चीन जहां जारी रहेगा इस्लाम और क्रिश्चियनिटी पर कड़ाई वाला आदेश

8 मार्च 2019 ।।
'उइगर मुसलमानों' और ईसाइयों पर जुल्म के लिए चीन की आलोचना दुनियाभर में होती है. खबरों के मुताबिक चीन की सरकार चाहती है कि वहां के मुस्लिम और ईसाई अपनी धार्मिक मान्यताओं को छोड़कर चीन की संस्कृति को अपना लें. जबकि वे लोग ऐसा नहीं चाहते.
इसी विरोधाभास के चलते चीनी सरकार उनपर तरह तरह के प्रतिबंध लगाती रहती है. हाल ही में चीन के मुसलमान नागरिकों ने शिकायत की थी कि उन्हें चीनी नव वर्ष समारोह के दौरान पोर्क खाने और शराब पीने के लिए मजबूर किया गया. ये बात वेबसाइट मिरर.को.यूके ने चीन के कुछ मुस्लिम नागरिकों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कही थी.
इसी विरोधाभास के चलते चीनी सरकार उनपर तरह तरह के प्रतिबंध लगाती रहती है. हाल ही में चीन के मुसलमान नागरिकों ने शिकायत की थी कि उन्हें चीनी नव वर्ष समारोह के दौरान पोर्क खाने और शराब पीने के लिए मजबूर किया गया. ये बात वेबसाइट मिरर.को.यूके ने चीन के कुछ मुस्लिम नागरिकों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में कही थी.
सरकार धार्मिक मान्यता को मानती है चुनौती
चीन का संविधान वैसे तो धार्मिक आजादी की पैरवी करता है. लेकिन राष्ट्रपति शी चिनफिंग के सत्ता में आने के बाद से सरकार की ओर से धार्मिक आजादी पर प्रतिबंध सख्त हैं. सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी धार्मिक मान्यता को चुनौती मानते हैं. मुस्लिम और ईसाई सरकार के इसी रवैये से जूझ रहे हैं.
नास्तिक देश
चीन में सबसे ज़्यादा लोग बौद्ध, ईसाई, इस्लाम और ताओइजम को मानने वाले हैं. लेकिन आधिकारिक रूप से चीन नास्तिक देश कहलाता है. क्योंकि यहां की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी नास्तिक विचार को अहमियत देती है. इस पार्टी के कार्यकर्ताओं की तादाद करीब 8.5 करोड़ है. इस पार्टी से जुड़े लोगों को किसी धर्म का पालन नहीं करने की चेतावनी है.

विवादास्पद अभियान Sinicise religion
बीजिंग में Sinicise religion (पापी धर्म) नाम का विवादास्पद अभियान चलाए जा रहा है. इस कैंपेन की अंतरराष्ट्रीय स्टर पर निंदा हो रही है. लेकिन बीजिंग ने मुसलमानों और ईसाइयों पर कटाक्ष करते हुए इस निंदा को नकार दिया.
चीन के राजनेता Premier Li Keqiang ने सरकारी काम की वार्षिक रिपोर्ट देते हुए राष्ट्रीय विधायिका (नेशनल लेजिस्लेचर) से कहा कि हमें धार्मिक मामलों पर पार्टी की मौलिक नीति को पूरी तरह से लागू करना चाहिए. चीन में धर्म के उन्मूलन को भी बनाए रखना चाहिए.

2015 में शी चिनफिंग के सत्ता में आने के बाद से धार्मिक आजादी पर प्रतिबंध लगा. शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र में 1 मिलियन से अधिक उइगर, कजाख और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को (कथित तौर पर) प्रशिक्षा शिविरों में रखा गया था. जहां उन्हें इस्लाम की निंदा करने और पार्टी के प्रति निष्ठा रखने के लिए मजबूर किया गया.
गुंबदो, अरबी चिह्नों को हटाया
निंग्ज़िया हुई और गांसु के करीबी क्षेत्रों में हुई समुदाय के मुसलमानों के घरों, कुछ मस्जिदों से गुंबदो, इस्लामी सजावट और अरबी चिह्नों को हटा दिया गया था. अब वहां "अरब शैली" की कोई नई मस्जिद नहीं बनाई जा सकती. अरबी-भाषा के स्कूल भी बंद कर दिए गए.
मस्जिदों के अलावा वेस्टर्न रीजन के घरों के चर्च बंद करने के लिए मजबूर किया गया. उनके सदस्यों और पादरियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया.

कड़ी पकड़ रखी जाएगी
सरकारी वर्क रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग में विवादास्पद अभियान Sinicise religion के ज़रिए मज़हबी समुदायों पर कड़ी पकड़ रखी जाएगी. ये बात सरकारी वर्क रिपोर्ट के उस प्लान में लिखी गई जिसे 2019 में भी फॉलो किया जाना है.
चीन में कितने मुसलमान और ईसाई
चीन में मुस्लिमों की आबादी साढ़े 21 करोड़ से भी ज्यादा है. वहां के मुसलमान तीन समुदायों से जुड़े हैं. 1- हुई (Hui) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 9.8 मिलियन यानी 98 लाख है. 2- वीगर (Uyghurs/Uighurs) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 8.4 मिलियन यानी 84 लाख है. 3- कज़ाख (Kazakhs) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 1.25 मिलियन यानी 12.5 लाख है. ये आंकड़ें Pew रिसर्च सेंटर के अनुसार हैं.
दिसंबर 2018 में प्रोटेस्टेंट ईसाई समुदाय के 'अर्ली रेन कोवनेंट' चर्च से जुड़े 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेने की खबर सुर्खियों में थी. वर्तमान में चीन में 3.8 करोड़ 'प्रोटेस्टेंट ईसाई समुदाय' के लोग हैं. अनुमान है कि भविष्य में दुनिया की सबसे बड़ी ईसाई आबादी चीन में ही होगी. ईसाई धर्म को चीन में तेज़ी से बढ़ता हुआ धर्म माना जा रहा है. यहां करीब 6.7 करोड़ लोग ईसाई धर्म के अनुयायी हैं. । (साभार न्यूज18)
नास्तिक देश
चीन में सबसे ज़्यादा लोग बौद्ध, ईसाई, इस्लाम और ताओइजम को मानने वाले हैं. लेकिन आधिकारिक रूप से चीन नास्तिक देश कहलाता है. क्योंकि यहां की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी नास्तिक विचार को अहमियत देती है. इस पार्टी के कार्यकर्ताओं की तादाद करीब 8.5 करोड़ है. इस पार्टी से जुड़े लोगों को किसी धर्म का पालन नहीं करने की चेतावनी है.

विवादास्पद अभियान Sinicise religion
बीजिंग में Sinicise religion (पापी धर्म) नाम का विवादास्पद अभियान चलाए जा रहा है. इस कैंपेन की अंतरराष्ट्रीय स्टर पर निंदा हो रही है. लेकिन बीजिंग ने मुसलमानों और ईसाइयों पर कटाक्ष करते हुए इस निंदा को नकार दिया.
चीन के राजनेता Premier Li Keqiang ने सरकारी काम की वार्षिक रिपोर्ट देते हुए राष्ट्रीय विधायिका (नेशनल लेजिस्लेचर) से कहा कि हमें धार्मिक मामलों पर पार्टी की मौलिक नीति को पूरी तरह से लागू करना चाहिए. चीन में धर्म के उन्मूलन को भी बनाए रखना चाहिए.

2015 में शी चिनफिंग के सत्ता में आने के बाद से धार्मिक आजादी पर प्रतिबंध लगा. शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र में 1 मिलियन से अधिक उइगर, कजाख और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को (कथित तौर पर) प्रशिक्षा शिविरों में रखा गया था. जहां उन्हें इस्लाम की निंदा करने और पार्टी के प्रति निष्ठा रखने के लिए मजबूर किया गया.
गुंबदो, अरबी चिह्नों को हटाया
निंग्ज़िया हुई और गांसु के करीबी क्षेत्रों में हुई समुदाय के मुसलमानों के घरों, कुछ मस्जिदों से गुंबदो, इस्लामी सजावट और अरबी चिह्नों को हटा दिया गया था. अब वहां "अरब शैली" की कोई नई मस्जिद नहीं बनाई जा सकती. अरबी-भाषा के स्कूल भी बंद कर दिए गए.
मस्जिदों के अलावा वेस्टर्न रीजन के घरों के चर्च बंद करने के लिए मजबूर किया गया. उनके सदस्यों और पादरियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया.

कड़ी पकड़ रखी जाएगी
सरकारी वर्क रिपोर्ट के मुताबिक बीजिंग में विवादास्पद अभियान Sinicise religion के ज़रिए मज़हबी समुदायों पर कड़ी पकड़ रखी जाएगी. ये बात सरकारी वर्क रिपोर्ट के उस प्लान में लिखी गई जिसे 2019 में भी फॉलो किया जाना है.
चीन में कितने मुसलमान और ईसाई
चीन में मुस्लिमों की आबादी साढ़े 21 करोड़ से भी ज्यादा है. वहां के मुसलमान तीन समुदायों से जुड़े हैं. 1- हुई (Hui) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 9.8 मिलियन यानी 98 लाख है. 2- वीगर (Uyghurs/Uighurs) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 8.4 मिलियन यानी 84 लाख है. 3- कज़ाख (Kazakhs) समुदाय से जुड़े मुसलमानों की तादाद 1.25 मिलियन यानी 12.5 लाख है. ये आंकड़ें Pew रिसर्च सेंटर के अनुसार हैं.
दिसंबर 2018 में प्रोटेस्टेंट ईसाई समुदाय के 'अर्ली रेन कोवनेंट' चर्च से जुड़े 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेने की खबर सुर्खियों में थी. वर्तमान में चीन में 3.8 करोड़ 'प्रोटेस्टेंट ईसाई समुदाय' के लोग हैं. अनुमान है कि भविष्य में दुनिया की सबसे बड़ी ईसाई आबादी चीन में ही होगी. ईसाई धर्म को चीन में तेज़ी से बढ़ता हुआ धर्म माना जा रहा है. यहां करीब 6.7 करोड़ लोग ईसाई धर्म के अनुयायी हैं. । (साभार न्यूज18)
चीन जहां जारी रहेगा इस्लाम और क्रिश्चियनिटी पर कड़ाई वाला आदेश
Reviewed by बलिया एक्सप्रेस
on
March 08, 2019
Rating: 5
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