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आखिर नेताजी को कब तक मिलेगा न्याय ? - अजीत सिन्हा

 


बोकारो (झारखण्ड) ।। नेताजी सुभाष सेना के संस्थापक एवं कमांडर - इन - चीफ अजीत सिन्हा ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र दास मोदी जी के विगत दो वर्षों में नेताजी के सम्मान के प्रति दो घोषणा को हृदय से स्वागत करते हुये देशभक्त प्रेमियों की ओर से प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से आभार प्रकट किया है और उनके कदमों की भूरि - भूरि प्रशंसा करते हुए नेताजी को न्याय दिलाने हेतु पुनः आग्रह भी किया है l 

       विदित हो कि इस बार देश नेताजी की 125 वीं जयंती (जन्मतिथि 23 जनवरी ) मना रहा है । प्रधान मंत्री जी के ट्विटर अकाउंट के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार जब तक नेताजी की प्रतिमा का निर्माण पूर्ण नहीं हो जाता तब तक प्रधानमंत्री जी द्वारा होलोग्राम से युक्त प्रतिमा का इंडिया गेट के पास अनावरण करने की पहल स्वागत योग्य है l पिछले वर्ष 2021 को नेता जी की  जयंती के अवसर पर उनके जन्म दिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी जो कि अति सम्मानीय कदम भाजपा की सरकार द्वारा उठाया गया है । इस कदम से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेम करने वालों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई थी जो कि उनकी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता को इंगित करती है ।









 लेकिन इसी दिवस पर देश की जनता की ओर से नेताजी सुभाष सेना के राष्ट्र में राष्ट्र प्रेम की अलख जगाने वाले अजीत सिन्हा ने प्रधान मंत्री जी से पाँच सवाल पूछे थे जिसके जवाब अभी तक देश की जनता को नहीं प्राप्त हुआ है । हालांकि एक  सवाल के जवाब में उनकी स्वीकारोक्ति में उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी को देश का प्रथम प्रधान मंत्री  माना है लेकिन इसको अमली जामा पहनाने के लिए न ही मंत्रिमंडल से सहमति ही ली गई और न ही देश के दोनों उच्च सदनों के पटल पर मंजूरी हेतु फाइल ही रखी गई । जिससे ये स्पष्ट होता है कि ये मानना कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी देश के प्रथम प्रधान मंत्री हैं लेकिन इस सम्बंध में सरकारी अधिसूचना जारी न करना कार्य को पूर्ण नहीं करने की दिशा में ही उठाया गया कदम है l

श्री सिन्हा ने कहा है कि विगत वर्ष मैंने प्रधानमंत्री जी से  पूंछा था कि आख़िर नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के मौत के रहस्यों पर से कब पर्दा उठेगा ? आगे मैंने ये भी प्रधानमंत्री जी से पूछा है कि नेताजी की यदि हत्या हुई थी तो उनके हत्यारे कौन हैं?यदि हत्यारे या हत्यारों के नाम सार्वजनिक होते हैं तो क्या उन्हें मृत्यु उपरान्त या जीवित मौजूद होने पर उन्हें फांसी की सजा दी जा सकती है । लेकिन अभी तक इस प्रश्न का भी उत्तर अनुत्तरित है और यदि नेताजी के जीवित होने का शक या यकीन तत्कालीन भारत की सरकार को था तो 1958 ईस्वी तक उनके घर की जासूसी क्यों करायी गई? 

आगे अजीत सिन्हा ने भारत की सरकार से यह भी पूंछा है कि यदि नेताजी आजाद हिंद फौज की सरकार भारत की पहली सरकार थी तो क्या वर्तमान भारत की सरकार इसकी मान्यता सरकारी अधिसूचना जारी कर दे पाएगी? यदि नेताजी को अदृश्य रहने पर मजबूर किया गया था, वे कौन - कौन से ग़द्दार थे जिनकी वज़ह से उन्हें ऐसा करने पर मजबूर होना पड़ा? तो क्या भारत की वर्तमान सरकार ऐसे गद्दारों का नाम उजागर कर सकती है? 

ऐसे न जाने कितने प्रश्न अनुत्तरित हैं जिसका जवाब भारत की जनता खोज रही है लेकिन भारत में शासित सरकारों की ऐसी क्या मजबूरी रही कि अभी तक कोई भी सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के संबंध में छुपे रहस्यों को उजागर नहीं कर पा रही है ।


हालांकि नेताजी के सम्बंध में कुछ रहस्यों पर से अवश्य ही पर्दा उठा है जिससे यह स्पष्ट होता है कि नेताजी सही मायनों में भारत के पहले प्रधानमंत्री के पद के हकदार हैं तथा साथ में वे सही मायनों में महात्मा गाँधी की जगह भारत के वास्तविक राष्ट्र पिता भी हैं लेकिन अभी तक उन्हें यह पदवी या इज्जत इस रूप में आधिकारिक तौर पर भारत सरकार द्वारा नहीं प्राप्त हुई है ।

           अंत में अजीत सिन्हा ने एक बार पुनः भारत की सरकार से मांग की है कि नेताजी के संबंध में पूछे गए उपर्युक्त तथ्यों के बारे में बता कर भारत की जनता पर  कृपा करे और यही मेरी समझ से उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिससे देश के ग़द्दार मरणोपरांत भी शर्मसार होंगे और भारत की जनता के नजरों में गिर जाएंगे l 

       नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के चरणों में कोटि - कोटि नमन एवं वंदन करते हुए अजीत सिन्हा ने अपनी बात की समाप्ति की और आशा की कि भारत की सरकार उनके द्वारा पूछे गये प्रश्नों के संबंध में सुधि लेगी l  जय हिंद, जय भारत, जय माँ भारती