कान्हा के जन्मोत्सव से गुरु सम्मान तक योगी
शुक्रवार देर रात गोरखनाथ मंदिर में मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
शनिवार को 81 शिक्षकों का सम्मान; शिक्षा में संस्कार, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा पर दिया जोर
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दो दिवसीय गोरखपुर प्रवास में शुक्रवार की रात जहां गोरखनाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धार्मिक परंपरा जीवंत हुई, वहीं शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा और शिक्षक सम्मान का संदेश प्रमुख रहा। शुक्रवार देर रात मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के मुख्य अनुष्ठान में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने बाल गोपाल को पालने में झुलाया और आरती की। इसके अगले दिन उन्होंने 81 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा कि बच्चों को ज्ञान के साथ संस्कार देना भी शिक्षा का अहम उद्देश्य है।
शुक्रवार को मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन-पूजन के बाद मुख्यमंत्री लखनऊ के जन्माष्टमी कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद देर रात वह गोरखपुर पहुंचे। गोरखनाथ मंदिर में पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा निवेदित की। मंदिर में जन्माष्टमी के चलते पहले से ही उत्सव का वातावरण बना हुआ था और श्रद्धालुओं की आवाजाही देर रात तक जारी रही।
महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में शाम से भजन-कीर्तन का कार्यक्रम चल रहा था। कृष्ण भक्ति के गीतों के बीच राधा-कृष्ण के रूप में सजे बच्चे भी आकर्षण का केंद्र बने रहे। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीयता से समय बिताया। बच्चों को उपहार दिए गए। कई बच्चों ने मुख्यमंत्री से बातचीत की, जबकि कुछ ने दोहे और श्लोक सुनाकर अपनी प्रतिभा दिखाई। बच्चों के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने जन्माष्टमी समारोह में बाल संस्कार का भाव भी उभारा।
भजन संध्या में देर रात तक सोहर, बधाई गीत और कृष्ण भजनों की प्रस्तुतियां होती रहीं। कार्यक्रम में कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और भक्ति से जुड़े गीत प्रस्तुत किए। इस दौरान आयोजित बालरूप सज्जा प्रतियोगिता में राधा और कृष्ण के स्वरूप में पहुंचे बच्चों ने हिस्सा लिया। अलग-अलग वर्गों में चयनित बच्चों को मुख्यमंत्री ने प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया।
जन्माष्टमी के मुख्य अनुष्ठान का समय नजदीक आने के साथ मंदिर के गर्भगृह में धार्मिक तैयारियां पूरी की गईं। करीब साढ़े 11 बजे से विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ मंदिर परिसर जयघोष, सोहर और घंट-घड़ियाल की ध्वनि से गूंज उठा। इसी बीच मुख्यमंत्री ने बाल गोपाल के स्वरूप को गोद में लिया। फूलों से सजाए गए पालने में लड्डू गोपाल को विराजमान कर उन्होंने पालना झुलाया और आरती उतारी।
जन्मोत्सव के अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद और फलाहार वितरित किया गया। मंदिर परिसर में देर रात तक भक्तों की मौजूदगी रही। गर्भगृह के आसपास श्रद्धालु जन्मोत्सव के साक्षी बनने के लिए जुटे रहे। जन्म के मुख्य अनुष्ठान से पहले भी भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें शाम से मध्यरात्रि तक कलाकारों ने कृष्ण भक्ति के गीत प्रस्तुत किए। साधु-संतों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में जन्माष्टमी का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
शिक्षा के मंच पर 81 शिक्षकों को सम्मान
शुक्रवार रात धार्मिक आयोजन के बाद शनिवार को मुख्यमंत्री के गोरखपुर प्रवास का दूसरा दिन शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों के नाम रहा। योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के कुल 81 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल रहे। सम्मान पाने वालों में 33 महिला शिक्षक भी रहीं।
शिक्षकों को उनके समर्पण, बेहतर शिक्षण कार्य, नवाचार, विद्यालय प्रबंधन और विद्यार्थियों के विकास के लिए राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार-2025 प्रदान किए गए। समारोह में मुख्यमंत्री ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की बधाई दी और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के योगदान को याद किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने शिक्षा को राष्ट्र के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि किसी देश की मजबूती केवल आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति से तय नहीं होती। नई पीढ़ी को मिलने वाली शिक्षा और संस्कार भी राष्ट्र की दिशा निर्धारित करते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देने के साथ उनके व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अनुशासन, जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता जैसे गुण विकसित करने में शिक्षक का योगदान महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक की भूमिका कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है। बच्चों की सोच को सकारात्मक दिशा देना, उनमें आत्मविश्वास पैदा करना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने की प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका लगातार बनी रहती है। इसी वजह से शिक्षकों के कार्य को राष्ट्र निर्माण से जोड़कर देखा जाता है।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़ने की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री के अनुसार विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के साथ भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा से भी परिचित कराना आवश्यक है। काशी, सारनाथ, अयोध्या, मथुरा और प्रयागराज जैसे केंद्रों की परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध विरासत को आधुनिक शिक्षा के साथ आगे ले जाने की जरूरत है।
शिक्षा में डिजिटल संसाधनों के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित की गई हैं और 1,129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 2 लाख 61 हजार से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। इन व्यवस्थाओं से विद्यालयों में आधुनिक शिक्षण संसाधनों की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संचालित सुविधाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 14 हजार दिव्यांग बच्चों को एस्कॉर्ट अलाउंस और 23 हजार से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेंड दिया जा रहा है। करीब 23 हजार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर और हियरिंग एड जैसी सुविधाएं शामिल हैं। लगभग तीन हजार दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल पुस्तकें उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई।
शिक्षा से जुड़े कर्मियों के कल्याण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षामित्रों को तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया गया है। अनुदेशकों का मानदेय भी 17 हजार रुपये किया गया है। इसके साथ ही पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की स्वास्थ्य सुविधा का भी उल्लेख किया।
सम्मान समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों में उत्साह का माहौल रहा। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी सामने आया कि विद्यालयों में उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सुविधाएं शिक्षा को आधुनिक बनाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और संस्कार निर्माण में शिक्षक की भूमिका केंद्रीय बनी रहती है।
गोरखपुर प्रवास के इन दो दिनों में मुख्यमंत्री की गतिविधियों का स्वरूप भले अलग रहा, लेकिन दोनों कार्यक्रमों के बीच बच्चों और नई पीढ़ी से जुड़ा एक साझा संदेश दिखाई दिया। शुक्रवार की रात गोरखनाथ मंदिर में बाल गोपाल के जन्मोत्सव के दौरान बच्चों के बीच संस्कार और परंपरा का वातावरण रहा, जबकि शनिवार को शिक्षक दिवस समारोह में उन्हीं बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा हुई।
इस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर प्रवास श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक छटा से शुरू होकर शिक्षक सम्मान समारोह तक पहुंचा। एक तरफ गोरखनाथ मंदिर में परंपरागत विधि-विधान से जन्माष्टमी मनाई गई, तो दूसरी ओर शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक, दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधाओं, शिक्षकों के कल्याण और भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर सरकार की दिशा सामने रखी गई। शुक्रवार की रात से शनिवार तक चले इन कार्यक्रमों में आस्था के साथ शिक्षा और संस्कार का विषय लगातार केंद्र में बना रहा।








