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देश के सबसे बड़े ब्रांडो के पैकिंग में आने वाला दूध स्वास्थ्य के लिए खतरनाक, जांच के बाद विशेषज्ञयों ने दी चेतावनी

 



स्नेहा सिंह 

नोएडा।।ट्रस्टिफाइड के अध्ययन में Amul, Mother Dairy और Country Delight के दूध में मानक से 98 प्रतिशत अधिक कोलिफार्म बैक्टीरिया पाए गए। कोलिफार्म बैक्टीरिया एक ऐसा बैक्टीरिया समूह है, जो मिट्टी, पानी, वनस्पतियों तथा पशुओं और मनुष्यों की आंतों में पाया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये लोहे की छड़ जैसे आकार के बैक्टीरिया होते हैं, जो होस्ट बाडी में सक्रिय रूप से गति करते हैं। इनके अधिक सेवन से बारबार बुखार आना, पेट के विभिन्न रोग, पेट दर्द, दस्त-उल्टी, सिरदर्द जैसी सामान्य बीमारियां होती रहती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अधिक मात्रा में नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। अमूल ताजा दूध में कोलिफार्म की संख्या 980 (CFU/ml) दर्ज की गई, जबकि अमूल गोल्ड में 25 (CFU/ml) पाई गई। मदर डेयरी के गाय के दूध में टोटल प्लेट काउंट 2,40,000 (CFU/ml) था। अमूल मस्ती दही के पाउच में कोलिफार्म बैक्टीरिया का स्तर मानक से 2100 गुना अधिक पाया गया।



देश में एक बार फिर दूध में मिलावट का विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि देश के अधिकांश लोग जो पैकेज्ड दूध का उपयोग करते हैं, उनके दूध में मिलावट है और उसकी गुणवत्ता स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकती है। चाहे उस दूध की चाय बने, कॉफी बने या उससे पनीर और दही तैयार किया जाए, हर स्थिति में स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका जताई गई है।

हाल ही में ट्रस्टिफाइड नामक एक निजी और स्वतंत्र जांच एजेंसी ने एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में बिकने वाले अमूल, मदर डेयरी और कंट्री डिलाइट के दूध गुणवत्ता और स्वास्थ्य मानकों पर खरे नहीं उतरते। एजेंसी ने इन ब्रांडों के सैंपल लेकर उनका टोटल प्लेट काउंट (TPC) और कोलिफार्म बैक्टीरिया की मात्रा की जांच की। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन ब्रांडों के दूध में कोलिफार्म बैक्टीरिया की मात्रा भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के निर्धारित मानकों से 98 प्रतिशत अधिक थी।

यहां उल्लेखनीय है कि भारत में दूध के लिए मानक निर्धारित करने वाली संस्था Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) है। FSSAI के अनुसार दूध के पाउच में 10 CFU/ml तक कोलिफार्म बैक्टीरिया मान्य हैं, लेकिन जांच में कई नमूनों में यह मात्रा कई गुना अधिक पाई गई है।

ट्रस्टिफाइड के अनुसार, अमूल ताजा दूध में 980 (CFU/ml) और अमूल गोल्ड में 25 (CFU/ml) कोलिफार्म पाए गए। मदर डेयरी के गाय के दूध में टोटल प्लेट काउंट 2,40,000 (CFU/ml) था, जो FSSAI के निर्धारित 30,000 (CFU/ml) से लगभग आठ गुना अधिक है। कंट्री डिलाइट के दूध में TPC 60,000 (CFU/ml) पाया गया, जो निर्धारित सीमा से दोगुना है।

केवल दूध ही नहीं, दही के नमूनों में भी समस्या पाई गई। अमूल के मस्ती दही के पाउच में कोलिफार्म बैक्टीरिया का स्तर मान्य सीमा से 2100 गुना अधिक और यीस्ट एवं मोल्ड का स्तर 60 गुना अधिक पाया गया। हालांकि अमूल के टेट्रा पैक और सील पैक कप में बिकने वाले दही की गुणवत्ता सही बताई गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, कोलिफार्म बैक्टीरिया सामान्यतः मिट्टी, पानी और पशुओं के मल में पाए जाते हैं। भारत में अधिकांश स्थानों पर दूध दुहने की प्रक्रिया हाथ से होती है और स्वच्छता के पर्याप्त साधनों का उपयोग नहीं किया जाता। इससे बैक्टीरिया दूध में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा यदि सप्लाई चेन में तापमान नियंत्रण सही न हो, जैसे डेयरी से वैन तक, स्टोर के फ्रिज में या घर में तो बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं।

हाल के समय में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई डेयरियों और मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाने वाली इकाइयों पर छापे मारे गए हैं। गुजरात में एक स्थान पर 300 लीटर मिलावटी दूध, दूध पाउडर, कॉस्टिक सोडा, तेल, डिटर्जेंट और यूरिया बरामद कर नकली दूध बनाने वाली इकाई पकड़ी गई थी।

देशभर में मिलावट रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 246 फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी, 24 रेफरल लैबोरेटरी और 300 मोबाइल फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स यूनिट स्थापित की गई हैं।

दूध को उबालकर ही सेवन करें

विशेषज्ञों का मानना है कि पाश्चुरीकृत दूध भी उपयोग से पहले उबालकर या कम से कम गरम करके ही पीना चाहिए। बिना गरम किए दूध का सेवन करने से पेट दर्द, दस्त, उल्टी, फूड पइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है। घर में भी दूध के पैकेट लाकर उन्हें लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखना गलत है, क्योंकि इससे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ सकती है।

इसलिए चाहे दूध पाश्चुरीकृत ही क्यों न हो, उसे उपयोग से पहले अच्छी तरह गरम करना स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।



स्नेहा सिंह 

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