भाजपा का चुनावी खेल बिगाड़ेंगे ओमप्रकाश राजभर ! घोषी सलेमपुर चंदौली आजमगढ़ समेत एक दर्जन से अधिक जगह से उतार सकते है प्रत्याशी ? आज या कल हो सकती है घोषणा
भाजपा का चुनावी खेल बिगाड़ेंगे ओमप्रकाश राजभर ! घोषी सलेमपुर चंदौली आजमगढ़ समेत एक दर्जन से अधिक जगह से उतार सकते है प्रत्याशी ? आज या कल हो सकती है घोषणा
संजोग कुमार सिंह
लखनऊ 13 अप्रैल 2019 ।। भारतीय जनता पार्टी का सहयोगी होने के बावजूद भाजपा द्वारा जिस तरह से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर की उपेक्षा की जा रही है , उससे श्री राजभर काफी मर्माहत है । बार बार अपने को भाजपा द्वारा छले जाने से राजभर का धैर्य जबाब दे गया है । सूत्रों की माने तो अपनी पार्टी के जनाधार बचाने और कार्यकर्त्ताओ के मनोबल को ऊंचा उठाने के लिये श्री राजभर के पास अब चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प भी नही है । इस लिये श्री राजभर शनिवार या रविवार को चंदौली, घोषी, सलेमपुर, आजमगढ़ समेत दर्जनभर लोक सभाओ के लिये अपने उम्मीदवारों की घोषणा करके चुनावी समर में भाजपा से दो दो हाथ करने निकल पड़ेंगे ।
कोई बढ़ी भाजपा भासपा में खटास
अति पिछड़ो अति दलितों की राजनीति करने वाली ओमप्रकाश राजभर प्रदेश में पिछड़े को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत करते है और इस कारण इन्होंने प्रदेश की बागडोर सम्हालने वाले सीएम योगी को ये शुरुआत से ही विरोध कर रहे है जबकि योगी सरकार में मंत्री भी है । अपने दो साल के मंत्रित्व काल मे एक भी ऐसा मौका नही चुके है जिस दिन इन्होंने सीएम योगी की सरकार को कटघरे में न खड़ा किया हो । वही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय से भी इनके छत्तीस के आंकड़े जगजाहिर है । सूत्रों की माने तो भाजपा की प्रदेश इकाई की बैकवर्ड लॉबी के अंदर से समर्थन की ही देन है कि ये अब तक सरकार में बने हुए है ।
इसके अलावा इनका पुत्रमोह भी भाजपा से सीटों के तालमेल में रोड़ा बना है । श्री राजभर अपने पुत्र अरविंद राजभर को देश की सर्वोच्च संसद तक भेजने के लिये बिगत 5 सालो से घोषी क्षेत्र में भरपूर मेहनत की है । यहां तक कि इनकी शादी भी इस लोक सभा क्षेत्र में पड़ने वाले मऊ के एक राजभरों में अच्छी पकड़ रखने वाले नेता की बेटी से पिछले साल करके अपनी योजना को बतला दिया था । सूत्रों की माने तो भाजपा अभी श्री राजभर को अनुप्रिया पटेल जैसा विश्वस्त साथी नही मान रही है । यही कारण है कि अनुप्रिया पटेल को दो सीट देने के बावजूद श्री राजभर को एक भी सीट देने से इनकार कर चुकी है ।
क्या बचा है रास्ता
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के सामने अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिये चुनाव लड़ना मजबूरी हो गया है । अगर चुनाव में ये नही उतरते है , अपनी ताकत को नही दिखाते है तो आगामी 2022 के विधान सभा चुनाव में जहां इनको पिछली बार की तरह तरजीह नही मिलेगी , न ही सपा बसपा गठबंधन में ही सम्मानजनक समझौता हो पायेगा ? साथ ही अपने पार्टी के कार्यकर्त्ताओ को भी चुनाव में टूटने से बचाने के लिये और अपना दमखम दिखाने के लिये लोक सभा चुनाव लड़ना अति आवश्यक लग रहा है । अगर ऐसा हो गया तो निश्चित ही श्री राजभर भाजपा के खेल बिगाड़ने में सहायक तो हो ही जायेंगे ।
संजोग कुमार सिंह
लखनऊ 13 अप्रैल 2019 ।। भारतीय जनता पार्टी का सहयोगी होने के बावजूद भाजपा द्वारा जिस तरह से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर की उपेक्षा की जा रही है , उससे श्री राजभर काफी मर्माहत है । बार बार अपने को भाजपा द्वारा छले जाने से राजभर का धैर्य जबाब दे गया है । सूत्रों की माने तो अपनी पार्टी के जनाधार बचाने और कार्यकर्त्ताओ के मनोबल को ऊंचा उठाने के लिये श्री राजभर के पास अब चुनाव लड़ने के अलावा कोई विकल्प भी नही है । इस लिये श्री राजभर शनिवार या रविवार को चंदौली, घोषी, सलेमपुर, आजमगढ़ समेत दर्जनभर लोक सभाओ के लिये अपने उम्मीदवारों की घोषणा करके चुनावी समर में भाजपा से दो दो हाथ करने निकल पड़ेंगे ।
कोई बढ़ी भाजपा भासपा में खटास
अति पिछड़ो अति दलितों की राजनीति करने वाली ओमप्रकाश राजभर प्रदेश में पिछड़े को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत करते है और इस कारण इन्होंने प्रदेश की बागडोर सम्हालने वाले सीएम योगी को ये शुरुआत से ही विरोध कर रहे है जबकि योगी सरकार में मंत्री भी है । अपने दो साल के मंत्रित्व काल मे एक भी ऐसा मौका नही चुके है जिस दिन इन्होंने सीएम योगी की सरकार को कटघरे में न खड़ा किया हो । वही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय से भी इनके छत्तीस के आंकड़े जगजाहिर है । सूत्रों की माने तो भाजपा की प्रदेश इकाई की बैकवर्ड लॉबी के अंदर से समर्थन की ही देन है कि ये अब तक सरकार में बने हुए है ।
इसके अलावा इनका पुत्रमोह भी भाजपा से सीटों के तालमेल में रोड़ा बना है । श्री राजभर अपने पुत्र अरविंद राजभर को देश की सर्वोच्च संसद तक भेजने के लिये बिगत 5 सालो से घोषी क्षेत्र में भरपूर मेहनत की है । यहां तक कि इनकी शादी भी इस लोक सभा क्षेत्र में पड़ने वाले मऊ के एक राजभरों में अच्छी पकड़ रखने वाले नेता की बेटी से पिछले साल करके अपनी योजना को बतला दिया था । सूत्रों की माने तो भाजपा अभी श्री राजभर को अनुप्रिया पटेल जैसा विश्वस्त साथी नही मान रही है । यही कारण है कि अनुप्रिया पटेल को दो सीट देने के बावजूद श्री राजभर को एक भी सीट देने से इनकार कर चुकी है ।
क्या बचा है रास्ता
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के सामने अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिये चुनाव लड़ना मजबूरी हो गया है । अगर चुनाव में ये नही उतरते है , अपनी ताकत को नही दिखाते है तो आगामी 2022 के विधान सभा चुनाव में जहां इनको पिछली बार की तरह तरजीह नही मिलेगी , न ही सपा बसपा गठबंधन में ही सम्मानजनक समझौता हो पायेगा ? साथ ही अपने पार्टी के कार्यकर्त्ताओ को भी चुनाव में टूटने से बचाने के लिये और अपना दमखम दिखाने के लिये लोक सभा चुनाव लड़ना अति आवश्यक लग रहा है । अगर ऐसा हो गया तो निश्चित ही श्री राजभर भाजपा के खेल बिगाड़ने में सहायक तो हो ही जायेंगे ।


