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उभाँव थाना प्रकरण : अब पीड़िता को सता रहा है जान पर खतरा, अंजान फोन कॉल्स से मिल रही है धमकी, नवागत थानाध्यक्ष ने कहा -मिलेगा शत प्रतिशत न्याय

 



 

मधुसूदन सिंह 

बलिया।। जनपद का सबसे चर्चित उभाँव थाना प्रकरण की पीड़िता ने थानाध्यक्ष और क्राइम इंस्पेक्टर के निलंबन के बाद से उसको मिलने वाली धमकियों से काफ़ी डरी हुई है। पीड़िता का कहना है कि दोनों लोगों को जब से पुलिस अधीक्षक ने निलंबित किया है, उसके पास अंजान नंबरों से फोन कॉल आ रही है और धमकी मिल रही है कि मुकदमा वापस ले लो और कोर्ट मे बयान मत करों, नहीं तो अंजाम बुरा हो सकता है।

पीड़िता का आरोप है कि जब वह गुरुवार को न्यायालय गयी थी, तब भी वहां संदिग्ध लोग चारों तरफ दिखायी दे रहे थे। गुरुवार की देर शाम पीड़िता के पैर पर बाइक चढ़ाने का भी मामला सामने आया है, जिससे पीड़िता और भयभीत हो गयी है। पीड़िता का कहना है कि अपने 11 साल के बच्चे को पिछले तीन माह से स्कूल डर के मारे नहीं भेज रही हूं। कहा कि निलंबित थानाध्यक्ष संजय शुक्ला ने मेरे द्वारा शादी का साक्ष्य देने के बाद उग्रसेन कुमार जायसवाल के घर मे घुसाया था और जब रात को 12 बजे फ़ोर्स भेजकर मुझे थाने बुलाया और मै नहीं गयी तो सुबह मेरा सारा सामान सड़क पर फेकवा कर घर से निकलवा दिये।

उभाँव थाना के कई पुलिस कर्मियों पर भी उठायी उंगली 

नवागत थानाध्यक्ष दिनेश कुमार पाठक के स्वागत मे आयोजित कार्यक्रम मे इस पूरे प्रकरण का मुख्य अभियुक्त उग्रसेन कुमार जायसवाल (वन दरोगा ) की उपस्थिति पर पीड़िता ने गंभीर सवाल उठाया है। कहा कि थानाध्यक्ष नये है, वो नहीं पहचान रहे थे कि कौन क्या है, लेकिन थाने के अन्य स्टॉफ तो उग्रसेन जायसवाल को जानते थे? जिन लोगों ने उसको जेल भेजा था, जिसके कारण इतना बड़ा कांड हुआ है, उसको नवागत थानाध्यक्ष के पास कैसे जाने दिया गया? यह उसकी थाने से मिलीभगत को नहीं दर्शाता है? कहा कि यह देखने के बाद और धमकी भरे फोन आने के बाद मुझे और डर लग रहा है।



थानाध्यक्ष ने कहा -मिलेगा पूरा न्याय, डरने की नहीं है जरूरत 

नवागत थानाध्यक्ष दिनेश कुमार पाठक से जब इस संबंध मे बात की गयी तो उनका कहना था कि मेरे कार्यभार ग्रहण करने के बाद बहुत लोग मिलने व शुभकामनायें देने आये थे। मै यहां के लिये एकदम नया हूं। मुझे नहीं पता था कि कौन अपराधी है और कौन नहीं। कहा कि पीड़िता निश्चिन्त रहे, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होंगी और किसी को भी बचाया नहीं जायेगा। हमारे पुलिस अधीक्षक महोदय इस प्रकरण को लेकर खुद संजीदा है और इसकी जांच पर नजर गड़ाये हुए है। कहा कि पीड़िता को डरने की कोई जरूरत नहीं है।

डीआईजी, पुलिस अधीक्षक पर जताया पूरा भरोसा 



डीआईजी आजमगढ़ से मिलकर आने के बाद पुलिस अधीक्षक बलिया द्वारा की गयी कार्यवाही से आप कितना संतुष्ट है, के सवाल के जबाब मे पीड़िता ने कहा कि कार्यवाही से मै पूरी तरह संतुष्ट हूं। लेकिन इसके बाद जिस तरह से मुझे धमकी मिल रही है और मुझे मेडिकल कराने व बयान देने के नाम पर दो दिन, पूरे दिन भर परेशान किया गया, उससे मै काफ़ी सहमी हूं। मेरी योगी जी से, डीआईजी सर से और पुलिस अधीक्षक सर से विनती है कि मुझे सुरक्षा दी जाय, नहीं तो ये लोग कुछ भी करा सकते है, मेरे पैर पर मोटरसाईकिल चढ़वा कर उन लोगों ने अपना पहला संदेश दे भी दिया है।