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अब प्राथमिक कृषि साख समितियों से बिकेंगी प्रतिबंधित औषधियां,जनस्वास्थ्य को हो सकता है बड़ा खतरा,AIOCD का कड़ा विरोध

 





बलिया।। बलिया केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने “जनस्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं” – PACS को औषधि लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर AIOCD का कड़ा विरोध का समर्थन किया है। सरकार का यह कदम अप्रक्षित व्यक्तियों के द्वारा जन स्वास्थ्य को खतरें मे डालने वाला है। यह वैसा ही कदम है जैसे झोलाछाप डॉक्टर्स के खिलाफ एक तरफ अभियान चलाना है और दूसरी तरफ अपने ही सरकारी अस्पतालों मे होम्योपैथिक यूनानी आयुर्वेदिक चिकित्सकों के द्वारा एलोपैथिक दवाओं से इलाज कराना है। एक तरफ जहां बिना फार्मेसिस्ट के कोई भी मेडिकल स्टोर नही खोला जा सकता है, वही दूसरी तरफ गांव मे बिना फार्मेसिस्ट के द्वारा बेचने के लिये PACS समितियों को अधिकृत करना अमलोगो के स्वास्थ्य को खतरें मे डालना है।

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को फॉर्म 20A एवं 21A के अंतर्गत प्रतिबंधित औषधि लाइसेंस प्रदान करने के प्रस्ताव का तीव्र एवं स्पष्ट विरोध दर्ज कराया है। संगठन ने इसे जनस्वास्थ्य, रोगी सुरक्षा तथा राष्ट्रीय औषधि नियंत्रण व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है।


AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने  कहा है कि ,“दवाएं जीवनरक्षक उत्पाद हैं। इन्हें कृषि रसायनों के समान नहीं माना जा सकता। औषधि वितरण केवल प्रशिक्षित एवं पंजीकृत फार्मासिस्ट की निगरानी में ही होना चाहिए। किसी भी प्रकार की शिथिलता जनस्वास्थ्य के साथ जोखिमपूर्ण प्रयोग होगा।”


एआईओसीडी संगठन के अनुसार ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल 1945 ,के नियम 62A एवं 62B ऐतिहासिक रूप से केवल अपवादस्वरूप परिस्थितियों के लिए बनाए गए थे। वर्तमान में देश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर्स एवं पंजीकृत फार्मासिस्ट उपलब्ध हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित लाइसेंस जारी करना न तो आवश्यक है और न ही औचित्यपूर्ण।




AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने  बताया कि, “PACS संस्थाएं मुख्यतः उर्वरक, कीटनाशक एवं कृषि रसायनों का व्यापार करती हैं। ऐसे परिसरों में दवाओं का भंडारण क्रॉस-कंटैमिनेशन और अनुचित स्टोरेज का गंभीर जोखिम पैदा करेगा। यह सीधे तौर पर रोगी सुरक्षा से जुड़ा विषय है।”


संगठन ने यह भी आगाह किया कि गैर-फार्मासिस्ट द्वारा दवा वितरण से एंटीबायोटिक के दुरुपयोग, दवा-त्रुटियों तथा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) जैसी राष्ट्रीय चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।


एआईओसीडी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय  से आग्रह किया है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए तथा ड्रग एवं कॉस्मेटिक एक्ट ,1940 तथा की मूल भावना एवं उद्देश्यों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।


                   AIOCD की प्रमुख मांगें


• PACS को प्रतिबंधित औषधि लाइसेंस देने के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए।

• नियम 62A एवं 62B के अंतर्गत राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कोई सामान्य परामर्श जारी न किया जाए।

• प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी परिसर में एवं पंजीकृत फार्मासिस्ट की निगरानी में संचालित हों।


AIOCD ने स्पष्ट किया है कि संगठन देश के 12.40 लाख से अधिक औषधि विक्रेताओं का प्रतिनिधित्व करता है, जो देश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक सुरक्षित एवं विधिसम्मत औषधि सेवा प्रदान कर रहे हैं।


जारी कर्ता

आनन्द कुमार सिंह – अध्यक्ष

बब्बन यादव – महासचिव

बलिया केमिस्ट एण्ड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, बलिया