वाह रे बलिया जिला प्रशासन : माननीय उच्च न्यायालय से स्टे, फिर भी बन ही नहीं गया बल्कि चल रहा है पूर्वांचल सिनेमा हाल, क्या उच्च न्यायालय से भी बड़े है सिनेमा हाल संचालक?
मधुसूदन सिंह
बलिया।। कहा जाता है कि माननीय न्यायालय का आदेश सर्वोपरि होता है लेकिन बलिया मे ऐसा दिख नहीं रहा है। क्योंकि हजारी प्रसाद द्विवेदी जी ने कहा था कि बलिया जिला नहीं देश है। लगता है इसी लिये माननीय उच्च न्यायालय प्रयागराज का स्टे आर्डर को न पूर्वांचल सिनेमा हाल के संचालक मान रहे है, न इसका पालन जिला प्रशासन ही करा रहा है। साथ ही असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्य कर खंड 1 ही इस पर ध्यान नहीं दे रहे है।जिन्होंने उच्च न्यायालय के 26.2.26 के द्वारा दिये गये स्थायी स्थगन आदेश (वाद के निस्तारण तक ) को भी नजरअंदाज कर सिनेमा हाल को फ़िल्म दिखाने की इजाजत की संस्तुति किये है। यह आदेश सिविल मिस्लेनियस राइट पेटीशन नंबर 1668/2025 मोहन जी बनाम स्टेट ऑफ़ यूपी एंड 27 अदर्स मे 26 फ़रवरी 2026 को माननीय न्यायाधीश श्री सीके राय की अदालत ने दिया है। सूच्य हो कि इस पूरे विवादित भूखंड के स्वामित्व को लेकर एक वाद माननीय राजस्व परिषद प्रयागराज मे चल रहा है।जब मालिकाना हक का फैसला ही नहीं हुआ है तो SANMAX के साथ साझेदारी कैसे हो गयी?
सवाल यह उठ रहा है कि जब सिनेमा हाल समेत पूरे विवादित भूखंड पर किसी भी प्रकार के निर्माण, नव निर्माण आदि पर रोक है तो सिनेमा हाल का कैसे नवीनीकरण हो गया, यह कैसे Sanmax मे बदल गया,कैसे इसको फ़िल्म दिखाने की अनुमति मिल गयी? जबकि माननीय उच्च न्यायालय ने इनकी फ़िल्म दिखाने की अनुमति देने की मांग वाली याचिका पहले ही ख़ारिज कर दिया है। क्या असिस्टेंट कमिश्नर वाणिज्यकर खंड 1 बलिया को कोई अलग से आदेश मिला था जिसके आधार पर फ़िल्म दिखाने की संस्तुति कर दिये। अब माननीय न्यायालय के आदेश की अवहेलना के इस गंभीर मामले को माननीय उच्च न्यायालय को स्वतः संज्ञान मे लेकर आदेश को न मानने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाहिये।
जिलाधिकारी के खिलाफ सिनेमाहाल संचालको ने कोर्ट मे लगाया है गंभीर आरोप
जिस जिलाधिकारी बलिया श्री मंगला प्रसाद सिंह के आदेश पर सिनेमा हाल मे फ़िल्म दिखाने का आदेश निर्गत हुआ है, उसी जिलाधिकारी पर इसके संचालकों ने माननीय उच्च न्यायालय मे दाखिल अपने एफिडेविट मे गंभीर आरोप लगाया है। इन्होने जिलाधिकारी पर विरोधी जो पैसे वाले है, अपने पैसे और बाहरी दबाव से जिलाधिकारी को सिनेमा हाल के लाइसेंस का नवीनीकरण करने से रोक रहे है।साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि जिलाधिकारी संविधान विरुद्ध कार्य कर रहे है।
जब पहले से ही निर्माण, नवीनीकरण आदि पर है रोक, तो कैसे बन गया और चलने लगा पूर्वांचल सिनेमा हाल
जिस भूखंड पर पूर्वांचल सिनेमा हाल स्थित है, उस पर पहले से ही स्थगन आदेश है। सन 2023 मे इसके संचालकों ने माननीय उच्च न्यायालय मे याचिका दायर कर सिनेमा हाल के नवीनीकरण के लिये अनुमति मांगी थी जिसको माननीय न्यायालय ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया था कि टाइटल के निर्धारण वाला मुकदमा साक्ष्य स्तर पर चल रहा है, इस लिये इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर स्थगन / रोक जारी रहेगी। अब यह रोक मुक़दमे के अंतिम निस्तारण तक बढ़ा दी गयी है।
मुक़दमे से संबंधित इतिहास कोर्ट की नजर मे















