Breaking News

जो करेगा आप और हम शब्द का प्रयोग, उसको होंगी हर मंजिल हासिल :प्रदीप मिश्रा

 



शिव का एक क्षण का भी स्मरण, जीवन को देगा सुधार :प्रदीप मिश्रा 

मधुसूदन सिंह 

बलिया।। बाबा बालखंडी नाथ दिउली के सानिध्य मे चल रही शिव महापुराण की कथा के चौथे दिन सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिवत्व से कैसे जीवन को सुधारा जाय, कई प्रसंग के माध्यम से समझाया। 

कहा कि जीवन को सुखमय बनाने के लिये भागवत भजन हो, शिव भजन हो, का नियमित श्रवण, एक तरफ जहां मनचाही भौतिक सम्पदाओ को दिलाता है, वही शिव के नजदीक कर देता है। वही व्यसन मे संलिप्तता जीवन को बर्बाद कर देता है। ईश्वर ने 3.5 करोड़ रोम छिद्र वाले हमारे शरीर को बनाया है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका प्रयोग हम भजन मे, नाम स्मरण मे, परमार्थ मे लगा कर शिव के करीब जाते है या व्यसनों मे लिप्त होकर अपना जीवन बर्बाद कर देते है।

जिसका पेट ख़राब होगा तो उसको घी भी देगा तो अच्छा नहीं लगेगा. लेकिन अगर भूखे को चटनी रोटी भी देंगे तो ख़ुशी से खा लेगा। भूखे को भजन और शिव भक्त को भजन श्रेष्ठ लगता है।

आप, हम और मै, का कैसे करें प्रयोग 

पंडित प्रदीप मिश्रा ने जीवन मे सफलता हासिल करने के लिये तीन शब्दों को कैसे प्रयोग करके जीवन मे सफलता हासिल किया जाय, को खूबसूरती के साथ समझाया। पंडित मिश्रा ने कहा कि जीवन मे सफल होने के लिये आप और हम का प्रयोग करना जरुरी है। शिव का कोई भी भक्त मैंने यह किया, या यह मेरा है, का प्रयोग नहीं करता है। उसकी नजर मे जो भी काम होता है वह आप (भोलेनाथ ) की कृपा से होना होता है। वही किसी भी काम की सफलता मे सामूहिकता को बढ़ावा देने के लिये,हम ने यह कार्य किया।

जब परिवहन मंत्री ने कहा - यह आयोजन बाबा करा रहे है 

बलिया मे विशाल व भव्य आयोजन को एक सप्ताह से भी कम समय मे आयोजित करने पर पंडित प्रदीप मिश्रा ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से कहा कि अपने इतना बड़ा करा दिया, इतने कम समय मे कोई भी इतना बड़ा आयोजन नहीं करा सकता है। इस पर परिवहन मंत्री ने कि गुरुदेव यह मै नहीं भोला बाबा करा रहे है। मेरी कहां सामर्थ्य है, यह भोलेनाथ करा रहा है। 






मेरा घर शिव का घर 

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जिस व्यक्ति के मन मे यह भाव आ गया कि मेरा घर नहीं बल्कि शिव का घर है, उसके घर से अशांति हमेशा हमेशा के लिये दूर हो जाती है।शिव से जुड़ाव ही सारे कष्टों से छुटकारा दिलाने वाला है।

एक क्षण का शिव का स्मरण, कर देगा बेड़ा पार 

चौथे दिन की कथा मे श्री मिश्रा ने कहा कि बलिया वासियों आप ने कितने अच्छे कर्म किये है जो आपको शिव महापुराण की कथा का श्रवण करने का मौका मिला है। शिव महा पुराण की कथा मे कही शिवरात्रि मिलती है, कही प्रदोष मिलता है, कही सोमवती अमावस्या मिलती है। लेकिन आप लोगों का सौभाग्य है कि आपको अधिक मास, प्रदोष, शिवरात्रि और सोमवती अमावस्या को शिव महा पुराण की कथा सुनने को मिल रही है।



एक क्षण की महत्ता को समझाते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि एक गांव मे एक संत और एक लोहार रहते थे। लोहार बहुत गरीब था। वह दिन निकलने के साथ ही लोहारगिरी मे लग जाता था और उसी से मिलने वाले धन से अपने परिवार का भरण पोषण करता था। एक दिन संत उसके घर आकर बोले कि शिव मंदिर क्यों नहीं जाते हो। लोहार ने कहा परिवार के पालन पोषण के लिये मुझे काम से समय नहीं मिलता है। संत ने कहा कि कुछ देर के लिये ही जाया करों। लोहार रोज शिवालय जाता और नंदी के कान मे कुछ कह कर वापस आ जाता।

एक दिन गांव मे बहुत तेज बारिश होने लगी। पूरा गांव जलमग्न हो गया। संत भी अपनी कुटिया छोड़कर चले गये। लोहार ने देखा कि पूरा गांव जलमग्न हो गया है। वह सीधे नंदी के पास गया और कान मे बोला कि भोलेनाथ से कहिये -मेरी सुधि ले। इतना कहकर वह गांव घर आया ही था कि भोलेनाथ ने ऐसी कृपा कि की बारिश रुक गयी और पूरा गांव बच गया। एक क्षण का शिव से रिश्ता पूरे गांव को बचा दिया। शिव से नाता जोड़ने के लिये घंटो की नहीं दिल से एक क्षण का भी स्मरण काफ़ी है।