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मध्यस्थता बोर्ड के सदस्य श्री श्री रविशंकर की निष्पक्षता पर ओवैसी को संदेह , किया विरोध





8 मार्च 2019 ।।

राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता के जरिए मामला सुलझाने के लिए कहा है. मध्‍यस्‍थता बोर्ड के अध्‍यक्ष कलिफुल्‍लाह होंगे. अगले हफ्ते फैजाबाद में मध्‍यस्‍थता की जाएगी. मध्‍यस्‍थता बोर्ड में तीसरे सदस्‍य के तौर पर श्रीराम पंचू को रखा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसे 8 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपी जाए.

हालांकि मध्यस्थता बोर्ड में श्री श्री रविशंकर को शामिल किए जाने पर एआईएमआईएम नेता और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने टिप्पणी की है.

पीटीआई के अनुसार ओवैसी ने कहा कि वह 'निष्पक्ष व्यक्ति नहीं है.' ओवैसी ने कहा कि ‘रविशंकर ने अयोध्या मुद्दे पर चार नवम्बर 2018 को विवादित बयान दिया था और धमकी दी थी कि विवादित जमीन पर अगर मुस्लिमों ने अपना दावा नहीं छोड़ा तो भारत, सीरिया की तरह हो जाएगा.’

इसके साथ ही मामले में प्रतिवादी निर्मोही अखाड़ा ने भी श्री श्री रविशंकर का विरोध किया है. निर्मोही अखाड़ा का कहना है कि उसे इस मुद्दे पर राजनीति नहीं बल्कि कानूनी समाधान चाहिए. बता दें  निर्मोही अखाड़ा पिछले करीब सौ साल से इस जगह पर मंदिर बनवाने की लड़ाई लड़ रहा है.

बता दें पैनल इस मामले में शामिल सभी पक्षकारों को अपनी राय देने के लिए आमंत्रित करेगा. सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष से आठ और हिंदू पक्ष से आठ पक्षकार शामिल होंगे. इसके अलावा रामलला विराजमान भी एक पक्षकार हैं. इस पूरे मामले में राज्य सरकार एक रिसीवर कि भूमिका में मौजूद रहेगी.

सभी पक्षकार अपनी-अपनी राय पैनल को देंगे. बताया
 जा रहा है कि पहले इस मामले में अलग-अलग बात की जाएगी. फिर पैनल सभी पक्षकारों को या कुछ पक्षकारों को साथ बैठकर बात करेगा ।