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बलिया : अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च 2019) की पूर्व संध्या पर विशेष स्टोरी : बबिता - एक आशा बहू जिसने बचायी कई एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों की जिंदगी , कराया सुरक्षित प्रसव

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च 2019) की पूर्व संध्या पर विशेष स्टोरी : बबिता - एक आशा बहू जिसने बचायी कई एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों की जिंदगी , कराया सुरक्षित प्रसव


एनीमिया से ग्रसित महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराकर एवं नसबंदी द्वारा कई परिवारों की खुशहाली एवं बेहतर सेहत पाने में की मदद 
बलिया, 7 मार्च 2019 – देश में आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं ए०एन०एम० (AAA) समुदाय और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं| आबादी के वंचित वर्ग विशेषकर महिलाएं एवं बच्चें जिनका स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुचना मुश्किल होता है, वहां आशा इनके लिए संजीवनी के समान हैं|
यह कहानी मनियर ब्लॉक की ग्राम पंचायत सरवार ककरघट्टी की रहने वाली बबिता देवी आशा की है । जिन्होंने अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधाओं को घर –घर तक पहुचाने में अपना अमूल्य योगदान दिया हैं| 60 से अधिक गंभीर एनीमिया से ग्रसित महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया,100 से ऊपर महिलाओं को प्रोत्साहित कर नसबन्दी उनके द्वारा कारवाई गयी| सरकार द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले कार्यक्रम जैसे-पल्स पोलियों,मातृत्व सुरक्षा कार्यक्रम,राष्ट्रीय क्षय नियन्त्रण कार्यक्रम,मिशन इन्द्रधनुष आदि कार्यक्रमों में वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं| वह बताती हैं कि आशा बनने से पहले इस क्षेत्र में सरकारी अस्पताल में सुविधा लेने से कतराते थे और कहते थे कि स्वास्थ्य केन्द्रों पर कभी डॉक्टर नहीं मिलते जिससे उन्हे प्राइवेट अस्पताल ही जाना पड़ता था। लेकिन धीरे-धीरे जब बबिता ने घर-घर जाकर योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में बताना प्रारम्भ किया तब से समुदाय में बहुत अधिक बदलाव आया है।
बबिता देवी वर्ष 2007 से आशा बहू के रूप में कार्य कर रही हैं| उस समय उनकी उम्र मात्र 24 वर्ष थी| बबिता देवी की शादी सन 2000 में हुई 2002 में एक बच्चा हुआ,गर्भ अवस्था के दौरान उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा, इसी दौरान उन्होंने निश्चय किया कि गर्भ अवस्था के दौरान उन्होंने जिन परेशानियों का सामना किया वो किसी और को जानकारी के अभाव में न करने पड़ें। इसके बाद उन्होने प्रत्येक गर्भवती महिला को प्रसव पूर्व और प्रसव पश्चात से जुड़ी जानकारियों के बारे में बताया जिससे जच्चा-बच्चा किसी प्रकार की समस्या न हो और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाये जा सके।
सरकार के द्वारा बेहतर कार्य हेतु उन्हें तीन बार प्रथम पुरस्कार एवं एक बार द्वितीय पुरस्कार दिया गया| परिवार नियोजन की स्थायी विधि नसबंदी में किये गये सराहनीय कार्य के लिए सिफ्सा द्वारा आजमगढ़ मण्डल स्तर पर समान्नित किया गया| बबिता देवी के कार्यों से उनके क्षेत्र के आस-पास की सभी आशायें बहुत प्रभावित हैं| क्षेत्र की सभी आशाएं उनके कर्मठता को देखकर उनके नक्शे कदम पर चलने का प्रयास कर रही हैं|