चकबंदी विभाग की महिमा अपरम्पार, महिला की बयानामा भूखंड को कर दिया अनुसूचित आबादी, मां बेटे दरदर भटकने को हुए मजबूर
अभयेश मिश्रा
बिल्थरारोड बलिया।। क्षेत्र के पिपरौली बड़ागांव में चल रहे चकबंदी प्रक्रिया के दौरान चकबंदी विभाग के तहसील कर्मचारियों द्वारा एकसार मौजे में एक महिला और उनके पुत्र के बैनामे की जमीन को अनुसूचित आबादी करने का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ित महिला काश्तकार ने जिलाधिकारी से मिलकर न्याय की गुहार लगाते हुए आवश्यक कारवाई की मांग किया है।जिसके सम्बन्ध में अभी मामला डीडीसी न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद भी जनप्रतिनिधि के दबाव में चकबंदी विभाग के लेखपाल और सीओ दोनों पीड़िता के जमीन का नापी कराने में लगे हुए है। जानकारी के अनुसार नबीउन निशा और उनके पुत्र एनुल हक द्वारा एक व्यक्ति से गाटा संख्या 762 में रकबा0.372 हेक्टेयर बैनामा लिया गया था। चकबंदी के दौरान इनकी जमीन को पर्चा 23 में उसी स्थान पर रखा गया था। पीड़ित महिला का आरोप है कि बाद में गांव के एक व्यक्ति उमेश अम्बेडकर ग्राम प्रधान और क्षेत्रीय विधायक हंसू राम से चकबंदी विभाग के सीओ और अन्य कर्मचारियों पर दबाव दिलवाकर हमारे जमीन को अनुसूचित आबादी बना दिया गया है। जबकि पूर्व में गाटा संख्या 999/2 रकबा 0.372 हेक्टेयर आबादी काटा गया था। जिसको उमेश अम्बेडकर द्वारा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से चकबंदी अधिकारी पर दबाव देकर पुरानी आबादी को निरस्त करके हमारे बैनामे की जमीन गाटा संख्या 762 रकबा 0.372 को अनुसूचित आबादी सुरक्षित कर दिया गया है। उमेश अम्बेडकर द्वारा चकबंदी अधिकारी पर दबाव देकर संबधित लेखपाल से नापी कराने में अमादा है। जिसको लेकर मामला डीडीसी न्यायालय में लंबित है।
पीड़ित काश्तकार के बैनामे की मूल चक को चकबंदी विभाग के अधिकारियों द्वारा अनुसूचित आबादी बनाने पर उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगने लगा है। पीड़ित महिला ने चकबंदी अधिकारियों की कारगुरियों के चलते जिलाधिकारी बलिया मंगला प्रसाद सिंह से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है। जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तुरंत संबंधित अधिकारी को आवश्यक कारवाई का निर्देश दिया है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायती पत्र भेजा है।








