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12 वर्षीय सुनील को जिंदा निगलने वाला जल राक्षस को वन विभाग ने दो दिन बाद पकड़ा, घाघरा से निकाल ले गये सुरक्षित जगह

 




घाघरा में 12 वर्षीय सुनील को मगरमच्छ ने जिंदा खींच लिया, चाचा सात मिनट तक लड़ते रहे; दो दिन बाद वन विभाग ने पकड़ा संदिग्ध मगरमच्छ

बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के बौंडी थाना क्षेत्र में 16 जुलाई की शाम घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। मुरौवा (टिकुरी) गांव के रहने वाले 12 वर्षीय सुनील सिंह की घाघरा नदी में मगरमच्छ के हमले में मौत हो गई। मासूम को बचाने के लिए उसके चाचा ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी। ग्रामीण भी लाठी, डंडे और पत्थर लेकर नदी किनारे पहुंच गए, लेकिन मगरमच्छ की ताकत के आगे सभी बेबस साबित हुए। करीब पांच घंटे की तलाश के बाद नदी से बच्चे का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। घटना के बाद वन विभाग ने अभियान चलाकर हमले के लिए संदिग्ध मगरमच्छ को पकड़ लिया।


जानकारी के अनुसार सुनील के माता-पिता का कई वर्ष पहले निधन हो चुका था। वह अपने चाचा विजय राज सिंह के साथ रहता था। 16 जुलाई की दोपहर वह चाचा के साथ धान की रोपाई करने खेत गया था। कई घंटे तक काम करने के बाद शाम को दोनों घर लौटने लगे। रास्ते में घाघरा नदी किनारे हाथ-पैर धोने के लिए रुके। नदी बिल्कुल शांत दिखाई दे रही थी और किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि पानी के भीतर एक मगरमच्छ शिकार की तलाश में छिपा बैठा है।


सुनील जैसे ही पानी के किनारे झुककर हाथ-पैर धोने लगा, अचानक मगरमच्छ ने तेज रफ्तार से हमला कर दिया। उसने बच्चे के दाहिने पैर को अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया और नदी की ओर खींचने लगा। अचानक हुए हमले से सुनील घबरा गया और जोर-जोर से चीखने लगा। उसकी आवाज सुनकर चाचा विजय राज सिंह दौड़ पड़े और बिना कुछ सोचे-समझे नदी में उतर गए। उन्होंने सुनील का हाथ मजबूती से पकड़ लिया और पूरी ताकत से अपनी ओर खींचने लगे।



कुछ ही क्षणों में आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण भी वहां पहुंच गए। किसी ने लाठियां उठाईं, किसी ने ईंट और पत्थर फेंके तो कुछ लोग बांस लेकर नदी में उतर गए। सभी की कोशिश थी कि किसी तरह मगरमच्छ बच्चे को छोड़ दे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई मिनट तक नदी के किनारे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष चलता रहा। मगरमच्छ बार-बार बच्चे को पानी में खींचता, फिर झटके से उछालता और दोबारा गहरे पानी की ओर ले जाने की कोशिश करता। चाचा लगातार सुनील का हाथ पकड़े रहे और उसे छुड़ाने का प्रयास करते रहे, लेकिन मगरमच्छ की पकड़ लगातार मजबूत होती गई।


चाचा विजय राज सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब सात मिनट तक भतीजे को बचाने की पूरी कोशिश की। एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि बच्चा बच जाएगा, लेकिन अचानक मगरमच्छ ने जोरदार झटका दिया और उनका हाथ छूट गया। इसके बाद मगरमच्छ सुनील को गहरे पानी में खींच ले गया। नदी किनारे मौजूद लोग सिर्फ यह भयावह मंजर देखते रह गए। कुछ ही देर में मगरमच्छ बच्चे के आधे शरीर को निगल चुका था और फिर पानी में ओझल हो गया।


घटना की सूचना मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। परिजन रोते-बिलखते नदी किनारे पहुंच गए। पुलिस और वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। ग्रामीणों के साथ मिलकर तत्काल खोज अभियान शुरू किया गया। घाघरा नदी में तेज बहाव होने के कारण बचाव कार्य बेहद कठिन था। नाव, बांस और टॉर्च की मदद से कई घंटे तक तलाश जारी रही। रात करीब दस बजे घटनास्थल से लगभग 300 मीटर दूर नदी में सुनील का शव उतराता मिला। मगरमच्छ के हमले से शव का दाहिना पैर और कमर के नीचे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि सुनील चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर था। माता-पिता की मौत के बाद चाचा ही उसकी परवरिश कर रहे थे। परिवार पहले से ही आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों से जूझ रहा था, ऐसे में इस हादसे ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया।


घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी सक्रिय हुए। उपजिलाधिकारी ने पीड़ित परिवार को शासन की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। वहीं वन विभाग ने नदी किनारे बसे गांवों में सतर्कता बढ़ा दी और लोगों से अपील की कि मानसून के दौरान बिना जरूरत नदी के किनारे न जाएं तथा बच्चों को अकेले नदी के पास न भेजें।



हादसे के बाद वन विभाग ने हमलावर मगरमच्छ की तलाश के लिए विशेष अभियान शुरू किया। विशेषज्ञों की निगरानी में कई घंटे तक नदी और आसपास के क्षेत्र में रेस्क्यू चलाया गया। अभियान के दौरान एक संदिग्ध मगरमच्छ को पकड़कर सुरक्षित तरीके से वन विभाग की अभिरक्षा में लिया गया और उसे दूसरे सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। विभाग का कहना है कि क्षेत्र में मगरमच्छों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


इस घटना ने घाघरा नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों के मन में दहशत पैदा कर दी है। ग्रामीणों ने नदी के संवेदनशील घाटों पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने, चेतावनी बोर्ड लगाने, नियमित गश्त कराने और मगरमच्छों की निगरानी के लिए स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी दर्दनाक त्रासदी का सामना न करना पड़े।