बलिया मे NICU मतलब बच्चों के जान की क़ीमत वसूलने का आधिकारिक दस्तावेज युक्त सेंटर
बलिया मे NICU मतलब बच्चों के जान की क़ीमत वसूलने का आधिकारिक दस्तावेज युक्त सेंटर
अनट्रेंड के हाथों मे नौनिहालों की जिंदगी सौपने को मजबूर परिजन
जरुरी मशीनरी व ट्रेंड स्टॉफ का अभाव, फिर भी भौकाल टाइट
बिना वेंटीलेटर संचालित है NICU
सीएमओ कार्यालय की सुस्ती यानी परिजनों को लूटने की अप्रत्यक्ष छूट
मधुसूदन सिंह /मनोज राय
बलिया।। NICU नाम सुनते ही आपके दिमाग़ मे ICU की तस्वीर घूमने लगेंगी यानी वह स्थान जहां धरती के भगवान (डॉक्टर्स )आपके बच्चों को यमराज के मुंह से बाहर निकालने के लिये अपनी पूरी शक्ति लगाते है। अगर आप यह सोचते है, तो आप गलत कर रहे है। क्योंकि बलिया मे कुछ को छोड़ कर जो भी संचालित है, वह बिना पंजीकरण के ही संचालित है। ऐसे मे आप सोच सकते है कि जो पंजीकृत है जब वह मानक विहीन है तो जो बिना पंजीकरण के चल रहे है, उनके यहां मानक की क्या स्थिति है? वर्तमान मे प्राइवेट अस्पतालों का यह अतिरिक्त आय का स्रोत बन गया है। एक तरफ प्रसव, ऑपरेशन से कराने का 40 से 50 हजार लिये जा रहे है, तो वही बच्चे को एक दिन NICU मे रखने के लिये 5000 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूली की जा रही है। बलिया मे एक भी NICU मानक के अनुरूप संचालित नहीं है, न ही सीएमओ कार्यालय हो या इसके नोडल हो, उनको फुर्सत है कि बच्चों की जिंदगियो के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जाय।बिना वेंटीलेटर के ये NICU संचालित है।
कब होते है नवजात शिशु NICU मे भर्ती
ऐसे माताओं के बच्चे जिनकी उम्र 16 साल से कम या 40 साल से अधिक होती है, उनके अधिकतर बच्चे जन्म के बाद NICU मे भर्ती होते है।
ऐसी माताएं जो ड्रग या शराब का सेवन करती है, मधुमेह की मरीज होती है, के बच्चे भी प्रसव के बाद NICU मे भर्ती होते है। साथ ही उच्च रक्त चाप की मरीज, अत्यधिक रक्त श्राव, वाली महिलाओं के नवजात शिशुओ को NICU मे रखा जाता है।
ऐसी महिलाये जिनको सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीजेज हो, जुड़वा व तीन या अधिक बच्चे पेट मे हो, उनके बच्चों को भी NICU मे रखा जाता है।
गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान गर्भ में शिशु के चारों ओर मौजूद पानी (Amniotic Fluid) का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसकी मात्रा का सही होना शिशु के विकास, उसे हिलाने-डुलाने और सुरक्षा के लिए ज़रूरी है। एमनियोटिक द्रव की सामान्य मात्रा 8-24 सेमी (AFI) के बीच मानी जाती है।
शिशुओ के जन्म के लिये सबसे खतरनाक स्थिति
कम एमनियोटिक द्रव (Too Little Amniotic Fluid - Oligohydramnios)ओलिगोहाइड्रेमनियोस (Oligohydramnios) का मतलब है कि बच्चेदानी में पानी का स्तर बहुत कम है। ऐसे मे पेट का आकार उम्मीद से छोटा दिखना, बच्चे की हलचल कम महसूस होना, या वजाइना से पानी का रिसाव (Leaking) होना, कारण होता है। यह 24 सप्ताह पहले यदि है तो बेहद ख़तरनाक होता है । ऐसे गर्भाशय से पैदा हुए शिशु को NICU मे रखना जरुरी होता है।
ज्यादा एमनियोटिक द्रव (Too Much Amniotic Fluid - Polyhydramnios) पॉलीहाइड्रेमनियोस (Polyhydramnios) का मतलब है कि गर्भाशय में पानी की मात्रा जरूरत से ज्यादा है। ऐसे गर्भ मे सांस लेने में तकलीफ, या पेट में बहुत ज्यादा खिंचाव महसूस होता है।ऐसे गर्भ से पैदा शिशुओ को भी NICU मे भर्ती किया जाता है।
एनआईसीयू (NICU) की मेडिकल टीम
नियोनेटोलॉजिस्ट (Neonatologists)
बीमार और समय से पहले जन्मे बच्चों के विशेषज्ञ डॉक्टर।
नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) के मुख्य प्रभारी।
फेलोज़, रेजिडेंट्स और नर्सों की टीम का मार्गदर्शन करते हैं।
इनकी योग्यता निम्न होनी चाहिये ---
नवजात शिशु विशेषज्ञ (Neonatologist) बनने के लिए एमबीबीएस (MBBS) के बाद बाल रोग में MD/DNB और फिर नवजात विज्ञान (Neonatology) में सुपर-स्पेशियलिटी डिग्री (DM/Fellowship) अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर 10-11 साल लग जाते है।
मूल डिग्री (MBBS): किसी मान्य संस्थान से बैचलर ऑफ मऑफ सर्जरी (MBBS) की डिग्री।
बाल रोग विशेषज्ञ (Postgraduate Degree): बाल रोग (Pediatrics) में MD (Doctor of Medicine) या DNB (Diplomate of National Board)।
सुपर-स्पेशियलिटी (Super-Specialization): नवजात शिशु विज्ञान (Neonatology) में DM (Doctorate of Medicine) या Fellowship।
प्रशिक्षण (Training): नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में गंभीर रूप से बीमार या समय से पहले जन्मे (Premature) शिशुओं के इलाज का विशेष अनुभव।
प्रशिक्षण का चरणबद्ध मार्ग:
MBBS: (5.5 वर्ष)
MD/DNB Pediatrics: (3 वर्ष)
DM/Fellowship in Neonatology: (3 वर्ष)
आवश्यक कौशल:
नवजात पुनर्जीवन (Neonatal Resuscitation)।
NICU प्रबंधन और वेंटिलेटर सहायता।
गंभीर जन्मजात विकृतियों का निदान और उपचार।
यह एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञता है, जो मुख्य रूप से जन्म से लेकर पहले 28 दिनों (Neonatal period) तक के शिशुओं की गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रबंधन करती है।
नियोनेटल फेलो (Neonatal Fellow)
बाल रोग विशेषज्ञ जो नवजात शिशुओं की विशेष ट्रेनिंग ले रहे हैं।
बच्चों के इलाज और मेडिकल प्रक्रियाओं को सीधे संभालते हैं।
पीडियाट्रिक रेजिडेंट (Pediatric Resident)
बच्चों के इलाज की सामान्य ट्रेनिंग ले रहे डॉक्टर।
मुख्य डॉक्टर की देखरेख में इलाज में मदद करते हैं।
नियोनेटल नर्स प्रैक्टिशनर (Neonatal Nurse Practitioner)
नवजात शिशुओं की देखभाल में विशेष योग्यता प्राप्त रजिस्टर्ड नर्स।
बच्चों की मेडिकल जांच और इलाज में मदद करती हैं।
रजिस्टर्ड नर्स (Registered Nurse - RN)
बच्चे की 24 घंटे लगातार देखभाल करने वाली नर्स।
दवाओं को समय पर देना और सेहत पर नज़र रखना।
माता-पिता को बच्चे की देखभाल करना सिखाना।
रेस्पिरेटरी थेरेपिस्ट (Respiratory Therapist)
सांस से जुड़ी समस्याओं के इलाज के विशेषज्ञ।
ब्रीथिंग मशीन (वेंटीलेटर) और ऑक्सीजन सप्लाई को संभालना।
फिजिकल, ऑक्यूपेशनल और स्पीच थेरेपिस्ट
बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की निगरानी करना।
बच्चे को सही पोजीशन में रखना और शांत करना।
स्पीच थेरेपिस्ट बच्चे को मुंह से दूध पीना सिखाते हैं।
रजिस्टर्ड डाइटिशियन न्यूट्रिशनिस्ट (RDN)
बच्चे के सही विकास और पोषण के विशेषज्ञ।
कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की मात्रा तय करना।
लैक्टेशन कंसलटेंट (Lactation Consultants)
मां को स्तनपान (Breastfeeding) कराने की ट्रेनिंग देने वाले एक्सपर्ट।
दूध निकालने (Pumping) और दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद।
फार्मासिस्ट (Pharmacists)
नवजात बच्चों के लिए सही दवाओं का चुनाव करना।
दवाओं की सही डोज़ और उनके साइड इफेक्ट्स पर नज़र रखना।
यह होनी चाहिये मशीनें
NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) के रजिस्ट्रेशन के लिए अस्पताल में अत्याधुनिक और विश्वसनीय मशीनों का होना आवश्यक है, जो समय से पहले जन्मे या बीमार नवजात शिशुओं की नाजुक देखभाल कर सकें।
NICU सेटअप के लिए आवश्यक मुख्य मशीनें और उपकरण (NICU Equipment List):
इनक्यूबेटर (Incubator): यह एक कांच के बक्से जैसी मशीन है, जो समय से पहले जन्मे शिशुओं के लिए एक गर्म और सुरक्षित नियंत्रित वातावरण प्रदान करती है।
रेडिअंट वार्मर (Radiant Warmer): यह एक खुला बिस्तर है जिसमें ऊपर से गर्मी दी जाती है, जो नवजात शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है।
वेंटिलेटर (Ventilator): यदि बच्चा खुद सांस नहीं ले पा रहा है, तो यह मशीन एक ट्यूब के माध्यम से ऑक्सीजन या हवा पहुंचाकर सांस लेने में मदद करती है।
सीपीएपी मशीन (Bubble CPAP Machine): यह मशीन फेफड़ों को खुला रखने के लिए हवा का निरंतर दबाव प्रदान करती है।
पेशेंट मॉनिटर (Patient Monitor): यह स्क्रीन पर बच्चे के महत्वपूर्ण संकेत जैसे हृदय गति, सांस लेने की दर, और ऑक्सीजन स्तर को ट्रैक करती है।
पल्स ऑक्सीमीटर (Pulse Oximeter): बच्चे के रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को मापने के लिए।
इन्फ्यूजन पंप (Infusion Pump): दवाओं और तरल पदार्थों की बहुत सटीक मात्रा देने के लिए।
फोटोथेरेपी मशीन (Phototherapy Machine): नवजात शिशुओं में पीलिया (Jaundice) का इलाज करने के लिए।
सक्शन मशीन (Pediatric Suction Machine): बच्चे के वायुमार्ग से बलगम या तरल को साफ करने के लिए।
ऑक्सीजन हुड (Oxygen Hood): उन शिशुओं के लिए जिन्हें अतिरिक्त ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
अपनिया मॉनिटर (Apnea Monitor): यदि शिशु की सांस कुछ सेकंड के लिए रुकती है, तो यह अलार्म बजाता है।
अन्य आवश्यक आवश्यकताएं:
ट्रांसपोर्टेबल इनक्यूबेटर (Transportable Incubator): अस्पताल के भीतर या एक से दूसरे अस्पताल में बच्चे को सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए।
फीडिंग ट्यूब (Feeding Tube): जो बच्चे चूसने में असमर्थ हैं, उन्हें पोषण देने के लिए।
अब बलियावासी खुद ही विचार करें कि जनपद मे संचालित NICU मे आपके शिशुओ की जिंदगी सुरक्षित है कि असुरक्षित? सीएमओ कार्यालय के 500 मीटर के एरिया मे कई NICU संचालित है जिसमे से मात्र एक हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन मे ही यह दर्ज है। पिछले दिनों सीएमओ ऑफिस की टीम ने आसपास के हॉस्पिटल की जांच की थी, उनको ये NICU चलते हुए भी मिले थे लेकिन कार्यवाही क्यों नहीं हुई यह सीएमओ बलिया ही बता सकते है। यही नहीं सीएमओ ऑफिस के आसपास कई ऐसे हॉस्पिटल है जहां बिना चिकित्सकों के ही इलाज आज भी हो रहा है, लेकिन जांच करने वाला कोई नहीं है। आखिर सीएमओ ऑफिस के आसपास संचालित अवैध हॉस्पिटल्स, NICU पर कब रोक लगेंगी?






