नगर मजिस्ट्रेट ने की गुमटी दुकानदारों की तुलना अंग्रेजों से, 20 गुना तक बढ़ाया किराया, सड़क पर भूखों मरने लगेंगे सैकड़ों परिवार
जिला प्रशासन की नई नीति, कलेक्ट्रेट की गुमटियों का बढ़ाया 20 गुना तक किराया :प्रशासन की गलती, सरकार को दोषी कहने लगेंगे सैकड़ो दुकानदारों के परिवार
मधुसूदन सिंह
बलिया : एक तरफ चार्रो तरफ गैस की किल्ल्त से वैसे ही लोगों के घर चूल्हा नही जलने की नौबत न आये इसके लिये सरकार तत्परता से लगी हुई है। वही बलिया का जिला प्रशासन तीन चार दशकों से कलेक्ट्रेट मे गुमटियों को रखकर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले सैकड़ो दुकानदारों के घरों मे हजारों लोगों को भूखों मारने की योजना शुरू कर दिया है। कलेक्ट्रेट परिसर मे हाड़तोड़ मेहनत करने वाले चाहे मोची हो, मुहर बनाने वाले हो, लिट्टी चोखा की दुकान चलाने वाले हो, फोटो स्टेट कम्प्यूटर टाइपिंग करने वाले हो, गीता प्रेस की पुस्तक बेचने वाले हो, चायपान बेचने वाले हो, आदि का किराया इस सत्र से 20 गुना तक बढ़ा दिया है, जिससे ऐसे दुकानदारों के सामने बेरोजगारी और भुखमरी का संकट सामने खड़ा हो गया है।
एकाएक किसी का किराया 30 हजार तो किसी का किराया 60 हजार, तो किसी का लाखों मे पहुंच गया है। संवेदनहीनता की हद तो तब सामने आ गयी जब चार दशकों से भी अधिक दिनों से 5×5 फिट की टूटी फूटी गुमटी मे मुहर बनाने का काम करने वाले वरिष्ठ नागरिक ने कहा कि साहब 45 सालों से यही काम करके अपने परिवार का गुजारा कर रहा हूं, अब इस बुढ़ापे मे कहा जाऊंगा, तो नगर मजिस्ट्रेट ने कहा कि 300 साल अंग्रेज हिंदुस्तान मे रहे थे, तो क्या उनको नही भगाया गया। यानि वर्षो से नजारत द्वारा 5 से 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष बढ़ाकर किराया वसूली को चुपचाप जमा करने वाले अंग्रेजों की तरह कब्जाधारी हो गये? जिस तरह से ऐतिहासिक पौराणिक धार्मिक ददरी मेला को, जो गरीबों के बच्चों को साल मे एक बार झूला चरखी पर चढ़ने का अवसर होता था, उसको नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से इतना महंगा कर दिया कि 5 -20 रूपये का टिकट 60-100 रूपये का हो गया और गरीबों के बच्चे बस झूला चरखी देख कर ही संतोष कर लिये।
वही नियम जिला प्रशासन इन दुकानदारों पर भी लादना चाह रहा है। इस नियम को लागू होने के बाद सैकड़ो गरीब दुकानदारों को अपनी दुकाने बंद करनी पड़ेंगी, जिसके कारण हजारों लोग भुखमरी की कगार पर जा सकते है। केंद्र की मोदी सरकार हो या प्रदेश की योगी जी की सरकार हो, वह गरीबों के घर का चूल्हा न बुझे इसके लिये लगातार प्रयास कर रही है। लेकिन बलिया जिला प्रशासन का यह नियम केंद्र व राज्य सरकार के प्रयासों को धक्का पहुंचाने वाला और आगामी चुनाव मे बीजेपी को नुकसान पहुंचाने वाला साबित हो सकता है। अधिकारियो का कहना है कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिये दबाव बना रही है, ऐसे मे सवाल उठता है कि क्या गरीबों को मिटाकर राजस्व बढ़ाया जायेगा।
52 सप्ताह (365 दिन ) मे 48 दिन रविवार 12 दिन द्वितीय शनिवार लगभग 17 दिन सरकारी छुट्टी होती है। बचे हुए 288 दिनों मे रोज लोगों के जूतों को पालिश व मरम्मत करके 200-300 कमाने वाले, मुहर बनाकर 200 रूपये कमाने वाले, चाय बेचकर 300 कमाने वालों से अगर कहा जाये कि तुमको 3000 हजार से 100000 रूपये टैक्स देना है तो वह क्या दे पायेगा। 100 रूपये से बढ़ते बढ़ते जिसका टैक्स 3000 हो गया है, क्या वह 30000 रूपये से 60000 दे पायेगा? हिसाब लगा लीजिये कि अगर वो रोज 200 रूपये की कमाई मे से कम से कम 100 रूपये निकलेगा तब जाकर वह 288 दिनों मे 28800 रूपये ही जोड़ पायेगा। ऐसे मे वह शेष 100-200 रूपये मे दुकान का सामान लाएगा या अपने बच्चों को खिलाने के लिये राशन, पढ़ने के लिये कॉपी किताबें व फीस भरेगा। यह योजना निश्चित रूप से योगी सरकार को गरीबों मे बदनाम करने का काम करेगी।
इसको लेकर मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट के तुगलकी फरमान का विरोध व्यापारियों ने किया। कहा कि 3700 रूपये सालाना किराए को बढ़ाकर,84 हजार रुपए सालाना किराया करने का फरमान तुगलकी है। कहा कि इतना किराया लागू हो जाने पर रोजी रोटी भी चलाना हो मुश्किल हो जायेगा। व्यापारियों ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगायी है।







