के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे और हर स्तर पर यह आयोजन एक प्रतिष्ठित परिवार के अनुरूप दिखाई दे रहा था। 12 मार्च को विदाई के बाद परिवार ने बेटी को नए जीवन के लिए विदा किया, लेकिन यह खुशी कुछ ही घंटों में डर और सदमे में बदल गई।


शादी में शामिल एक व्यक्ति ने दुल्हन को बताया कि उसका पति कोई आईएएस अधिकारी नहीं है, बल्कि फर्जी पहचान के सहारे लोगों को ठगने वाला व्यक्ति है। यह जानकारी मिलते ही दुल्हन ने तुरंत अपने परिजनों को सूचना दी। बिना समय गंवाए परिजन इटावा पहुंचे, जहां आरोपी ने अपना पता बताया था। वहां का दृश्य पूरी तरह अलग था—न कोई सरकारी आवास, न किसी अधिकारी जैसी व्यवस्था। इसी दौरान आरोपी अपनी बहन के साथ मौके से फरार हो गया और दुल्हन को एक कमरे में छोड़ गया।


दुल्हन को सुरक्षित वापस गोरखपुर लाया गया, जहां उसने जो जानकारी दी, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। उसके अनुसार आरोपी उसे गोवा ले जाने की योजना बना रहा था और रास्ते में ही उसे बेचने की बात कर रहा था। यह खुलासा एक संभावित मानव तस्करी की आशंका को भी जन्म देता है।


पीड़ित परिवार ने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपी और उसके परिजनों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस ने इटावा में दबिश देकर प्रीतम निषाद को गिरफ्तार कर लिया और उसे गोरखपुर लाकर पूछताछ शुरू की।


पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लंबे समय से फर्जी पहचान के सहारे इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहा था और अब तक लगभग 26 युवतियों को अपने झांसे में ले चुका है। उसके पास से कई फर्जी दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनके जरिए वह खुद को अधिकारी साबित करता था। पुलिस अब उसके संपर्कों, संभावित सहयोगियों और अन्य पीड़ितों की तलाश में जुटी है।


यह पूरा घटनाक्रम न केवल एक परिवार के साथ हुई ठगी की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह डिजिटल और सामाजिक माध्यमों के जरिए रची गई झूठी पहचान कितनी खतरनाक हो सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी रिश्ते को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित व्यक्ति की पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें, ताकि ऐसे मामलों से बचा जा सके।