आरक्षण आरक्षण के खेल मे अपने पारम्परिक व्यवसायों से बेदखल होता हिन्दू समुदाय, जाने कैसे
मधुसूदन सिंह
बलिया।। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिये आरक्षण आरक्षण के जारी खेल ने वो पुरानी कहावत को चरितार्थ कर दिया है जिसमे कहा गया है कि... आधी छोड़ पूरी को धावे, आधी मिले न पूरी पावे। जीहां, यही हो रहा है। हिन्दू समुदाय सरकारी नौकरी पाने के लिये इस तरह आपस मे भीड़ रहा है, जैसे सरकारी नौकरी नही मिलेगी तो जिंदगी नर्क बन जायेगी। यह सब हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान मे बनाये गये आरक्षण के कारण हो रहा है।
दलित वर्ग का वोट हासिल करने के लिये हमारे देश के भाग्य विधाताओं द्वारा ऐसे ऐसे क़ानून बनाये जा रहे है जो इस वर्ग के उत्थान की बजाय सामाजिक रूप से तिरस्कृत करने का कारण बन रहा है। ऐसे कानून से हिन्दू समुदाय की सामाजिक समरसता छिन्नभिन्न हो रही है। दलित समुदाय को पूर्व मे जिन कानूनों से संरक्षण प्राप्त है, वह स्वयं मे काफ़ी सशक्त है, उसमे संशोधन की आवश्यकता ही नही थी लेकिन दलितों का मसीहा बनकर वोट हासिल कर कुर्सी पाने की लालसा इन समुदायों के लिये मुसीबत ही ला रहा है।
आरक्षण ने कैसे किया है नुकसान
हिन्दू सभ्यता मे वर्ण व्यस्था के अनुसार कार्यों को करने वाले लोगों को नाम दिये गये है। धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा देना, यज्ञ हवन आदि करने वालों को ब्राह्मणों, देश राज्य समाज की रक्षा करने वालों को क्षत्रिय, व्यापार करने वालों को वैश्य और उपरोक्त तीनों वर्गों के अतिरिक्त बचे कार्यों को करने वालों को दलित कहा गया है।
उपरोक्त चारों वर्णों मे दलित वर्ग वास्तविक रूप से बहुत पिछड़ा है। इस वर्ग के पिछड़ने का कारण मूलरूप से शैक्षणिक रूप से अति पिछड़ना है। साथ ही इस वर्ग के वे लोग जो आरक्षण का लाभ लेकर ऊपर तो पहुंच गये लेकिन आरक्षण का लाभ लेने का मोह नही छोड़ पाये है और वास्तविक जरूरतमंदो के हक को मारते जा रहे है।
अपने बीच के लोगों का आरक्षण के दम पर शिखर पर पहुंच कर चमक दमक की जिंदगी शेष दलित समुदाय को पैतृक कार्यों को छोड़कर आरक्षण के पीछे भागने की प्रवृत्ति और आर्थिक रूप से कमजोर कर रही है। एक तरफ आरक्षण हिन्दुओं के बीच आपसी प्रेम को दुश्मनी मे बदल रहा है, तो वही दूसरी तरफ इसका फायदा मुस्लिम समुदाय चुपके चुपके उठाकर दलित वर्ग के लगभग 90 प्रतिशत पारम्परिक कार्यों पर कब्जा कर चुका है।
इन कार्यों पर मुस्लिम समुदाय का अब कब्जा
दलित समुदाय के वे लोग जो चमड़ा से सम्बंधित कार्य करते थे, वे अब इस कार्य से मुस्लिम समुदाय द्वारा बेदखल किये जा चुके है। आज चर्म उद्योग पूरी तरह से मुस्लिम समुदाय के हाथों मे है। एक और व्यवसाय जो बाल काटने, दाढ़ी बनाने का था, वह भी अब नाई समाज से मुस्लिम समाज ने लगभग छीन ही लिया है। इस कार्य मे भी आपको 90 प्रतिशत कारीगर मुस्लिम ही मिलेंगे।
दलित वर्ग और पिछड़े समुदाय के लोग पहले साईकिलों, गाड़ियों, लकड़ी, लोहे, और मशीनरी के कार्यों मे हर जगह देखे जाते थे लेकिन आरक्षण का चस्का ऐसे लगा कि इन कार्यों मे भी अब इनके लिये कोई जगह नही बची है। गाड़ियों के पंचर बनाने हो, इंजन बनाने हो, डेंटिंग करनी हो, सब मे मुस्लिम समुदाय ने कब्जा कर लिया है। यही नही आपके घर का पंखा हो, सिलाई मशीन हो, कूलर हो, एसी हो, वशिंग मशीन हो, वाटर प्यूरीफायर हो, मिक्सर ग्राइंडर हो, सभी को बनाने आपके घर मुस्लिम मेकेनिक ही पहुँचता है।मांगलिक कार्यों मे प्रयोग होने वाले सामानों - सिंदूर, सिंधोरा, बिंदी, और बैंड बाजा सब मुस्लिम लोगों के हाथ मे है।
आज आलम यह है कि हिन्दू समुदाय नौकरी पेशा से धन कमाकर घर लाता है और मुस्लिम समुदाय अपनी मेहनत के बल पर हिन्दुओं के घरों से धन कमा रहा है। यह कमाई पहले दलित व पिछड़े वर्ग के लोगों को होती थी। मुस्लिम समुदाय ने आरक्षण की जगह मेहनत को प्राथमिकता दी और अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार लिया, वही दूसरी तरफ हिन्दू समुदाय के दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों ने मेहनत को छोड़कर आरक्षण के सहारे अपनी तरक्की का सपना देखना शुरू कर दिया, नतीजन नौकरी तो मिली नही,पारम्परिक आर्थिक आधार के व्यवसाय से भी हाथ धो बैठा और पहले से भी अधिक रूप से कमजोर होता जा रहा है।
आयुष्मान भारत और पीएम आवास और मुफ्त खाद्यान्न योजनाओं से हिन्दुओं को नुकसान
एक तरफ केंद्र की बीजेपी सरकार चुनाव के समय हिन्दू मुस्लिम सेंटीमेंट को उभार कर सत्ता हासिल की है, तो वही इसकी नीतियों से हिन्दू समुदाय ही पिछड़ता जा रहा है। सबको निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिये सरकार ने बहुत ही अच्छी योजना आयुष्मान भारत चलायी हुई है। लेकिन इस योजना के एक प्रतिबंध ने हिन्दू परिवारों को इसके लाभ से दूर कर दिया है। सरकार के हम दो हमारे दो, की नीति पर चलने वाला हिन्दू समुदाय आज इसी नीति के कारण आयुष्मान भारत कार्ड से वंचित हो गया है। सूच्य हो कि इस योजना मे शामिल होने के लिये 5 से अधिक पारिवारिक सदस्यों का होना जरुरी है। यही एक प्रतिबंध जहां हिन्दू समुदाय के लिये अभिशाप बन गया है तो वही यह प्रतिबंध मुस्लिम समुदाय के लिये वरदान बन गया है। आज किसी भी जनपद का रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिये 80 प्रतिशत के करीब आयुष्मान भारत कार्ड मुस्लिम समुदाय के हाथों मे है।
वही दूसरी तरफ हर गरीब के सिर पर छत हो, के लिये पीएम आवास योजना शुरू की है। इस योजना मे भी हिन्दू परिवारों के सापेक्ष मुस्लिम परिवारों को ही ज्यादे लाभ मिल रहा है। इस योजना मे भी कम से कम दो तिहाई भाग पर मुस्लिम परिवारों ने लाभ उठाया है।वही सरकार द्वारा चलायी जा रही मुफ्त खाद्यान्न वितरण योजना भी मुस्लिम समुदाय के लिये वरदान से कम नही है। इनके परिवारों मे सदस्यों की संख्या अधिक होने से इसका लाभ भी इनको अधिक मिल रहा है।







