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भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ ने दी पुलवामा शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा का हुआ आयोजन


प्रदेश अध्यक्ष ने की सभी शहीदों को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार देने की मांग 

मधुसूदन सिंह

बलिया।। भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय व प्रांतीय पदाधिकारियों ने 14 फरवरी को एक ऑनलाइन श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से पुलवामा के सभी शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस श्रद्धांजलि सभा का संचालन महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय ने किया। अपनी श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि आज ही के दिन 5 वर्ष पूर्व हम सबकी रक्षा में तैनात जवानों को आतंकियों ने धोखे से हताहत कर दिया था। मां भारती के ऐसे शहीद जवानों के चरणों में मै अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। राष्ट्रीय मुख्य महासचिव श्री मधुरा प्रसाद धुरिया ने कहा कि ज़ब ज़ब देश की ऑन बान शान के लिये शहीद होने वालों की चर्चा होंगी, पुलवामा के शहीदों का नाम अग्रगणी होगा।

उत्तरप्रदेश के अध्यक्ष श्री प्रभाशंकर ओझा ने अपनी श्रद्धांजलि में पुलवामा शहीदों को देश का सैनिको को मिलने वाले सर्वोच्च वीरता पुरस्कार देने की सरकार से मांग की। कहा कि सर्वोच्च वीरता पुरस्कार देकर हम इन सभी शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते है। प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य डॉ सुनिल कुमार ओझा ने कहा कि पुलवामा के शहीदों ऐसे सैनिको के बलिदान से ही आज भारत की एकता और अखंडता अक्षुर्ण बनी हुई है।

राष्ट्रीय संयोजक डॉ भगवान प्रसाद उपाध्याय ने सभी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि देश पर चाहे कितने भी आक्रमण हुए, चाहे कितनी भी नापाक कोशिशे हुई लेकिन मां भारती ने पुलवामा के शहीदों जैसे न जाने कितने सपूत पैदा किये हुए है कि ये सपूत अपनी जान तो दे सकते है लेकिन देश के सम्मान पर कोई आंच नहीं आने देंगे। सभी शहीदों के श्री चरणों में मै श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। कार्यक्रम में श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में प्रदेश कोषाध्यक्ष हौसला प्रसाद, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संतोष कुमार शर्मा,मंडल अध्यक्ष अयोध्या अनुराग द्विवेदी,राकेश पांडेय मिंटू, नन्द किशोर नवल जी आदि भी शामिल रहे।





प्रांतीय मुख्य महासचिव मधुसूदन सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पुलवामा कांड की विस्तार से जानकारी दी। श्री सिंह ने पांच साल पहले की घटना को याद करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले को आज पांच साल पूरे हो गए हैं। उस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल अहमद डार ने 350 किलो विस्फोटक से भरी एसयूवी को बस से भिड़ा दी थी। इस हमले में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए थे। आज पुलवामा आतंकी हमले की 5वीं बरसी है।लेकिन आज भी इस हादसे की कहानी सुनकर भारतीय लोगों की रूह कांप जाती है।


           14 फरवरी भारत के लिए काला दिवस

आतंकवादियों की इस कायराना हरकत से हर भारतीय की आंखे नम हो गई थीं और इस हमले ने पूरे देश को अंदर से हिलाकर रख दिया था, लेकिन इसका बदला भारतीय सेना पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर लिया। इस हमले को पुलवामा अटैक (Pulwama Terror Attack) के नाम से भी जाना जाता है।



सीआरपीएफ के काफिले में करीब 60 से ज्यादा वाहन शामिल थे और इनमें 2 हजार 547 जवान मौजूद थे। 14 फरवरी 2019 के दिन जब सीआरपीएफ का काफिला जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोरा में गोरीपोरा के पास पहुंचा तो जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने पुलवामा जिले में विस्फोटक से भरी कार ने सीआरपीएफ जवानों की बस से भिड़ाकर निशाना बनाया था।इस कारण जोरदार धमाके में 40 जवान शहीद हो गए थे। धमाका इतना तेज था कि बस के भी चिथड़े उड़ गए। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।कुल 19 आतंकियों के नाम थे, जिनमें से छह को सेना अलग-अलग ऑपरेशनों में मार चुकी है। 


      टुकड़ों में मंगाया गया था आरडीएक्स 

जांच में सामने आया था कि हमले में अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रोग्लिसरीन और आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था, यह आरडीएक्स बेहद छोटी-छोटी मात्रा में प्लानिंग के तहत इकट्ठा गया था। इसमें प्रयोग की गई जिलेटिन की छड़ें पहाड़ों और चट्टानों को तोड़ने के लिए इकट्ठा की गयी थीं,वहां से इन्हें चुराया गया था। अमोनियम पाउडर स्थानीय बाजार से खरीदा गया था। एचडी की एक रिपोर्ट के मुताबिक हमले के लिए 500 से ज्यादा जिलेटिन की छड़े पत्थर की खदानों से चोरी की गई थीं। 


भारतीय वायुसेना के जवाबी हमले में मारे गए थे 300 से अधिक आतंकी

12 दिन बाद 26 फरवरी को रात में तीन बजे भारत ने देशवासियों से किया वादा पूरा किया और 12 मिराज 200 फाइटर जेट्स एलओसी को पार कर पाकिस्तान में घुस गए। भारतीय वायुसेना के जांबाज फाइटर मिराज 2000 लेकर बालाकोट तक गए और खुफिया इनपुट के आधार पर जैश ए मोहम्मद के ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस हमले में तकरीबन 300 आतंकी मारे गए थे।