भीड़ के दबाव मे निजी हॉस्पिटल को सील करना नियम विरुद्ध, जनहित मे भी गलत :नर्सिंग होम्स एसोसिएशन
एक मौत पर प्राइवेट हॉस्पिटल सीज, तो जहां रोज सुबह शाम मौत होती है सरकारी हॉस्पिटल क्यों नही होते है सील
मधुसूदन सिंह
बलिया।। पिछले रविवार को शहर स्थित अपूर्वा नर्सिंग होम मे पथरी का ऑपरेशन कराने आयी महिला की मौत का मामला अब धीरे धीरे चिकित्सकों के लिये अस्तित्व पर संकट लगने लगा है। सूच्य हो कि महिला की मौत के बाद परिजनों द्वारा हंगामा करने के बाद पुलिस ने 5 चिकित्सकों के ऊपर इरादतन हत्या का मुकदमा क़ायम कर चिकित्सकों को गिरफ्तार करने के लिये दबिश दे रही है, तो वही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरे हॉस्पिटल को सील कर दिया है। यही कारण है 45 प्राइवेट नर्सिंग होम्स का प्रतिनिधित्व करने वाले एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ डी राय ने प्रेसवार्ता करके प्रशासनिक कार्यवाही को कटघरे मे खड़ा किया है।
क़ानून की जगह भीड़तंत्र के दबाव मे निजी हॉस्पिटलों पर हो रही है प्रशासनिक कार्यवाही
अध्यक्ष डॉ डी राय ने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों पर भीड़ के दबाव मे या राजनैतिक दबाव मे जो कार्यवाही हो रही है, वह नियम विरुद्ध, गलत और मनमानी है। कहा कि किसी भी हॉस्पिटल मे इलाज के दौरान किसी मरीज की मौत पर अगर कोई विवाद हो जाता है तो इसके लिये माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक आदेश दिया है जिसका पालन पूरे देश मे होता है, सिर्फ बलिया को छोड़कर। इस आदेश मे साफ कहा गया है कि उपरोक्त परिस्थिति मे सीएमओ द्वारा एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया जायेगा। यह बोर्ड सभी शिकायतों व साक्ष्य का अवलोकन करके जो रिपोर्ट सौपेगी, उसी के अनुसार वैधानिक कार्यवाही होनी चाहिये। लेकिन बलिया मे पहले कार्यवाही, फिर कमेटी का गठन और हॉस्पिटल सीज, का चलन बढ़ता जा रहा है। अपूर्वा हॉस्पिटल कांड के चार दिन बीत जाने के बाद भी कमेटी का अतापता नही है। जबकि पहले ही दिन सभी चिकित्सकों के ऊपर इरादतन हत्या का मुकदमा लिख दिया गया, जो कही से भी सही नही है।
किसी की हत्या करने के लिये डॉक्टर नही करता है ऑपरेशन
डॉ अजीत सिंह ने कहा कि कोई भी चिकित्सक अपने मरीज का इलाज हो या ऑपरेशन हत्या करने के इरादे से नही करता है। डॉक्टर अपने मरीज को ठीक करने के लिये जो भी उचित समझता है, वह करता है। कभी कभी मरीज सर्वाइव नही कर पाता है। इसी को लेकर कभी कभी हंगामा हो जाता है, डॉक्टर पर लापरवाही का भी आरोप लगाया जाता है। परिजनों द्वारा दर्ज कराये गये मुक़दमे का डॉक्टर को सामना भी करना पड़ता है।लेकिन मेरा परिजनों से कहना है कि जितना आपको अपने सदस्य के चले जाने का गम होता है, उससे कम हम चिकित्सकों को भी पीड़ा नही होती है। हम किसी की हत्या करने के लिये इस पेशा मे नही आये है, हम लोगों की जिंदगीयां बचाने का प्रयास करते है।
हॉस्पिटल मे मौत पर क्यों नही होता है सरकारी हॉस्पिटल सीज
नर्सिंग होम्स एसोसिएशन के सचिव डॉ वीके गुप्ता ने कहा कि मौत किस अस्पताल मे नही होती है? एम्स हो, पीजीआई हो, बीएचयू हो, जिला अस्पताल हो, प्राइवेट हॉस्पिटल हो, हर जगह मौत होती है लेकिन सीज केवल प्राइवेट हॉस्पिटल होते है, आखिर क्यों? यह गैर कानूनी है।
हॉस्पिटल सीज होने से ये सेवाएं हो जाती है बाधित
ऑपरेशन के दौरान किसी मरीज के मरने पर पूरे हॉस्पिटल को सीज करने से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। जैसे ओपीडी मे जो मरीज दिखाने आते है, उनको भी बैरंग लौटना पड़ता है। सूच्य हो कि जनपद के कुल मरीजों मे से 60-70 प्रतिशत तक मरीजों का इलाज प्राइवेट हॉस्पिटल या चिकित्सकों द्वारा किया जाता है। ऐसे ही चलता रहा तो हम चिकित्सक ऑपरेशन करना ही बंद कर देंगे।
इरादतन हत्या का मुकदमा गलत
सभी सदस्यों ने एक स्वर से कहा कि बलिया प्रशासन की इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की कार्यवाही एक दम गलत है।अगर भीड़ के दबाव मे मुकदमा लिखना ही था तो गैर इरादतन हत्या का लिख देते, हमें आपत्ति नही होती। हम माननीय न्यायालय मे अपना पक्ष रखते।
इस प्रेसवार्ता मे पूर्व सीएमओ डॉ पीके सिंह, पूर्व सीएमओ डॉ एके गुप्ता, डॉ डी राय, डॉ राजेश केजरीवाल, डॉ वीके गुप्ता,डॉ अजीत सिंह,डॉ कृष्णा सिंह आदि मौजूद रहे।







