जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर रहे देश भर के सफाई कर्मियों ने कहा : पैर धोने से नही बच सकती है हमारी जान , गाय और हिरन जैसे जीव भी हमे नही समझती है सरकार
सफाई कार्य को जरूरी सेवा घोषित कराने के लिये जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर रहे है देशभर के सफाई कर्मी
एक ओर कुंभ मेले में सफाई करने वाले सफाई कर्मचारियों के पैर पखारकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सम्मानित किया. दूसरी ओर देशभर से सफाई कर्मचारी और सीवर मैन जंतर-मंतर पर पहुंच गए. अपनी समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे ये लोग लगातार पीएम मोदी से मानवाधिकारों की मांग करते रहे. इस दौरान सफाईकर्मियों ने कहा कि पैर धोने से उनकी जानें नहीं बच सकतीं. सफाई का कार्य क्या जरुरी सेवाओं में नहीं आता ? पर्यावरण की चीख-चीख कर दुहाई दी जा रही है लेकिन स्वच्छ वातावरण की जिम्मेवारी सफाई व सीवर कर्मचारी की ही है. सीवर साफ करने वाला सरकारों को गाय और हिरण जैसा जीव भी नहीं लगता कि उसे बचाया जाए.
आदि धर्म समाज, आधस भारत के नेतृत्व में इकठ्ठा हुए सफाई कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें भी रखीं. इस दौरान आधस प्रमुख दर्शन 'रत्न' रावण ने कहा, 'भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छ भारत अभियान एक नौटंकी, भद्दा मजाक और भ्रष्टाचार के आलावा कुछ नहीं है. ऐसा कहने का हमारे पास पर्याप्त आधार है. बिना सफाई कर्मचारी और सीवर मैन के स्वच्छ भारत अभियान की कल्पना करना भी बेईमानी है.भारत में रोज एक जिन्दा इंसान देश को स्वच्छ रखने के लिए सीवर में उतरता है लेकिन फिर जिंदा बाहर नहीं अाता. फिर उस के पीछे दूसरा साथी बचाने जाता है और वह भी मौत का ग्रास बन जाता है. कई बार यह आंकड़ा तीन तक भी पहुँचा है.
आदि धर्म समाज, आधस भारत के नेतृत्व में इकठ्ठा हुए सफाई कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें भी रखीं. इस दौरान आधस प्रमुख दर्शन 'रत्न' रावण ने कहा, 'भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा स्वच्छ भारत अभियान एक नौटंकी, भद्दा मजाक और भ्रष्टाचार के आलावा कुछ नहीं है. ऐसा कहने का हमारे पास पर्याप्त आधार है. बिना सफाई कर्मचारी और सीवर मैन के स्वच्छ भारत अभियान की कल्पना करना भी बेईमानी है.भारत में रोज एक जिन्दा इंसान देश को स्वच्छ रखने के लिए सीवर में उतरता है लेकिन फिर जिंदा बाहर नहीं अाता. फिर उस के पीछे दूसरा साथी बचाने जाता है और वह भी मौत का ग्रास बन जाता है. कई बार यह आंकड़ा तीन तक भी पहुँचा है.

सीवर की सफाई करते कर्मचारी की सांकेतिक तस्वीर
रावण ने कहा कि फिर इसे दुर्घटना कहा जाता है. जबकि सरकारों, राजनीतिक दलों, प्रशासन व पार्षदों की लापरवाही और सीवर में उतरने के लिए बाध्यता इस हत्या के लिए मज़बूर करती है. करोड़ों रुपया इश्तिहारों और साफ सड़कों पर इवेंट करने में चला जाता है लेकिन सीवर मैन की मृत्यु हो जाने पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. बल्कि मामला दबाने के लिए परिवार को डराया धमकाया जाता है.
सफाई कर्मचारियों ने कहा कि पैर धोने से ज्यादा उन्हें मौलिक सुविधाएं देने की जरूरत है. सीवर साफ करने के लिए जहां तक संभव हो किसी भी आदमी को सीवर में न उतारा जाए. इसके साथ ही न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय कर सीवर में पाए जाने वाली गैसों की जानकारी, उनकी ज्वलशीलता और बचाव के उपायों की तकनीकी ट्रेनिंग दी जाए. इन सभी का मेडिक्लेम शुरू किया जाए. ताकि आपात स्थिति में हर सरकारी व निजी हॉस्पिटल में पत्नी व नाबालिग बच्चों और आश्रित माँ-बाप के पूरे बिल की अदाएगी कर सके.

हाथ से सफाई करते सफाई कर्मियों की फाइल फोटो
इस दौरान जंतर-मंतर पर इकठ्ठा हुए सफाई कर्मचारियों को ने स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव व राज्य सभा सांसद मनोज झा ने भी समर्थन दिया. उन्होंने कहा कि आरक्षण की पहली सीट महादलितों को दी जाए. इसके साथ ही जरुरी सेवा में से ठेकेदारी व्यवस्था तुरंत खत्म कर सिर्फ पक्की भर्ती की जाएं. वहीं घटना होने पर आश्रित को पक्की नौकरी अौर 50 लाख रुपये मुआवजा भी दिया जाए.


