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पत्रकार को उभाँव थाने के दिवान के माध्यम से मिला संदेश :साहब मुकदमा भी करते है



अभयेश मिश्रा

बिल्थरारोड बलिया।। जनपद के उभाँव थाना से कोई सूचना हासिल करने के लिये पत्रकार क़ी आईडी या कैमरा जरुरी नही है बल्कि यहां पत्रकार को एक हाथ मे कैमरा और दूसरे हाथ मे अपना शैक्षणिक प्रमाण पत्र लेकर थाना परिसर मे जाना पड़ेगा, तब कोई भी सूचना देने के संबंध मे स्थानीय पुलिस सोच सकती है। अन्यथा क़ी स्थिति मे पत्रकार पर मुकदमा लिखने मे देर नही हो सकती है।उभांव थाना अंतर्गत लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर स्थानीय पुलिस द्वारा सूचना मांगने पर जबाब न देकर उल्टे दबाव बनाने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ज्ञात हो कि एक घटना को लेकर जब एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार ने उभांव थाने पर तैनात दरोगा से जानकारी लेनी चाही, तो सवाल का जवाब देने के बजाय दरोगा साहब को पत्रकार की डिग्री और पढ़ाई ज्यादा महत्वपूर्ण लगने लगी।घटना की जानकारी देने से इनकार करना और उल्टे पत्रकार की शैक्षणिक योग्यता पूछना न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। नियमों के अनुसार किसी भी पुलिसकर्मी को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी पत्रकार से फोन पर उसकी डिग्री या पढ़ाई के संबंध में सवाल करे। ऐसी जानकारी लेने का अधिकार केवल सूचना विभाग को है।

मामला यहीं नहीं रुका। जब पत्रकार धीरज गुप्ता ने इस व्यवहार की शिकायत उच्चाधिकारियों से की, तो कथित तौर पर थाने के साहब की ओर से एक दीवान के माध्यम से फोन कर यह संदेश भिजवाया गया कि “साहब मुकदमा भी करते हैं।”इस कथन को पत्रकारों को डराने और दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।जब इस पूरे प्रकरण पर उभांव इंस्पेक्टर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “हम नए हैं, आपको जानते नहीं हैं।” लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी पत्रकार को जानना-पहचानना सूचना देने की शर्त हो सकता है?। उच्चाधिकारी द्वारा सीओ रसड़ा को जांच मिलने के 24 घंटे बाद भी अभी कोई पहल नहीं किया गया है।क्या अब खबर से संबंधित जानकारी लेने के लिये शैक्षणिक प्रणाम पत्र कैमरा क़ी जगह पत्रकारों को लेकर चलना पड़ेगा।