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जाने कौन कौन है और कौन किसकी तरफ , अयोध्या राम मंदिर मामले में कौन है मध्यस्थ ?




8 मार्च 2019 ।।

अयोध्या मामले एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्‍या मामले में मध्‍यस्‍थता के आदेश दे दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए पैनल गठित करने के आदेश दिए हैं. मध्‍यस्‍थों में तीन-तीन सदस्‍य शामिल होंगे. मध्‍यस्‍थता बोर्ड के सदस्‍य में श्रीश्री रविशंकर को भी शामिल किया गया है. अगले हफ्ते फैजाबाद में मध्‍यस्‍थता की जाएगी. मध्‍यस्‍थता बोर्ड में तीसरे सदस्‍य के तौर पर श्रीराम पंचू को रखा गया है. मध्‍यस्‍थता बोर्ड के अध्‍यक्ष कलिफुल्‍लाह होंगे. चार हफ्तों के अंदर मध्‍यस्‍थता की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सौंपने को कहा गया है.

इसमें अलग-अलग पक्षों को लेकर कई सालों से मामला कई सालों से कोर्ट में लटका हुआ है.  अभी तक अयोध्या मामले में 90,000 पन्नों की गवाही इकट्ठी की गई है. ये 90,000 पन्नें अलग-अलग भाषाओं में है जिसमें अरबी, संस्कृत, फ़ारसी जैसी भाषाओं में ये गवाही है. इसे इंग्लिश में ट्रांसलेट करके सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया है.

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 अपीलें दायर की गईं हैं. इनमें से 6 याचिकाएं हिंदुओं की तरफ से हैं और 8 मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से हैं.

कितने पक्ष हैं:

मुख्य रूप से इस मामले में 3 पक्ष हैं.

पहला पक्ष: पहला पक्ष तो मंदिर के भीतर बैठे हुए भगवान राम का है. राम की तरफ से विश्व हिंदू परिषद लड़ रहा है.

दूसरा पक्ष: यह पक्ष है हिंदुओं के सबसे बड़े अखाड़े निर्मोही अखाड़े की तरफ से. निर्मोही अखाड़ा पिछले करीब सौ साल से इस जगह पर मंदिर बनवाने की लड़ाई लड़ रहा है.

तीसरा पक्ष: तीसरा पक्ष मुसलमानों का है जो सुन्नी वक्फ बोर्ड है.