जब प्रशासनिक अक्षमता से बात अस्तित्व बचाने पर आयी तो ग्रामीणों ने खुद ही मोड दी गंगा की विनाशकारी धारा
जब प्रशासनिक अक्षमता से बात अस्तित्व बचाने पर आयी तो ग्रामीणों ने खुद ही मोड दी गंगा की विनाशकारी धारा
प्रशासन की सुस्ती पर ग्रामीणों की बाहुबली जीत, चंदे के पैसों से मोड़ दी गंगा की धारा, डीएम के दावो को नौरंगा ने दिखाया आईना
बलिया।। जब प्रशासनिक दावें, सिर्फ दावें ही लगने लगे और बात अस्तित्व को बचाने पर आ गयी तो ग्रामीणों ने ऐसा सम्मिलित प्रयास किया कि दो तरफ से जो कटान का संकट उत्पन्न हो गया था, उसमे से एक को खत्म कर दिया गया। गंगा जी को राजा भागीरथ ने गंगोत्री से पृथ्वी पर रास्ता दिखाते हुए लाने का काम किये थे। आज नौरंगा के ग्रामीणों ने भी अपने सम्मिलित प्रयास से मतवाले हाथी की तरह मचलते हुए विनाश करने को आतुर गंगा की धारा को रुख बदलने पर मजबूर कर दिया है। गंगा की धारा का रुख मुड़ जाने से ग्रामीणों मे काफ़ी उत्साह है।
बता दे कि जनपद बलिया का नौरंगा गांव जो बाढ़ के दिनों मे तहसील मुख्यालय हो या जनपद मुख्यालय हो, से संपर्क विहीन हो जाता है।नौरंगा को बचाने के लिये उत्तरप्रदेश की सरकार करोड़ों रूपये का कटानरोधी कार्य करा रही है। लेकिन जहां कार्य हो रहा raहै उसके कुछ दूर पहले एक दूसरी धारा मुड़ कर सीधे गांव को अपनी चपेट मे लेने के लिये आतुर दिखी। इस भयावह मंजर को ग्रामीणों ने समय रहते भांप लिया। ग्रामीणों ने एक मीटिंग करके अपने गांव के अस्तित्व को बचाने के लिये चंदा एकत्र किया और श्रमदान के माध्यम से बांस और बालू भरी बोरियो के सहारे एक ऐसा बंधा बना दिया, जिसके चलते गंगा ने भी इनके श्रम को नमन करते हुए अपनी धारा का रुख मोड़ दिया।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की बैरिया तहसील के नौरंगा गांव में इन दिनों कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। गंगा नदी के किनारे बसे इस गांव की आबादी करीब 20 हज़ार है, जो अक्सर बाढ़ और कटाव की मार झेलती है। इस साल भी जब गंगा की धारा गांव की ओर मुड़ी, तो ग्रामीणों ने हार मानने के बजाय खुद मोर्चा संभाल लिया। आज यह ग्रामीण आपस में चंदा इकट्ठा कर बांस-बल्ली और बोरियों के सहारे गंगा की धारा को मोड़ने का काम खुद कर रहे हैं।
चंदे के पैसे से अस्थाई बांध बनाने के वायरल खबर पर डीएम ने जताई थी नाराजगी
आप को बताते चले कि बीते कुछ दिन पहले बलिया के जिला अधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने चंदा लेकर नौरंगा के ग्रामीणों द्वारा अस्थाई बांध बनाने की वायरल खबर पर नाराजगी जताते हुए नसीहत दी थी। डीएम ने कहा था की वीडियो बना कर वायरल करना बहुत आसान है, चंदा लेकर बांध बनाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया था और मीडिया से धरातल पर जाकर सच्चाई जानने की अपील की थी। दावा किया था कि किसी भी तरह के चंदे के पैसे से वहां बांध का निर्माण नहीं किया जा रहा है बल्कि दावा किया था कि बाढ़ विभाग के द्वारा नौरंगा गांव को बचाने के लिए दो परियोजनाएं चल रही है, हालांकि डीएम ने यह स्वीकार किया था कि परियोजनाओं का कार्य धीमी गति से चल रहा है जिसके लिए ठेकेदार को जल्द काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
खुद की जेब से चंदा, खुद की मेहनत, डीएम को मिला करारा जवाब
डीएम की अपील पर मीडिया जब नौरंगा गांव पहुंची तो सच सामने आ गया। गांव के ही ननकू ठाकुर ने बताया कि गंगा जी की धारा गांव की मुख्य जगह पर कटान कर रही थी, जिसके चलते गांव वालों ने खुद ही बांधने का काम शुरू कर दिया है। ननकू के अनुसार इस काम के लिए करीब 10 हजार बोरियों का इस्तेमाल किया गया है, उन्होंने बताया कि इस मुहिम के लिए पैसा गांव वालों ने ही आपस में चंदा इकट्ठा करके जुटाया है। साथ ही कुछ पैसा स्थानीय समाजसेवी सूर्यभान सिंह ने भी दिया है। ननकू कहते हैं कि कोई सरकार से सहयोग नहीं मिल रहा है बस अपने स्तर पर कर रहे हैं। कैमरे पर मामले की सच्चाई बता कर ग्रामीणों ने डीएम को करारा जवाब दिया।
योगी-मोदी जी, पक्का पुल बनवा दीजिए
वही, गांव के उमाशंकर पाठक ने बताया कि गांव की स्थिति दयनीय है। वे कहते हैं, आज तक हम लोगों के पास कोई सुविधा नहीं है। स्कूल है, मास्टर भी आते हैं, लेकिन कैसे आते हैं यह कोई नहीं पूछता। यहां कोई अधिकारी आने का नाम तक नहीं लेता, क्योंकि आने में ही भारी परेशानी है। गांव वालों ने हाथ जोड़कर योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है कि गंगा नदी पर एक पक्का पुल बनवा दिया जाए ताकि ग्रामीणों को आवागमन की सुविधा मिल सके। साथ ही ग्रामीणों का यह भी मानना है कि अगर यहां पुल बन जाए तो न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि कटान की समस्या से भी बड़ी राहत मिलेगी।
बाढ़ विभाग के एक्सईएन ने नौरंगा के सच्चाई पर लगाया मुहर
इस मसले पर सिंचाई विभाग के एक्सईएन संजय मिश्रा ने बताया कि नौरंगा को कटान से बचने के लिए दो परियोजनाएं चल रही है। जिनका काम काफी तेजी से हो रहा है। उन्होंने स्वीकार किया करते हुए कहा कि गांव वालों ने उन्हें बताया कि वह खुद से भी बोरिया आदि लगाकर कटाव रोकने का प्रयास कर रहे है। संजय मिश्रा के मुताबिक विभाग की तरफ से भी सहयोग किया गया है और आगे भी जो संभव होगा किया जाएगा।
तो क्या नौरंगा के ग्रामीणों की मेहनत रंग लाएगी और क्या उन्हें पक्के पुल की सौगात मिलेगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल यह ग्रामीण अपनी सुरक्षा के लिए डटे हुए है।









