Breaking News

नागपुर में बलिया की विदुषी डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान, जनपद में हर्ष

 





डॉ सुनील कुमार ओझा


बलिया।। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक जनपद बलिया की प्रख्यात साहित्यकार, समीक्षक एवं चिंतक डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित वामा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026 में विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किए जाने पर जनपद में हर्ष और गौरव का वातावरण व्याप्त है। हिंदी साहित्य तथा स्त्री-विमर्श के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय बौद्धिक योगदान को देखते हुए उन्हें यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।

नागपुर में आयोजित इस भव्य साहित्यिक आयोजन में देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों, शिक्षाविदों और चिंतकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित संगोष्ठी में डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ ने “स्त्री-विमर्श : परंपरा और समकालीन संदर्भ” विषय पर अपना विद्वत्तापूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किया। उनके विचारों की गहराई, तार्किकता और साहित्यिक दृष्टि ने उपस्थित विद्वानों को अत्यंत प्रभावित किया। उनका व्याख्यान कार्यक्रम के प्रमुख बौद्धिक आकर्षणों में शामिल रहा।

डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ हिंदी साहित्य की मर्मज्ञ विदुषी, चर्चित समीक्षक तथा कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की लेखिका हैं। साहित्य, संस्कृति, समाज और नारी अस्मिता से जुड़े विषयों पर उनका लेखन गंभीर चिंतन और व्यापक अध्ययन का परिचायक माना जाता है। राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर वे अपने शोधपरक व्याख्यानों और लेखन के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध करती रही हैं, जिसके लिए उन्हें समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जाता रहा है।

समारोह में पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ. जनक पलटा मगिलिगन, पद्मश्री शमशाद बेगम तथा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री कीर्ति काले सहित कई विशिष्ट हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इन प्रतिष्ठित अतिथियों के बीच डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ को सम्मानित किया जाना हिंदी साहित्य जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।

डॉ. रिंकी की इस उपलब्धि पर बलिया के साहित्यिक और बौद्धिक समुदाय में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय, चिंतक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, कवि शिवजी पाण्डेय ‘रसराज’, विद्वान डॉ. सुनील ओझा, साहित्यकार डॉ. नंद जी नंदा तथा शिक्षाविद् डॉ. गणेश पाठक सहित अनेक साहित्यप्रेमियों ने उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। साहित्य जगत का मानना है कि यह सम्मान न केवल उनकी प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि बलिया की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का भी गौरवपूर्ण विस्तार है।