संकट में बना सहारा: मृत्यु सहयोग अलर्ट-6 के तहत दिवंगत सुमन के परिवार को मिले 17 लाख रुपये
डॉ सुनील कुमार ओझा
बलिया। किसी परिवार के लिए अपनों को खोने का दुख सबसे बड़ा होता है, लेकिन ऐसे कठिन समय में यदि समाज सामूहिक रूप से उसके साथ खड़ा हो जाए तो आर्थिक संकट का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी सामाजिक सोच को साकार करते हुए एफआरसीटी (FRCT) ने मृत्यु सहयोग अलर्ट-6 के तहत बलिया की दिवंगत सदस्य सुमन के परिवार को 17 लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान कर सामूहिक सामाजिक सहयोग की मिसाल पेश की है।
सरैया डीहभरत, उधरन बाजार, जनपद बलिया निवासी सुमन ने 29 जनवरी 2025 को एफआरसीटी की सदस्यता ग्रहण की थी। संगठन से जुड़ने के बाद वह इसके सामाजिक अभियानों में सक्रिय रूप से सहभागी रहीं। विशेष रूप से बेटी विवाह सहयोग और मृत्यु सहयोग जैसे सामाजिक कार्यों में उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया। दुर्भाग्यवश 8 जनवरी 2026 को उनका निधन हो गया।
एफआरसीटी के अनुसार, सदस्यता ग्रहण करने से लेकर निधन तक सुमन ने संगठन में कुल 650 रुपये का सहयोग किया था। संगठन के बायलॉज एवं निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उनके निधन के बाद सदस्यों ने सामूहिक रूप से सहयोग किया। इस सामूहिक सहभागिता के परिणामस्वरूप सुमन की ओर से नामित नवदीप कुमार को 17 लाख रुपये की सहयोग राशि प्राप्त हुई।
एफआरसीटी का मूल उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि समाज में ‘एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने’ की भावना को मजबूत करना है। संगठन का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग छोटी-छोटी राशि से भी सामाजिक सहयोग की व्यवस्था में सहभागी बनें, तो किसी परिवार के सामने अचानक आए बड़े संकट को सामूहिक प्रयास से कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर एफआरसीटी के जिलाध्यक्ष चंद्रमा सिंह चौहान एवं जिला महामंत्री पुष्पा शर्मा ने सहयोग करने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र कुमार वर्मा ने भी बलिया जनपद के कार्यकर्ताओं के प्रयास की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया।
सहयोग अभियान को सफल बनाने में डॉ. अरविंद सिंह चौहान, डॉ. चंदन राजभर, डॉ. गजाधर यादव, अमरनाथ, अनूप कुमार गुप्ता, अंजू गुप्ता, आनंद गुप्ता, निषेध श्रीवास्तव निशु, आलोक कुमार सिंह, ईश्वर चंद्र गुप्ता राजन सहित जिला एवं ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पदाधिकारियों ने समाज के लोगों से एफआरसीटी की सदस्यता ग्रहण करने तथा बेटी विवाह सहयोग, मृत्यु सहयोग एवं अन्य सामाजिक अभियानों में सक्रिय भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदस्यता केवल संगठन से जुड़ना नहीं, बल्कि जरूरत के समय किसी परिवार के साथ खड़े होने का संकल्प है। सामूहिक सहयोग की यही भावना समाज को अधिक मजबूत और संवेदनशील बनाती है।







