पत्नी, पिता, पट्टीदारों व ससुरालियों का मारा,एसएसबी का जवान बेचारा, मुख्यमंत्री से लगायी गुहार, बचा लो सरकार
बलिया।। एक तरफ कहा जाता है कि महिलाओं को पुरुष समाज द्वारा प्रताड़ित किया जाता है, इससे सुरक्षा के लिये महिलाओं को कानूनी संरक्षण भी प्राप्त है। दूसरी तरफ अगर महिला ही प्रताड़ित करने पर उतर जाय, जिसमे मायके पक्ष और ससुराल के पट्टीदारों का सह मिल जाये तो पीड़ित पुरुष की जिंदगी नर्क बन जाती है और वह जिला स्तरीय अधिकारियों से लगायत मुख्यमंत्री तक बस गुहार लगाने को और जान बचाने के लिये विनती करने के लिये मजबूर हो जाता है। तब पीड़ित की जिंदगी और दुरूह हो जाती है जब विरोधियों मे से एक उत्तरप्रदेश पुलिस के उच्चाधिकारी का वाहन चालक हो, जिसके दबाव मे स्थानीय पुलिस फर्जी मुकदमा दर्ज करने का रिकॉर्ड बनाने पर तुली हो।यह सब विनोद कुमार यादव (एस०एस०बी० हेड कांस्टेबल) ग्वालदम जिला-चमोली (उत्तराखण्ड) पुत्र उमाशंकर यादव सा0-टघरौली थाना बांसडीह रोड , बलिया के साथ घटित हो रहा है। यह जवान बॉर्डर पर तो देश की सुरक्षा करता है लेकिन अपने घर अपनी ही सुरक्षा के लिये अधिकारियों के आगे विनती करता हुआ फिर रहा है।आज दिनांक 11 मार्च 2026 को एसपी बलिया के समक्ष प्रस्तुत होकर दिनांक 8 मार्च 2026 को प्रार्थी के साथ मारपीट गाली गलौज करने वाले -संतोष यादव, मनोज यादव(चालक यूपीपी वाराणसी )पुत्रगण रमाशंकर यादव, आर्यन व अनुभव यादव पुत्रगण मनोज यादव, रमाशंकर यादव पुत्र स्व राम चंदर यादव के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही करने की गुहार लगायी है।
पत्नी के आतंक से घर भी नही आता है पीड़ित जवान, आते ही दर्ज हो जाता है मुकदमा
एसएसबी जवान विनोद कुमार यादव की जिंदगी केवल सरकारी दायित्वों के निर्वहन के समय ही खतरें मे नही रहती है बल्कि घर आने पर सीमा से अधिक खतरे मे हो जाती है। विनोद यादव जब भी अरुणाँचल से छुट्टी लेकर घर आते है, इनके ऊपर पत्नी, उसके मायके वाले और विनोद के पट्टीदारों द्वारा षड़यंत्र करके स्थानीय बांसडीह रोड थाने पर मनोज यादव चालक द्वारा दबाव डालकर परेशान कराया जाता था ।पत्नी व ससुरालियों की मानसिक प्रताड़ना से अजीज होकर जब प्रार्थी ने 4.3.2020 को अपनी पत्नी इंदु देवी से तलाक का मुकदमा माननीय न्यायालय मे दाखिल किया तो प्रताड़ना का दौर और तेज हो गया।आरोप लगाया है कि तलाक का मुकदमा दर्ज कराने के बाद जब विनोद यादव छुट्टी लेकर चमोली से दिनांक 13.8.2020 को अपने घर टघरौली थाना बांसडीह रोड जनपद बलिया आया तो उसके ऊपर इसकी पत्नी इंदु देवी ने साजिश करके प्रार्थी के पट्टीदारों रमाशंकर यादव, संतोष यादव, अंगद यादव सुधीर यादव आदि को बुलाकर लाठी डंडे से पिटाई भी करवाई और पीड़ित के खिलाफ ही मुकदमा भी दर्ज मनोज यादव के सहयोग से दर्ज करा दिया गया।
यही नही विनोद ने यह भी लिखित आरोप लगाया है कि जब उसके बाबा राम चंदर यादव की मृत्यु की सूचना पर 2 मई 2021 को घर आया तो पता चला कि उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है। साथ ही 17 मई 2021 को मेरे बाबा से एक रजिस्ट्री कराने के आधार पर खतौनी पर अपना नाम दर्ज करा ली है। साथ ही यह भी पता चला कि मेरी पत्नी इंदु देवी जिसके साथ तलाक का मुकदमा चल रहा है, ने प्रार्थी के पिता उमाशंकर यादव पुत्र स्व राम चंदर यादव से 11.8.2021 को एक वसीयत करा ली है कि मेरी मौत के बाद मेरी सारी चल अचल संपत्ति की मालिक होंगी। जबकि उमाशंकर यादव की पत्नी जियछी देवी जिंदा है और अपने पुत्र के साथ चमोली रहती है।
नौकरी मे परेशानी खड़ी करने के लिये की गयी फर्जी शिकायतें
पीड़ित विनोद यादव ने लिखित रूप से शिकायत की है कि उसके पिता व पत्नी दोनों ने घर पर जिंदगी हराम करने के बाद सर्विस भी प्रभावित करने के लिये प्रार्थी के उप सेना नायक महोदय "F Coy 67th Bn. SSB लूमला तवांग अरुणाँचल प्रदेश, को फर्जी शिकायती पत्र भेजा है।
कहा है कि दिनांक 18.9.2020 को मेरे पिता उमाशंकर यादव पुत्र राम चंदर यादव ने शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया कि मेरे पुत्र विनोद यादव ने पहली पत्नी इंदु देवी के रहते दूसरी शादी प्रियंका यादव नामक युवती से शादी करके बलिया शहर मे किराये के मकान मे रहता है।
इस शिकायती पत्र के ठीक तीन दिन बाद मेरी पत्नी इंदु देवी ने भी हमारी कंपनी मे 21.9.2020 को भेजकर मेरे पिता जी द्वारा 18.9.2020 को भेजें गये पत्र की तरह ही प्रियंका नामक युवती से शादी करने की झूठी शिकायत की गयी। उपरोक्त दोनों लोगों ने आरोप लगाया है कि वो लोग घर की बजाय तीन शेड मे जीवन किसी तरह से गुजार रहे है।
जबकि विनोद यादव का कहना है कि उसकी मकान मे पांच कमरें है जिसको मैंने ही बनवाया है, बाहर का बरामदा मेरे बड़े पिताजी बनवाये है। यह आरोप सरासर गलत है कि ये लोग टिन शेड मे रहते है। आज भी ये लोग मेरी ही मकान मे रहते हुए मुझे और मेरी मां को चल अचल संपत्ति से बेदखल करने का षड़यंत्र रच रहे है।
बिनोद यादव ने यह भी कहा है कि इन दोनों उपरोक्त शिकायतों की विभागीय जांच हुई और यह रिपोर्ट लगी है कि आरोप निराधार है, विनोद यादव ने कोई दूसरी शादी नही की है।
जो दो माह पहले भूखे मर रही थी, उसने दो माह बाद करा ली 5 लाख मे जमीन रजिस्ट्री
विनोद यादव ने सवाल उठाया है कि उसकी कम्पनी को भेजें गये शिकायती पत्र दिनांक 21.9.2020 को जो इंदु देवी भूखों मर रही थी, उसने मात्र दो माह बाद 23.11.2020 को मेरे बाबा राम चंदर यादव से मेरी बड़ी मां कमलावती देवी के साथ मिलकर 10 लाख मे जमीन रजिस्ट्री कैसे करा ली? यह भी सोचने वाली बात है कि बाबा अपने पोते की जगह ऐसी पुत्र बधु को जिसके साथ तलाक का मुकदमा चल रहा है, को जमीन रजिस्ट्री क्यों करेगा।
वसीयत पर उठाया सवाल
विनोद यादव ने अपने पिता द्वारा इंदु देवी के नाम अपनी सारी चल अचल संपत्ति की वसीयत करने पर भी सवाल उठाया है। श्री यादव ने कहा है कि मेरी मां के जिंदा रहते, उनके हक को दूसरी औरत के नाम करने का मेरे पिता जी को वसीयत करने का कोई अधिकार नही है। अगर इनको वसीयत करनी ही थी तो मेरी जीवित दादी,मां, मेरे बच्चों के नाम करते जो अब बालिग़ हो चुके है। मेरे पिता को पैतृक संपत्ति को वसीयत करने का कोई कानूनी अधिकार ही नही है। इससे मेरी मां, मेरे और मेरे बच्चों के अधिकारों का अपहरण हुआ है।
घर आने पर सुरक्षा की विनोद ने की मांग, फिर भी हो गया हमला
विनोद यादव ने अपने उच्चाधिकारीयों को लिखित आवेदन करके अपने 21 दिन के अवकाश (17 फरवरी 2026 से ) के दौरान पैतृक घर जनपद बलिया मे रहते हुए जान माल की सुरक्षा की मांग की है। कहा कि प्रार्थी का परिवार न्यायालय मे चल रहे मुक़दमे की पैरवी के दौरान या घर से आते जाते या घर पर, विपक्षीयों से खतरा है, ऐसे मे सुरक्षा प्रदान किया जाय।
SSB मुख्यालय से पुलिस अधीक्षक बलिया को 23.1.26 को एक पत्र भेजा गया और मुख्य आरक्षी विनोद यादव को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया। विनोद यादव का आरोप है कि बांसडीह रोड थाना पुलिस ने मुझको दो दिन सुरक्षा प्रदान कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली, जिसके परिणाम स्वरुप मेरे ऊपर 8 मार्च 2026 को हमला हो गया। इसकी लिखित तहरीर थाने पर देने के बाद भी मुकदमा दर्ज नही किया गया और न ही मुझे सुरक्षा ही दी जा रही है।
इस संबंध मे जब थानाध्यक्ष बांसडीह रोड से बात की गयी तो उनका कहना था कि सुरक्षा देने के लिये गाइड लाइन है जिसके तहत ट्रेजरी मे शुल्क जमा करना होता है। मारपीट के संबंध मे बताया कि जांच करा रहा हूं, जो भी आवश्यक वैधानिक कार्यवाही जरुरी होंगी, की जायेगी।







