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कानून बेबस, अपराधी बेखौफ :बेटियों की चीखें और सिस्टम की चुप्पी,कब टूटेगा खामोशी का ये खौफनाक घेरा ?

 




 पंकज झां 

जौनपुर ।। जौनपुर में कानून व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवाल अब एक बड़े संकट का रूप लेते जा रहे हैं। मड़ियाहूं, सरपतहां और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बढ़ती आपराधिक घटनाएं साफ संकेत दे रही हैं कि जिले में अपराधियों का मनोबल चरम पर है, जबकि प्रशासन की पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है।

       दहशत में जी रही जनता, सुरक्षा पर संकट

हाल ही में मड़ियाहूं क्षेत्र में नाबालिग किशोरी के साथ चार नकाबपोश युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया। घटना के बाद पीड़ित परिवार को न सिर्फ सामाजिक भय झेलना पड़ा, बल्कि थाने में भी न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा। तहरीर बदलवाने और मेडिकल जांच में लापरवाही जैसे आरोप प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

       अपराधियों के हौसले बुलंद, कानून बेअसर

जिले में बलात्कार, चोरी, हत्या और सामूहिक अपराध अब आम होते जा रहे हैं। अपराधी खुलेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और कार्रवाई की धीमी रफ्तार उन्हें और निडर बना रही है। आम जनता के बीच डर और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।

      प्रशासन की उदासीनता—सबसे बड़ा सवाल

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन अक्सर केवल औपचारिकताओं तक सीमित रह जाते हैं। समय पर गिरफ्तारी, सख्त कार्रवाई और तेज जांच के अभाव में अपराधियों को खुली छूट मिलती दिख रही है।

                कब जागेगा सिस्टम?

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ाना, त्वरित न्याय सुनिश्चित करना और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना अब बेहद जरूरी हो गया है। जागरूकता और कड़े कानून लागू किए बिना हालात सुधरना मुश्किल है।

                                 निष्कर्ष

जौनपुर में बढ़ता अपराध और प्रशासन की निष्क्रियता मिलकर एक खतरनाक स्थिति पैदा कर रहे हैं। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो “अपराधियों की मस्ती” आम जनता की सबसे बड़ी त्रासदी बन सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या प्रशासन जागेगा या जौनपुर यूं ही अपराधियों के हवाले होता जाएगा?