तीसरे दिन की कथा मे बोले पंडित प्रदीप मिश्रा : सारे संसार मे केवल शिव ही हर सकते है पाप ताप संकट
सिर्फ सादगी व आस्था से रिझते है भोलेनाथ
मधुसूदन सिंह
बलिया।। बाबा बालखंडी नाथ दिउली के सानिध्य मे परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के आयोजकत्व मे चल रही शिव महा पुराण की कथा के तीसरे दिन कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव की भक्ति व शिव भक्त के चरित्र को विभिन्न कथाओ के माध्यम से समझाने का काम किया। कहा कि शिव को आडंबर नहीं सादगी पसंद है।
केवल शिव ही भक्त का हर लेते है सारा पाप
श्री मिश्रा ने कहा कि शरीर के अंदर जब मवाद हो जाता है, तब असहय पीड़ा होती है। इस पीड़ा को दूर करने के लिये हम डॉक्टर के पास जाते है। डॉक्टर दवा देता है, इंजेक्शन लगाता है, फिर भी अगर पीड़ा कम नहीं होती है तो वह उच्च चिकित्सा के लिये रेफर कर देता है। जब वहां भी दर्द नहीं घटता है तो और उच्च हॉस्पिटल के लिये रेफर किया जाता है।
इसी तरह कहा जाता है कि पृथ्वी बहुत सहनशील होती है। एक बार नारद मुनि ने पृथ्वी माता से पूंछा मां आप किसका और कैसा भार सहन करती है। माता पृथ्वी ने कहा कि मै मनुष्यों द्वारा खुद को खोदे जाने के दर्द को भी बर्दाश्त कर लेती हूं। अन्यान्य तरीके से मनुष्य मुझे कष्ट पहुँचाता है उसको भी मै बर्दाश्त कर लेती हूं। लेकिन मनुष्यों के पाप को मै बर्दाश्त नहीं कर सकती हूं।
पंडित श्री मिश्रा ने कहा कि जिस तरह छोटे अस्पताल बड़े रोग को देखते ही रेफर कर देते है, स्वयं इलाज करने से हाथ खड़े
कर देते है और उच्च चिकित्सा के लिये रेफर कर देते है। उसी तरह धरती माता भी पापियों को अपने यहां रहने नहीं देती है। पूरे संसार मे एक शिव ही है जो अपनी शरण मे आने वालों के सब पाप को भी ग्रहण कर लेते है और उसका जीवन संवार देते है।
देवराज ब्राह्मण और बिन्दुक की कहानी इसी सत्य को उजागर करती है। देवराज ब्राह्मण गलत संगति और पर स्त्री गमन मे अपना जीवन नष्ट कर लिया था। प्रेमिका के कहने पर देवराज ने रानी का हार चुराया। भागते भागते वह शिव मंदिर मे चला गया, जहां कुछ देर शिव महा पुराण की कथा उसके कानों मे पड़ गयी। मंदिर से निकल कर वह बेलपत्र के पेड़ के नीचे गया और उसके प्राण निकल गये। कुछ देर की शिव पुराण की कथा का फल यह हुआ कि भोलेनाथ स्वयं नंदी के साथ आकर अपने धाम को लेकर चले गये।
बिन्दुक भी अपने कर्मो के कारण डूबकर मृत्यु को प्राप्त हुआ। उसकी मुक्ति भी उसकी पत्नी चंचूला ने अपनी सहेली माता पार्वती के सहयोग से शिव महा पुराण की कथा सुनकर उद्धार कराया। तात्पर्य यह है कि चाहे कितना भी बड़ा पापी हो अगर वह शिव की शरण मे चला जायेगा, तो मेरा भोला उसका उद्धार करने मे एक क्षण की भी देर नहीं लगाएगा।
आडंबर से दूर है मेरा भोला भंडारी
पूरी दुनिया के भक्तों को मनचाहा फल देने वाला मेरा भोला भंडारी आडम्बर से कोसों दूर रहता है। जिस तरह से भोला सरल व आडंबर रहित रहते है, वैसे ही उनको सीधे व सरल भक्त पसंद है। भोला को चाहे कुछ नहीं चढ़ाये,सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाये, मेरा भोला उसी से खुश हो जाता है। एक लोटा जल, सारी समस्या का हल है।
जहां रहता है शिव भक्त, वहां नहीं पड़ता अकाल
इस उक्ति को समझाते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने आदिरामा नामक शिव भक्त महिला की कथा सुनाई। कहा कि आदिरामा एक गरीब महिला थी। वह रोज शिवजी को जल चढ़ाती थी। गांव की औरते उसको ताना मरती थी लेकिन वह बिना जबाब दिये जल चढ़ा रही थी। एक दिन गांव की महिलाओं ने गांव के पुरुषों से मंत्रणा करके आदिरामा को मंदिर जाने से रोका बल्कि उसे गांव से निकाल दिया। 9 दिनों तक गांव गांव आदिरामा इस लिये घूमती रही कि वह शिव मंदिर को ढूंढ़ रही थी। एक गांव मे उसे शिव मंदिर मिल गया। आदिरामा उसी गांव मे रुक कर फिर से रोज शिव को जल चढ़ाना शुरू कर दिया।
जहां रहते है संत सती शिव भक्त, वहां नहीं पड़ता है अकाल
आदिरामा के गांव छोड़कर दूसरे गांव मे रहने के कुछ दिन बाद पूरे क्षेत्र मे अकाल पड़ गया। चारो तरफ त्राहिमाम मच गया। अन्न जल के लिये मनुष्य व पशु पक्षी तड़पने लगे। लेकिन आदिरामा जिस गांव मे रह रही थी, उस अकेले गांव मे न पानी की कमी हुई, न ही अन्न की कोई कमी हुई। क्योंकि शिव को जहां जल चढ़ाया जाता है, वहां किसी भी प्रकार की आपदा नहीं आती है।
दो सुख होता है -मन का सुख, धन का सुख
पंडित मिश्रा ने कहा कि दो तरह का सुख होता है। पहला धन का सुख होता है। धन के सुख से सांसारिक सारे सुख हासिल किये जा सकते है लेकिन इससे मन को शांति नहीं मिल सकती है। दूसरा सुख मन का सुख होता है। यह केवल शिव भक्ति से ही संभव है।
कथा के अंत मे शिव पार्वती के विवाह को दर्शाया गया। आज की आरती करने वालों मे आयोजक धर्मेंद्र सिंह, वीरेंद्र कुमार पाठक टुनजी, आदि प्रमुख लोग शामिल रहे।









