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विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश 2047, विकसित बलिया 2047 : अरविंद सिंह (पूर्व आईएएस ) ने योगी जी से की मुलाक़ात,सौपा विकास का रोडमैप

 



 




लखनऊ।। बलिया के विकास का रोडमैप बनाने की जिम्मेदारी निभा रहे पूर्व आईएएस अरविंद कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट कर बलिया के विकास का एक खाका सौपकर उसपर अमल की सिफारिश की है। 

जनपद बलिया के लिए प्रेषित कार्ययोजना के कुछ महत्वपूर्ण कार्य निम्नवत् हैं:

1. बलिया जिले में स्थापित होने वाले मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया जाना है।

2. कृषि रिसर्च सेन्टर की स्थापना

आधुनिक खेती, किसान प्रशिक्षण, नई तकनीक

3. शहीद मंगल पाण्डे पुस्तकालय की स्थापना

युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन एवं डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना

4. छह मुड़ियारी और सुरहा ताल (वेट लैण्ड) को रामसर स्थल घोषित किया जाना

पर्यटन-पर्यावरण-स्थानीय रोजगार

5. बांसडीह तहसील में सब्जी एवं काली गाजर की खेती को बढ़ावा देना

6. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से बलिया जाने के लिए 310 किलोमीटर पर स्थित कासिमाबाद पर कट/ बाईपास का निर्माण किया जाना आवश्यक है। ज्ञातव्य है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का कोई भी कट/बाईपास बलिया जिले में नहीं है।


रिक्त पदों पर यथाशीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया सम्पन्न की जाय। साथ ही आवश्यकतानुसार नये पदों का सृजन किया जाय। भारत को विकासशील से विकसित बनाने हेतु विदशों से उच्ब शिक्षा प्राप्त कर रहे मेधावियों को देश में सेवा करने हेतु प्रोत्साहित किया जाय। कृषि- जनपद में रची-खरीफ की फसलों के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की सब्जियों, श्रीअन्न, ज्वार, बाजरा, मक्का और दलहनी फसल मसूर, चना, मटर आदि का उत्पादन किया जाता है।

 विगत वर्ष जिले की बांसडीह एवं मनियर में उत्पादित सब्जियां अरब देशों को भेजी गयी थी। कृषि उत्पाद हेतु किसानों को और अधिक जागरूक एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जनपद में बॉसडीह तहसील और बैरिया तहसील सब्जी उत्पादन के बडे क्षेत्र है, इनकी प्रमुख मण्डी क्रमशः केवरा और मिर्जापुर बेरिया है। तात्कालिक रूप से सडक पर लगने वाली इन दोनो मण्डियों के लिए कृषि उत्पादन मण्डी समिति के माध्यम से छायादार सुरक्षित मण्डी स्थल का निर्माण कराना, यहाँ सब्जियों की साफ-सफाई के लिए वाटरटैंक, छोटे वातानुकूलित स्टोरेज जहाँ सब्जियां एक-दो दिन रखी जा राकें तथा व्यापारियों/किसानों के विश्राम हेतु एक सामुदायिक कक्ष पेयजल प्रसाधन आदि से युक्त करने की आवश्यकता है। 

यहाँ उत्पादित मक्के के उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए किसानों की समिति गठित कर पापकार्न, मक्के का आटा बनाने की यूनिट स्थापित की जा सकती है। मक्का, ज्वार, बाजरा, धान की भूसी आदि से मछली और मुर्गियों के लिए दाना बनाने के लिए बहुत कम लागत पर सूक्ष्म उद्योग लगाए जा सकते है, जिससे मछली, मुर्गी पालन करने वाले लोग इससे लाभान्वित होंगे। विकास खण्ड हनुमानगंज के ग्रामों में आयुर्वेदिक औषधियों में प्रयोग हाने वाली जडी बुटियों के लिए बहुत ही उर्वर क्षेत्र है। यहाँ बहुतायत से अनेक औषधियां उगायी जा सकती है, जो रोजगार भी उपलब्ध करा सकते है। जनपद में दोनो तरफ से गंगा एवं घाघरा नदियों से घिरा हुआ है इसके अतिरक्त मगही तमसा बहेरा नाला आदि आंतरिक नदियां है। सुरहातात, दहताल (मुडियारी), रेवती ताल रामपुर ताल आदि ताल है, जो मुख्य नदियों से जुड़े है, जिसके कारण बाढ आपदा आती है। जिससे कृषि उपज और भूमि कटान के कारण प्रत्येक वर्ष फसलों जन धन हानि होती है। इस हेतु नदियों के किनारों पर तटबन्ध बनाने का सुझाव दिया गया।

 दह तालों में मछली पालन के साथ-साथ जलकुम्भी से उर्वरक बनाया जा सकता है। सब्जी उत्पादन जैसे सेरूकी, दोहना की जा सकती है। इसके अतिरिक्त सुरहाताल एवं दहताल में मखाना की खेती के लिए उपयुक्त वातारण उपलब्ध है। जिससे इनकी खेती किये जाने के सुझाव कृषकों द्वारा प्राप्त हुए। जनपद बलिया में एकीकृत कृषि प्रणाली के अन्तर्गत फसलोत्पादन के साथ साथ सब्जियों की खेती, फलों, मछली पालन, मशरूम उत्पादन, वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन आदि को बढ़ावा देकर किसानों की आय को बढ़ाते हुए रोजगार के अवसर पैदा करते हुये शहरी पलायन को रोका जा सकता है। नगर एवं ग्राम्य विकास सेक्टर शहर बलिया में नये पार्क की स्थापना का सुझाव दिया गया। 

स्वास्थ्य सेक्टर सदर चिकित्सालय बलिया में सृजित पद के सापेक्ष शत प्रतिशत चिकित्सकों की तैनाती सम्बन्धी सुझाव दिये गये। मेडिकल कालेज को शीध्र आरम्भ करने की अपेक्षा की गयी। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनबरसा को शीध्र आरम्भ कराने तथा मानक के अनुरूप चिकित्सकों की तैनाती सम्बन्धी सुझाव दिये गये। औद्योगिक विकास जनपद में परवल की प्राकृतिक खेती प्रचुर मात्रा में होती है। जनपद बलिया हेतु परवल को जी०आई० टैग देने का सुझाव दिया गया। स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादित उद्योग की स्थापना किये जाने का सुझाव दिया गया। बलिया में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण औद्योगिक विकास के लिए एक बड़ा अवसर है। इसके किनारे औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सड़क और रेलवे नेटवर्क क मजबूत करने से लॉजिस्टिक्स और परिवहन में सुधार होगा।

 उद्योगों के लिए बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना जरूरी है। उत्तर प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों का लाभ उठाकर बलिया में उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को वित्तीय और तकनीकी समर्थन देकर, स्थानीय संसाधनों और कच्चे माल का उपयोग करके बलिया में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा सकता है, जैसे खाद्य प्रसंस्करण इकाइ‌याँ। स्थानीय युवाओं के लिए औद्योगिक कौशल विकास कार्यक्रम को बढ़ाने तथा उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया गया। स्थानीय स्तर पर स्थापित समूहों के लिए लीज पर भूमि की आवण्टन का सुझाव दिये गये। 

पर्यटन- बलिया में प्राकृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन की अच्छी संभावनाएँ हैं, जिनमें सुरहा ताल पक्षी अभयारण्य, भृगु आश्श्रम, और 'बागी बलिया के रूप में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। इन स्थानों के अलावा, कई मंदिर और स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर भी पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं, यदि उनका उचित विकास और प्रचार किया जाए तो पर्यटन में आपार सम्भावनाएं है। भारत छोड़ो आंदोलन 1942 के दौरान बलिया ने 'बागी बलिया के रूप में स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस ऐतिहासिक पहलू को बढ़ावा देकर पर्यटक ऐतिहासिक और राष्ट्रप्रेमी पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। सुरहा ताल एवं पर्यटन से सम्बन्धित प्रबुद्धजनों एवं जन सामान्य के बीच सम्वाद हुआ। जिसके अन्तर्गन यह अवगत कराया गया कि पर्यटन को केवल स्थलों का भ्रमण न मानते हुए, इसे रोज़गार सृजन, स्थानीय विकास, सांस्कृतिक समृद्धि और राष्ट्र की आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम समझना होगा। हर राज्य और हर क्षेत्र की साझी भागीदारी से ही उ०प्र० पर्यटन के क्षेत्र में देश में अपनी श्रेष्ठता और सांस्कृतिक नेतृत्व को स्थापित कर पाएगा।

अवस्थापना के अन्तर्गत बलिया में इंफ्रास्ट्रक्बर पर जनपद में विकास कार्यों और मौजूदा चुनौतियों के बारे में एक संवाद हुआ। सड़क संपर्क के अन्तर्गत बलिया लिंक एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमा परियोजनाएँ, पेयजल और स्वच्छता एवं हवाई अडडा एवं अन्य ब शहरी से बेहतर कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई।


शिक्षा प्राचीन भारतीयता आधारित कृषि बागवानी, प्राकृतिक चिकित्सा ज्ञान पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाय। स्थानीय परम्पराओं, कौशल आधारित पाठ्यक्रम को विभिन्न स्तर (प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च) पर पढ़ाया जाय, जिससे छात्रों का चौमुखी विकास हो सके। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में सम्वाद के दौरान छात्रों द्वारा अवगत कराया गया कि विश्वविद्यालय में पुस्तकालय की सुविधा वर्तमान में उपलब्ध नहीं है। इस सम्बन्ध में उनके द्वारा सुझाव दिया गया कि पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध करायी जाय, जिसमें सभी सम्बन्धित विषयों से सम्बन्धित पुस्तके उपलब्ध हो। इस सम्बन्ध में कुलपति द्वारा सकरात्मक आश्वासन दिया गया। जननायक चन्द्रशेखर विद्यालय में सम्वाद के दौरान छात्रों द्वारा अवगत कराया गया कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने के कारण छात्रावास की मांग की गयी। 

जनपद में मेडिकल कालेज के अतिरिक्त अन्य कालेज यथा-इन्जीयरिंग कालेज, पैरामेडिकल कालेज, विधि कालेज तथा नारी सशक्तिकरण हेतु महिला विद्यालय खोलने जाने का सुझाव दिया गया। जो संस्थाएं (प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च) स्थापित है, उनका सुदृढीकरण किया जाए, जिससे गुणवत्तापरक शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त हो सके। सामान्य शैक्षिक संस्थाएं (महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय) आदि के स्थान पर नयी विशेषज्ञता वाली संस्थाएं यथा चिकित्सा, अभियन्त्रिकी, अध्यापक शिक्षा, विधि आदि की संस्थाओं/ विश्वविद्यालयों की स्थापना पर सुझाव दिया गया।