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शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बेहतर इंसान बनाना : प्रो. अमिता पाण्डेय भारद्वाज

 





डॉ सुनील कुमार ओझा 

वाराणसी।। शेपा संस्थान की ओर से शनिवार को प्रो. के.पी. पाण्डेय स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रो. कामता प्रसाद पाण्डेय, पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी की 88वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया गया। व्याख्यान का विषय “आध्यात्मिकता एवं व्यक्तिगत रूपांतरण” रहा।

मुख्य वक्ता प्रो. अमिता पाण्डेय भारद्वाज ने कहा कि आध्यात्मिकता एवं व्यक्तिगत रूपांतरण को शिक्षा के संदर्भ में “स्वयं को जानना, स्वयं को सुधारना, दूसरों को समझना और समाज के प्रति जिम्मेदार बनना” के रूप में समझा जा सकता है। जब शिक्षा व्यक्ति के भीतर ऐसा परिवर्तन उत्पन्न करती है, तब वह केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न रहकर जीवन को सार्थक, संतुलित और मानवीय बनाने का साधन बन जाती है।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता का अर्थ केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। अपने विचारों, भावनाओं, व्यवहार, मूल्यों और जीवन के उद्देश्य को समझना तथा स्वयं के बेहतर रूप का विकास करना भी आध्यात्मिकता का महत्वपूर्ण पक्ष है। शिक्षा के माध्यम से आत्म-जागरूकता, नैतिकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित किया जाना आवश्यक है।

प्रो. राजेंद्र यादव, विभागाध्यक्ष, शिक्षा संकाय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने कहा कि व्यक्ति तनाव, प्रतिस्पर्धा, असफलता, सामाजिक दबाव और भविष्य की अनिश्चितताओं से गुजरता है। ऐसे समय में आध्यात्मिक दृष्टिकोण व्यक्ति को परिस्थितियों से भागने के बजाय शांत मन, विवेक और सकारात्मक दृष्टि के साथ उनका सामना करने की क्षमता प्रदान करता है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान के कुलपति प्रो. नीरज गुप्ता ने कहा कि शैक्षिक संस्थानों में आध्यात्मिकता को धार्मिक शिक्षा के रूप में लागू करने के बजाय मानवीय मूल्यों, आत्म-जागरूकता, नैतिक निर्णय, करुणा, सह-अस्तित्व, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जीवन के उद्देश्य की समझ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए ध्यान, समूह चर्चा, आत्मचिंतन, सेवा कार्य, प्रकृति-अवलोकन और सामुदायिक सहभागिता जैसी गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं।

प्रो. विनोद कुमार त्रिपाठी, सलाहकार, लोक भवन सचिवालय, बिहार ने कहा कि वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान दोनों ही जीवन कौशल के लिए आवश्यक हैं। शिक्षा, शोध, विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से व्यक्ति की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

प्रो. सी.पी.एस. चौहान, विभागाध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र विभाग, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने प्रो. के.पी. पाण्डेय को अध्यापक शिक्षा में दूरस्थ व्यवस्था का जनक बताते हुए उनके शैक्षिक कौशल, भाषा, शोध और शैक्षिक नीति के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजय कुमार शुक्ला तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. आशा पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर शेपा सचिव श्री प्रवीण रूंगटा, निदेशक डॉ. पृथ्वीश नाग, प्रो. कल्पलता पाण्डेय, सुंदर नारायण झा, प्रो. रमाकान्त सिंह, डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।