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रमेश चंद द्विवेदी के सम्मान मे आयोजित हुई काव्य गोष्ठी संपन्न

 





 गोरखपुर।।घुघुली  महराजगंज के  मूल्य निवासी एवं  देव भूमि उत्तरा खंड हल्द्वानी रहने वाले विद्वान आलोचक, कवि, लेखक रमेश चंद्र द्विवेदी जी का सपत्नीक आगमन अपने जन्म कि माटी जन्म भूमि पर अनेक मांगलिक कार्यो मे सम्मिलित होने के उद्देश्य से हुआ श्री द्विवेदी की  मातृ भूमि कि खुशबु ने गोरखपुर वासियों को उनके आगमन से अल्लाउद्दीन एवं उत्साहित एवं गौरवांवित किया गोरखपुर वासियों ने भी

    इस अवसर का लाभ उठाने से कैसे चुक सकते थे गोरखपुर कि साहित्यिक संस्था श्री देव डीप साहित्यिक संस्था द्वारा रमेश चंद्र द्विवेदी जी के जन्म भूमि आगमन को अविस्मरणीय बनाने के लिए वरिष्ठ साहित्यकार मुक्ति नाथ त्रिपाठी जी के महादेव पुरम के निवास स्थान पर भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया

      गोष्ठी का शुभारम्भ नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर के स्वागत संबोधन  से हुआ स्वागत संबोधन के बाद  मशहूर कवयित्री श्रीमती बिन्दु चौहान के सरस्वति वंदना से हुआ जिसके उपरांत विधि वत कवि गोष्ठी  का शुभारम्भ हुआ प्रथम कवि डॉ भारतेन्दु सिंह जी द्वारा अपनी सारगर्भित रचनाओ से सबको अभिभूत किया ख्याति लब्ध रचनाकर अंजू विश्वकर्मा जी द्वारा  अपनी सारगर्भित रचनाओ से सभी को झकझोरते हुए स्पंदित किया गया

 युवा कवि राघवेन्द्र मिश्र द्वारा  अपने गजल एवं शेरों से गोष्ठी को नई ऊंचाई प्रदान करते हुए श्रोताओं के दिलों को भाव एवं संवेदना के प्रवाह की धारा का प्रवाह किया गया।

कवयित्री बिंदु चौहान जी द्वारा अपनी रचनाओ से वातावरण को गुंजायमान करते हुए संवेदना को अनुभूति से अभिवंचित किया गया।

कवि विचारकर दिनेश गोरखपुरी द्वारा अपने दोहों से समाज समय कि निरंतरता में चिन्तन कि चैतन्य ता का संचार किया गया



    कवयित्री नीलम पांडे जी द्वारा भगवान राम कि मर्यादा एवं अयोध्या का जिवंत सजीव अभिव्यक्ति से गोष्ठी शोभायमान बना दिया।

     आतिथ्य मुक्ति नाथ तिवारी जी द्वारा अपनी जिवंत जाग्रत प्रस्तुति से वातावरण मे मातृभूमि कि संवेदना का संचार कर गोष्ठी की प्रमाणिकता को चार चांद लगा दिया।

      अंतिम कवि के रूप मे प्रतिष्ठित भोजपुरी एव ख्यातिलब्ध हिन्दी साहित्यकार गीतकार ग़ज़लकार पूर्व प्रधानाचार्य दरोगा राय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सुभाष  यादव जी द्वारा अपने गज़लों से गोष्ठी को बुलन्दियों तक पहुंचाते हुए अविस्मरणीय बनाया गया लोंगो कर मांग पर अपना मश्हूर गीत केहू केतनों  दुलारी लेकिन ना होइ से गोष्ठी को  भोजपुरी खुशबु से मुग्ध कर दिया।



       कार्यक्रम संचालक नंदलाल मणि त्रिपाठी द्वारा अपनी रचनाओ के वाचन के उपरांत कार्यक्रम कि अध्यक्षता कर रहे रमेश चन्द्र द्विवेदी जी द्वारा अपने सारगर्भित महत्वपूर्ण उद्बोधन के द्वारा कमियों कि प्रस्तुति एवं रचनाओ की विधि वत समीक्षा करने हुए अपनी रचनाओं से अपनी मातृभूमि कि उच्च सम्वेदना आकर्षण प्यार परिवार परंपरा अभिव्यक्ति ने लम्हों को यादगार बनाते हुए वक्त को अपने दामन मे समेट यादगार बनाने को विवश कर दिया।

          कार्यक्रम के अंत मे गोरखपुर विश्विद्यालय कि बी एस सी ए जी द्वितीय वर्षा छात्रा खुशी सिंह ने सबको आधार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को अविस्मरणीय अतुलनीय अनुकरणीय बताया ।