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कड़ाके की ठंड ने ली बेजुबान की जान, बच्चों की मानवता ने छू लिया दिल

 






चौबेबेल गांव से मार्मिक खबर

डॉ सुनील कुमार ओझा

बलिया।। कड़ाके की ठंड के चलते चौबेबेल गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई। ठंड और आपसी संघर्ष के कारण एक बंदर पेड़ से नीचे गिर पड़ा। गिरने के बाद कुछ अन्य बंदर उसे मारने लगे, जिससे उसकी हालत और गंभीर हो गई। इसी बीच गांव के बच्चों ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए बंदरों के बीच से उस घायल बंदर को बचाया।

गिरने के कारण बंदर का हाथ टूट गया था और वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया था। बच्चों ने पूरी मेहनत और संवेदनशीलता के साथ उसकी जान बचाने का प्रयास किया। उसके सिर पर तेल की मालिश की गई, गर्म पानी पिलाया गया, आग जलाकर उसे तपन दी गई, ताकि ठंड से राहत मिल सके।

हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद आखिरकार बंदर ने दम तोड़ दिया। मेहनत के बाद भी जब बंदर को नहीं बचाया जा सका तो बच्चों की आंखें नम हो गईं और पूरे गांव में शोक का माहौल छा गया।

इस मानवीय प्रयास में हाले ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इनका मनी भरपूर सहयोग किए जबकि शुभम, अनुज, आदेश, सूरज, भोलू, दीवान जी, विक्रम, हरि ओम और बाबू राम ने हिम्मत और करुणा के साथ बेजुबान की मदद की। इन बच्चों और ग्रामीणों का यह प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणा है कि आज भी इंसान के दिल में जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम और संवेदना जीवित है।

यह दर्दनाक घटना जहां कड़ाके की ठंड की भयावहता को दर्शाती है, वहीं बच्चों की मानवता समाज को यह संदेश देती है कि बेजुबानों के प्रति प्रेम और करुणा ही सच्ची इंसानियत है।