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बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान का बलिया तक दिख सकता है असर, 28-29 अक्टूबर को तेज हवा और बारिश की आशंका






राहत आयुक्त कार्यालय ने जिलाधिकारियों को जारी की एडवाइजरी, बलिया समेत पूर्वांचल के कई जिलों में सतर्कता बरतने के निर्देश


बलिया।। बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती मौसम तंत्र के प्रभाव से पूर्वी उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने की आशंका है। आगामी 28 और 29 अक्टूबर को तेज झोंकेदार हवाओं के साथ गरज-चमक, वज्रपात और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। राहत आयुक्त कार्यालय, उत्तर प्रदेश शासन की ओर से जारी एडवाइजरी में बलिया समेत पूर्वांचल के कई जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है।


जारी पत्र के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंचलिक केंद्र लखनऊ के 23 अक्टूबर 2026 के मौसम बुलेटिन के आधार पर प्रतिकूल मौसम की आशंका जताई गई है। इसमें सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, गाजीपुर और बलिया को विशेष सतर्कता वाले जिलों में शामिल किया गया है। इसके अलावा बांदा, चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या और अम्बेडकर नगर में भी मौसम के संभावित प्रभाव को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है।


मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए राहत आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने तथा संबंधित उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों, पुलिस, स्वास्थ्य और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है। इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना और जन-धन के नुकसान को कम करना है।


बलिया में तेज हवा, बिजली गिरने और बारिश की आशंका को देखते हुए लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। विशेषकर किसानों, खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों और नदी या निचले इलाकों के आसपास रहने वाले परिवारों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। तेज हवा की स्थिति में कमजोर ढांचों और बिजली के तारों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।


हालांकि, जिले में बारिश की वास्तविक तीव्रता और मौसम के प्रभाव का आकलन ताजा पूर्वानुमान के आधार पर ही किया जा सकेगा। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ओर से जारी होने वाले नए अलर्ट पर नजर रखने की जरूरत है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता और समय रहते तैयारी को संभावित मौसम संबंधी जोखिमों से निपटने का अहम उपाय माना जा रहा है।