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स्वर्णप्राशन संस्कार से बच्चों की बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता : डॉ. अनामिका द्विवेदी

 





 

वाराणसी।। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए संतुलित आहार अत्यंत आवश्यक है। यदि इनके खानपान में लापरवाही या कमी हो जाए तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, जिससे वे संक्रमण जनित बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में आयुर्वेद में वर्णित स्वर्णप्राशन संस्कार बच्चों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।

आयुर्वेदाचार्या डॉ. अनामिका द्विवेदी ने बताया कि स्वर्णप्राशन प्रक्रिया में बच्चों को शुद्ध स्वर्ण भस्म, मधु और घृत के विशेष मिश्रण का सेवन कराया जाता है। इससे बच्चों में विभिन्न रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है और उनके शारीरिक व मानसिक विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक संदर्भ में इसे आयुर्वेदिक प्रतिरक्षण के रूप में भी देखा जा सकता है। यह संस्कार जन्म से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों को दिया जा सकता है।

                   स्वर्णप्राशन के प्रमुख लाभ

आयुर्वेद में वर्णित इस संस्कार के कई लाभ बताए गए हैं, जो बच्चों को स्वस्थ, ऊर्जावान और बलवान बनाने में सहायक होते हैं। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे वे बार-बार संक्रमण से बीमार नहीं पड़ते। शारीरिक और मानसिक विकास में तेजी आती है।

नियमित सेवन से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है। बुद्धि, बल, स्वास्थ्य और पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में सहायक होता है। शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है और त्वचा की गुणवत्ता में सुधार करता है। भूख कम लगने और पाचन से जुड़ी समस्याओं में भी लाभ मिलता है।

               परहेज और सावधानियां

स्वर्णप्राशन के दौरान बच्चों को तली-भुनी चीजें, मैदे से बने खाद्य पदार्थ और जंक फूड देने से बचना चाहिए।डॉ. अनामिका द्विवेदी ने सलाह दी कि स्वर्णप्राशन हमेशा किसी पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही कराया जाए। चिकित्सक द्वारा बच्चे के स्वास्थ्य की जांच कर उसकी लंबाई, वजन और खानपान से संबंधित विवरण दर्ज करने के बाद ही यह औषधि दी जाती है। भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के वाराणसी जिलाध्यक्ष पंकज झा ने डॉ अनामिका द्विवेदी के इस महत्वपूर्ण जानकारी को कलमबद्ध करते हुए समाज के लिए उपयोगी बताया तो प्रयागराज से भारतीय राष्ट्रीय संघ के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ प्रभारी रवीन्द्र कुशवाहा ने बताया कि पंकज झा द्वारा कलमबद्ध इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जानकारी से भारत के सभी माता- पिता को अपने संतान को स्वस्थ रखने में मदद मिलेगी।