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लखनऊ में अधिवक्ताओं का उबाल, चैंबर टूटने के विरोध में तीन दिन का कार्य बहिष्कार




लखनऊ में अधिवक्ताओं का उबाल, चैंबर टूटने के विरोध में तीन दिन का कार्य बहिष्कार

लखनऊ।। रविवार को जिला अदालत परिसर के बाहर बने अधिवक्ताओं के चैंबरों पर चली प्रशासनिक कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। सुबह नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय परिसर पहुंची, जहां कथित अवैध निर्माण हटाने का अभियान शुरू किया गया। प्रशासन का कहना था कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की जा रही है और सरकारी भूमि तथा मार्ग पर बने अवैध चैंबर हटाए जा रहे हैं।


कार्रवाई की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। अधिवक्ताओं का आरोप था कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के वर्षों पुराने चैंबरों को तोड़ा जा रहा है। विरोध के दौरान स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती चली गई। मौके पर नारेबाजी, धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारी वकीलों के बीच टकराव बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद के दौरान पथराव भी हुआ, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया।


घटना में कई अधिवक्ता और पुलिसकर्मी घायल हुए। घायल वकीलों को इलाज के लिए बलरामपुर अस्पताल ले जाया गया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए की गई, जबकि अधिवक्ताओं ने इसे अन्यायपूर्ण और अपमानजनक बताया। वकीलों का कहना है कि जिन चैंबरों को हटाया गया उनमें कई वैध निर्माण भी शामिल थे।


घटना के बाद अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली। सेंट्रल बार एसोसिएशन ने विरोध स्वरूप तीन दिन के कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया। बार पदाधिकारियों ने कहा कि अधिवक्ता न्यायिक कार्य से दूर रहकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। साथ ही 20 मई को आमसभा बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।


मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अधिवक्ताओं पर हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था चैंबर तोड़ना गलत है। उन्होंने घायल अधिवक्ताओं के इलाज और मुआवजे की मांग भी उठाई।फिलहाल लखनऊ में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।