Breaking News

वाह रे ! आईजीआरएस के कंट्रोलर अधिकारी गण , अक्टूबर 2018 से लगातार आ रही शिकायत को हल कराने में फेल , फर्जी निस्तारण यही है शायद बन गया इस पोर्टल का खेल ,डीएम बलिया एक्शन लेने में फेल

वाह रे !  आईजीआरएस के कंट्रोलर अधिकारी गण , अक्टूबर 2018 से लगातार आ रही शिकायत को हल कराने में फेल , फर्जी निस्तारण यही है शायद बन गया  इस पोर्टल का खेल ,डीएम बलिया एक्शन लेने में फेल
मधुसूदन सिंह

बलिया 21 फरवरी 2019 ।। अगर यूं कहें कि सीएम योगी द्वारा जनहित में शुरू किया गया आईजीआरएस पोर्टल नौकरशाहों की लापरवाही और फर्जी निस्तारणो के लिये विश्व रिकार्ड बनाने की राह पर अग्रसर है तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी । क्योकि किसी भी शिकायत के दर्ज होने के बाद अधिकारियों का एकमात्र कार्य शिकायत को अधीनस्थों को ट्रांसफर कर देना है । क्या आख्या आयी ? तय सीमा में नही आयी तो पेंडिंग रखने वाले पर क्या कार्यवाई हुई , इसको देखने वाला न तो जिलाधिकारी गण है न ही इस पोर्टल के सर्वोच्च निगरानी कर्ता अधिकारी अपर मुख्य सचिव ही है । निचले स्तर के अधिकारी इस पोर्टल की शिकायतों को सम्भवतः प्रेम पत्र समझकर अपने पास लंबित रख ले रहे है । क्योकि इस पोर्टल के लखनऊ से निर्धारित तय सीमा का कोई मतलब नही रह गया है । सबसे हास्यास्पद स्थिति तब बन जा रही है जब पोर्टल से फर्जी निस्तारण की शिकायत माननीय मुख्यमंत्री जी को रजिस्टर्ड पत्र के माध्यम से करने और उसमें साफ लिखने के वावजूद कि इसको पोर्टल पर मत डालियेगा , अधिकारियों द्वारा फिर भी पोर्टल पर ही डालकर निस्तारण की अपेक्षा की जाती है । उदाहरण के रूप में बता दू कि मेरे द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी को संबोधित एक पत्र नगरपालिका परिषद बलिया में व्याप्त भ्रष्टाचार के सम्बंध में और अक्टूबर 2018 से वार्ड नम्बर 13 व 15 (आनन्द नगर चांदमारी के पास) की जाम नाली को साफ कराने की शिकायत का अब तक समाधान न होने की शिकायत की गयी थी , लेकिन धन्य है माननीय मुख्यमंत्री जी के नाम पत्रों को देखने वाले अधिकारीगण ! एक तो बिना पूरा पढ़े पोर्टल पर डाल दिये और डाल भी दिये तो यह जानकारी लेना ही भूल गये कि शिकायत का निर्धारित समयावधि में निस्तारण हुआ कि नही ? यह किसी अधिकारी की नही, पोर्टल पर से नही , माननीय मुख्यमंत्री जी पर से जनता का विश्वास उठाने का प्रयास कहा जा सकता है ।
     बता दे कि 30 जनवरी 2019 की लिखित शिकायत को जनता दरबार के प्रभारी अधिकारी विश्वामित्र सिंह ने पोर्टल पर डालकर 11 फरवरी 2019 अंतिम तिथि निर्धारित करके जिलाधिकारी बलिया से एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की थी । लेकिन जिलाधिकारी बलिया इसको अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद बलिया को फारवर्ड करके अपने कर्तव्य से मुक्त हो गये  और ईओ बलिया डीके विश्वकर्मा के सेहत पर फर्क ही नही पड़ता है कि शिकायतों का निस्तारण करना है । कारण कि अब तक इस ईओ द्वारा आधा दर्जन से अधिक बार उच्चाधिकारियों को, और शासन को गुमराह करने वाली रिपोर्ट भेजने और इसकी शिकायत के वावजूद कार्यवाई न होने से यह अधिकारी डरता ही नही है । अगर नगर पालिका में शासनादेशों के अनुरूप भ्रष्टाचार करने के लिये दशकों से जमे बाबुओ का पटल परिवर्तन कराने की शिकायत, जलकल संपत्ति कर विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत, बिना काम कराये ही आर्यन ग्रुप को प्रति माह लाखो रुपये अध्यक्ष ईओ की मिली भगत से हो रहे भुगतान की शिकायत , ग्लोबल कम्पनी को आवश्यकता से अधिक कर्मचारियों के भुगतान की शिकायत, जाम पड़ी नालियों को साफ कराने की शिकायत (अध्यक्ष , ईओ , डीएम , कमिश्नर ,नोडल अधिकार, आईजीआरएस से करने के बाद) माननीय मुख्यमंत्री जी से की जाती है और फिर भी कुछ नही होता है तो यह साबित करने के लिये काफी है कि नौकरशाही आज भी भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियो को प्रश्रय दे रही है । अन्यथा अब तक इतनी शिकायतों के बाद नगर पालिका बलिया की जांच के लिये कोई एसआईटी गठित हो गयी होती । 30 जनवरी 2019 को की गयी माननीय मुख्यमंत्री जी से लिखित शिकायत की 21 फरवरी 2019 की स्थिति ---