विधानसभा में बोले मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय : नियमों से संचालित होती हैं शैक्षणिक संस्थाएं,महाविद्यालय और विश्वविद्यालय शिक्षकों की सेवा शर्तें अलग, तुलना उचित नही
लखनऊ, 17 फरवरी 2026।।प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विधानसभा में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य की प्रत्येक शैक्षणिक संस्था निर्धारित संवैधानिक और वैधानिक नियमों के आधार पर संचालित होती है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय और विश्वविद्यालय दोनों की सेवा संरचना अलग-अलग नियमों से नियंत्रित होती है, इसलिए उनके कर्मचारियों और शिक्षकों की सुविधाओं की सीधी तुलना उचित नहीं है।
मंत्री उपाध्याय ने बताया कि राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षक राज्य सरकारी सेवकों की श्रेणी में आते हैं, जिनकी नियुक्ति एवं सेवा शर्तें संविधान के अनुच्छेद 309 के अंतर्गत अधिसूचित नियमावलियों से विनियमित होती हैं। वहीं, राज्य विश्वविद्यालय तथा उनसे संबद्ध महाविद्यालयों के कर्मचारी उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 तथा उससे संबंधित परिनियमों के अंतर्गत आते हैं, जिससे दोनों की सेवा शर्तों में स्वाभाविक अंतर रहता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के शिक्षक 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि महाविद्यालयों में यह आयु 60 वर्ष है। इसी प्रकार विश्वविद्यालय शिक्षकों को अर्जित अवकाश, विशेष आकस्मिक अवकाश तथा यूजीसी मानकों के अनुरूप अवकाश सुविधाएं प्राप्त होती हैं, जबकि राजकीय महाविद्यालय शिक्षकों के लिए अलग प्रकार की अवकाश व्यवस्था लागू है, जिसमें चिकित्सकीय अवकाश सहित अन्य प्रावधान शामिल हैं।
मंत्री उपाध्याय ने कहा कि यूजीसी नियमावली के अंतर्गत विश्वविद्यालय शिक्षकों को अर्ध वेतन अवकाश और संचयी अवकाश जैसी व्यवस्थाएं मिलती हैं, वहीं महाविद्यालयीन शिक्षकों के लिए सेवा अवधि में चिकित्सकीय प्रमाणपत्र के आधार पर दीर्घकालिक अवकाश की व्यवस्था है। इस प्रकार दोनों व्यवस्थाओं में अलग-अलग प्रकार के लाभ निर्धारित हैं।
मंत्री उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि किसी एक वर्ग को मिलने वाली सुविधा को दूसरे वर्ग पर लागू करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि दोनों की सेवा शर्तें और नियामक ढांचे अलग हैं। तुलनात्मक दृष्टि के बजाय नियमों के अनुरूप व्यवस्था बनाए रखना ही न्यायसंगत है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को संतुलित और नियमसम्मत ढंग से संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा रहे हैं।



