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योगी राज में भी यह है आलम : भ्रष्टाचार की 26 जांच ,पर कार्यवाही एक पर भी नही

 


मधुसूदन सिंह

बलिया ।। सीएम योगी प्रतिदिन भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करते है या करने का आदेश देते है लेकिन प्रदेश का बलिया जनपद ऐसा है जहां भ्रष्टाचार पर स्थानीय प्रशासनिक अमला कार्यवाही नही करता है बल्कि जांच को लंबित करके भ्रष्टाचारियों को अपरोक्ष रूप से और भ्रष्टाचार करने की छूट देता है । अगर ऐसा नही होता तो बलिया में भीमपुरा थाना क्षेत्र के एक आरटीआई एक्टिविस्ट चौहान को अपात्रों को इंदिरा आवास आवंटित होने के खिलाफ 2017 से लड़ाई न लड़नी पड़ती, सोये हुए प्रशासनिक अधिकारियों के कानों में कलेक्ट्रेट पर अपनी पत्नी के साथ धरना देकर यह नही कहना पड़ता कि साहब जागिये ,देखिये आपके क्षेत्र का मुर्दा भी शपथ पत्र देता है कि मैं जिंदा हूं ।

  सच माने तो जनाब ,बलिया एक अलग ही देश व लोक है । यहां प्रदेश व देश की सरकारों के आदेशों के इतर काम होते है ।यहां जनता की कम और राजनेताओ की ज्यादे सुनने वाले अधिकारियों की जय जय कार होती है । जिसके ऊपर सबसे ज्यादे भ्रष्टाचार की शिकायत हो,उसी की यहां सबसे ज्यादे दरकार होती है । अब किसको होती है यह आप सोचिये क्योकि जनता को तो नही होती है ।

अब आइये बात कर लेते है नगर पालिका बलिया और इसके अधिशाषी अधिकारी श्री दिनेश कुमार विश्वकर्मा की । आजकल साहब बहुत चर्चे में है । कभी चेयरमैन इनके खिलाफ शासन से लगायत मुख्यमंत्री तक भ्रष्टाचार की शिकायत करते है ,तो कभी कर्मचारी संगठन के लोग । कर्मचारी संगठन के लोग तो इनके रिश्तेदार के समक्ष अमर्यादित भाषा का प्रयोग तक कर देते है,तूतू मैं मैं करते है,प्रशासनिक अमला पहुंचता है,कोतवाली में तहरीर तक दी जाती है,पर होता कुछ नही ।

  भ्रष्टाचार पर कठोर कार्यवाही करने वाली योगी सरकार में भी अधिशाषी अधिकारी दिनेश विश्वकर्मा पर 26 भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच मंथर गति से चल रही है,किसी पर कोई कार्यवाही अब तक न होना , यह साबित करता है कि इस अधिकारी की पहुंच शासन व सरकार में बहुत ऊंची जगह तक है । वैसे श्री विश्वकर्मा अपनी पहुंच का प्रदर्शन 2019 में हुए अपने स्थानांतरण के समय दिखा चुके है और बलिया नगर विधायक आनंद स्वरूप शुक्ल के आदेश को निरस्त कराकर अब तक बलिया में शान से टिके हुए है । यह अलग बात है कि अब नगर विधायक श्री शुक्ल जी मंत्री हो गये है और पुनः श्री विश्वकर्मा के खिलाफ कई पत्र शासन व मुख्यमंत्री को भेज चुके है लेकिन अधिशाषी अधिकारी दिनेश विश्वकर्मा की सेहत पर कोई असर नही हुआ है ।

 अभी पिछले हफ्ते ही जिला व सत्र न्यायालय परिसर के बाहर संचालित वाहन स्टैंड को चेयरमैन अजय कुमार समाजसेवी ने अवैध कहते हुए पकड़ा था,इसमे डेढ़ माह से वसूली हो रही थी लेकिन एक भी रुपये नगर पालिका के कोष में जमा नही हो रहा था । यह अधिशाषी अधिकारी दिनेश विश्वकर्मा की देखरेख में सीधे सीधे सरकारी धन की लूट है ,चेयरमैन समाजसेवी ने इससे संबंधित तहरीर भी दे दिया फिर भी जांच चल रही है कि यह गबन की श्रेणी में आता है कि नही ?

योगी जी,जरा आप फुर्सत निकाल कर बलिया पर भी निगाह डालिये और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और ऐसे लोगो को संरक्षण देने वाले उच्चाधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही कीजिये, नही तो बलिया में पद स्थापित ये अधिकारी आपकी सरकार को बदनाम कर देंगे क्योकि मुर्दों का शपथ पत्र भी बलिया में बन जाता है और मुर्दा अपने आपको जिंदा घोषित कर देता है ।