86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले सीएम योगी -विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई, विधायिका के मंच पर न्याय प्रदान करने वाले कानून का होता है निर्माण
मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उ0प्र0 में लोकतांत्रिक मूल्य मजबूत हुए, राज्य में सुशासन, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और ठोस कानून-व्यवस्था से बुनियादी ढांचे का निर्माण हुआ : लोक सभा अध्यक्ष
86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में 06 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करने का अभिनन्दनीय कार्य हुआ
सम्मेलन में वर्ष में सदन की कम से कम 30 सीटिंग की व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों को टेक्नोलॉजी से अपडेट करते हुये उनके उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था हेतु प्रस्ताव पारित
विकसित भारत विकसित उत्तर प्रदेश के सम्बन्ध में 98 लाख प्रस्ताव प्राप्त हुये,उ0प्र0 विधान सभा तथा विधान परिषद में ई-विधान लागू
लखनऊ।।लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज यहाँ विधान सभा में देश के विधायी निकायों के 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर राज्य सभा के उप सभापति श्री हरिवंश, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह तथा विधान सभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना भी उपस्थित थे।
लोक सभा अध्यक्ष ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्य मजबूत हुए हैं। राज्य में सुशासन, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और ठोस कानून-व्यवस्था से बुनियादी ढांचे का निर्माण हुआ है तथा प्रदेश में निवेश की गति बढ़ी है। मुख्यमंत्री जी का मार्गदर्शन हमें नई दिशा तथा नए दृष्टिकोण के साथ नए संकल्प की ओर प्रशस्त करेगा। इस सम्मेलन में हुई सार्थक चर्चा व संवाद के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत, जवाबदेह, उत्तरदायी तथा पारदर्शी बनाने के लिए विचार प्राप्त हुए हैं।
इस सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया है कि हमारी सभी विधायी संस्थाएं आने वाले समय में विकसित भारत के संकल्प के साथ अपने राज्य को विकसित राज्य बनाने लिए चर्चा व संवाद स्थापित करें। उत्तर प्रदेश विधानसभा ने विकसित उत्तर प्रदेश@2047 विजन पर लगातार 36 घण्टों तक सार्थक चर्चा की है। राज्य के विधान मण्डल ही एक मात्र जगह है, जहां अन्तिम व्यक्ति की आवाज सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचती है। वह व्यक्ति मतदान करने के बाद यह अपेक्षा करता है कि अगले 05 वर्ष तक उनके द्वारा चुना हुआ विधायक सदन में उनकी समस्याओं एवं चुनौतियों को रखेगा और उन समस्याओं का समाधान भी होगा।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरह न्यायालय में लोगों का विश्वास रहता है कि न्यायालय में उनकी बात अवश्य सुनी जाएगी। इसी प्रकार यदि राज्य विधान मण्डल में सकारात्मक दृष्टिकोण तथा सकारात्मक दिशा में जनप्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे, तो निश्चित ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे। विधान सभाओं को पारदर्शी तथा जवाबदेह बनाने के लिए प्रौद्योगिकी, ए0आई0 टेक्नोलॉजी की ओर बढ़े हैं। आज सभी राज्य की विधान सभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं तथा पुरानी डिबेट्स, चर्चाएं, संवाद, मुद्दे, बजट आदि को डिजिटाइज किया गया है।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद भी राज्य की विधान सभाओं के साथ मिलकर काम कर रही है। विधायकों द्वारा की गयी सार्थक चर्चा एवं संवाद से विधायिकाएं जवाबदेह होंगी तथा शासन-प्रशासन की निगरानी ठीक से की जा सकेगी। सदन का हर समय कीमती है। सदन चर्चा, संवाद के लिए है, गतिरोध के लिए नहीं। विरोध का प्रदर्शन सदन के बाहर राजनीतिक दृष्टि से करें, लेकिन सदन को चर्चा व संवाद का मंच बनाएं, ताकि सार्थक परिणाम मिल सकें और जनता की विश्वसनीयता सदन के प्रति बनी रहे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई है। भारत के संविधान के संरक्षक के रूप में यह अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुये देश में न केवल विधायी कार्यों के लिये रूपरेखा तैयार करती है, बल्कि यह समग्र विकास की कार्ययोजना का मंच भी होती है। विधायिका के मंच पर न्याय प्रदान करने वाले कानून का निर्माण होता है। न्याय, समता और बन्धुता संविधान के यह तीन शब्द भारत के लोकतंत्र की आत्मा के रूप में कार्य करते हैं।
हमारी विधायिका का मंच समतामूलक समाज की स्थापना में योगदान देने वाली सरकार की योजनाओं से सम्बन्धित कार्ययोजना का स्थल बनता है। सहमति-असहमति के बीच समन्वय करते हुये बेहतरीन संवाद के माध्यम से विधायिका बन्धुता का उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। हमारे देश में लोकतंत्र की यह सर्वोच्च संस्था अत्यन्त मजबूत है। यह दुनिया के लिये एक नयी प्रेरणा है। सर्वोच्च सदन में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अन्तिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज को रखा जाता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें 05 बार लोक सभा सदस्य होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सामाजिक जीवन में सरकार की गतिविधियों, सदस्यों का आपसी व्यवहार और नियमों के अन्तर्गत कार्यक्रमों को कैसे आगे बढ़ाया जाता है, इस दौरान सीखने का अवसर प्राप्त हुआ। यदि कोई भी विधान सभा या विधान परिषद केवल संसद के नियमों व परिनियमों का अवलोकन कर ले या प्रशिक्षण प्राप्त कर ले, तो उसके संचालन में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2022 में विधान सभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना जी से कहा कि सदन के क्वेशचन आवर में 20 तारांकित प्रश्नों का प्राविधान है, जबकि इस दौरान दो से तीन सदस्य ही बोल पाते हैं। क्या यह हो सकता है कि हम इसको संसद की तर्ज पर आगे बढ़ायें। संसद से प्रेरणा प्राप्त कर विधान सभा अध्यक्ष ने तत्काल कार्यवाही करते हुये नियमावली में परिवर्तन किये। परिणामस्वरूप अब यहां सवा घण्टे में बीस तारांकित प्रश्न तथा प्रत्येक तारांकित प्रश्न के साथ दो-तीन अनुपूरक प्रश्न भी पूछे जाते हैं। प्रश्नकर्ता तथा मंत्री दोनों सन्तुष्ट होते हैं। सदन में अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों की सहभागिता देखने को मिलती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नियमों तथा परिनियमों के निर्माण में संसद आधार बन सकती है। संसद के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव रखना प्रत्येक भारतवासी का दायित्व बनता है। जैसा कि प्रधानमंत्री जी बार-बार कहते हैं कि भारत दुनिया के लोकतंत्र की जननी है। हमारे यहाँ त्रिस्तरीय पंचायत की व्यवस्था बाद में लागू की गयी, लेकिन गाँवों के सरपंच और पंचों की व्यवस्था प्राचीन काल से चली आ रही है। हम लोगों ने इस व्यवस्था को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। हमारे गाँवों ने ग्राम स्वराज की परिकल्पना को साकार किया है।
देश में रूप-रंग, वेश-भूषा अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन भारत सभी दिशाओं में एक भाव व भंगिमा के साथ बोलता तथा सोचता है। सम्पूर्ण देश की भावना व आस्था भी एक है। संसद इस आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। यदि हम संसद के इस भाव से जुड़ते हुये उसे आदर्श के रूप में आगे बढ़ायेंगे, तो हमारी विधायिका और अधिक सशक्त व मजबूत बनेगी।
इस 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में 06 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करने का अभिनन्दनीय कार्य हुआ है। प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों को देश की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में आगामी 25 वर्षों की कार्य योजना बनाने के लिये कहा। विकसित भारत@2047 की परिकल्पना को आज यहां पारित करते हुए एक संकल्प के साथ हम आगे बढ़े हैं। लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा उप सभापति, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति ने विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश पर चली लम्बी डिबेट की यहां चर्चा की है।
विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश पर लगातार 24 घण्टे चलने वाली बहस में विधान सभा के 300 से अधिक सदस्यों ने प्रतिभाग किया था। सदस्यों में बोलने की होड़ लगी थी। इस परिचर्चा से विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश से सम्बन्धित महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। इस परिचर्चा के पश्चात विजन डॉक्युमेण्ट तैयार करने तथा इसमें जनता के सुझाव सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि युवाओं, किसानों, उद्यमियों, व्यापारियों, महिला स्वयंसेवी समूहों को इस मुद्दे से परिचित करने हेतु जनप्रतिनिधियों के साथ ही, प्रदेश के रिटायर्ड चीफ सेक्रेटरी, एडीशनल चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, रिटायर्ड कुलपतिगण आदि 500 से अधिक इन्टेलेक्चुअल को फील्ड में उतारा गया। लोगों के सुझाव प्राप्त करने हेतु एक पोर्टल का निर्माण किया गया। विकसित भारत विकसित उत्तर प्रदेश के सम्बन्ध में 98 लाख प्रस्ताव प्राप्त हुये थे। आई0आई0टी0 कानपुर के साथ मिलकर इन सुझावों को विजन डॉक्युमेण्ट का हिस्सा बनाने की दिशा में कार्य चल रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब हम किसी सदस्य के अनुभव का लाभ इस सदन के माध्यम से प्राप्त करते हैं, तो वह हमारे लिए बहुत प्रभावी व महत्वपूर्ण होता है। विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करना केवल भारत सरकार व प्रधानमंत्री जी का ही काम नहीं है, बल्कि हम भी इस अभियान के सारथी व सिपाही बन सकते हैं। इस सम्मेलन में इस प्रस्ताव को पारित करते हुए प्रभावी ढंग से इसे आगे बढ़ाने के लक्ष्य के साथ, विकसित भारत की संकल्पना को साकार बनाने की दिशा में किये गये प्रयासों को एक सार्थक गति प्रदान की गयी है।
इस सम्मेलन में वर्ष में सदन की कम से कम 30 सीटिंग की व्यवस्था का प्रस्ताव भी पारित हुआ है। यह प्रस्ताव केवल संसद या विधान सभा के लिये नहीं है, बल्कि अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं जैसे नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों तथा क्षेत्र पंचायतों के लिये भी अनुकरणीय है। प्रदेश में सदन की कार्यवाही सुचारु व अच्छे ढंग से चलती है। संसद में लंच आवर की व्यवस्था है, लेकिन हमारे यहां लंच आवर नहीं होता है। सदन पूर्वाह्न 11 बजे प्रारम्भ होकर कभी-कभी 10 बजे रात्रि तक चलता रहता है। आवश्यकता पड़ने पर सदस्यगण कैण्टीन में भोजन ग्रहण करते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यहां जनप्रतिनिधियों को टेक्नोलॉजी से अपडेट करते हुये उनके उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था हेतु प्रस्ताव पारित हुआ है। हम स्वयं को टेक्नोलॉजी से दूर नहीं रख सकते। जब पार्लियामेन्ट में कहा गया कि राज्यां में भी ई-विधान होना आवश्यक है, उत्तर प्रदेश विधान सभा तथा विधान परिषद में ई-विधान लागू किया गया। अब प्रदेश में पेपरलेस कैबिनेट तथा पेपरलेस बजट आदि की व्यवस्था की जा चुकी है। सभी सदस्य आसानी से इस प्रक्रिया के साथ जुड़ते हैं। ई-विधान के माध्यम से कागज की बचत, प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण सम्भव हुआ है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधान सभा देश से जुड़े हुये ज्वलंत मुद्दों से सम्बन्धित चर्चा-परिचर्चा को अनवरत आगे बढ़ाती है। यहाँ सस्टेनेबल डेवलपमेन्ट गोल से सम्बन्धित लगातार 37-38 घण्टे तक परिचर्चा हुयी थी। लक्ष्य निर्धारित करते हुये मंत्रिमण्डल तथा अलग-अलग विभागों के चीफ सेक्रेटरी के स्तर पर कमेटियां गठित की गयीं। यह सभी कमेटियां सस्टेनेबल डेवलपमेण्ट गोल को प्राप्त करने की दिशा में अनवरत कार्य कर रही हैं। सदन में संविधान दिवस पर मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मूल कर्तव्यों पर भी अनवरत चर्चा की गयी है। यह चर्चा केवल सदन तक सीमित नहीं रहती। विधायकों से कहा जाता है कि इसी प्रकार की चर्चा वह अपनी विधान सभा क्षेत्र में भी कराएँ।
राज्य सभा के उप सभापति श्री हरिवंश ने कहा कि तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। उनके अनुभव, पहल व इनोवेशन से बहुत कुछ सीखने को मिला है। मुख्यमंत्री जी की उपस्थिति ने सभी को ऊर्जा व प्रेरणा दी है। राज्य की जी0डी0पी0, प्रति व्यक्ति आय, बजट आकार में बढ़ोत्तरी, निर्यात में वृद्धि, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रगति तथा सर्वांगीण प्रगति के आधार पर नीति आयोग ने उत्तर प्रदेश को फ्रण्ट रनर कहा है। उत्तर प्रदेश आज बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में उभरता हुआ राज्य है। यह एक समय बीमारू राज्य था, जो आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट है। यह प्रदेश की बड़ी उपलब्धि है।
आज दुनिया की जियोपॉलिटिकल सिचुएशन में यदि कोई देश या मुल्क बड़ी आर्थिक, सामरिक, टेक ताकत तथा टेक्नोलॉजिकल पावर नहीं है, तो यह उसके लिए गम्भीर समस्या है। वर्ष 2014 के बाद भारत तेजी के साथ प्रगति के पथ पर अग्रसर हुआ है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विज़न के अनुरूप आज उत्तर प्रदेश अपनी नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश ‘विकसित उत्तर प्रदेश@2047’ विज़न डॉक्युमेण्ट पर काम कर रहा है।
राज्य सभा के उप सभापति ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से वर्ष 2025 के बीच किये गये सुनियोजित प्रयासों से 06 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश को 01 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का है। साथ ही अगले 05 साल में राज्य की ग्रोथ रेट 20 प्रतिशत करने तथा वर्ष 2047 तक इसे 06 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। यदि हम इस रास्ते पर तेजी से बढ़े, तो भारत की आर्थिक ताकत बहुत अधिक हो जाएगी। इस रूप में मुख्यमंत्री जी का विज़न ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ का है। उत्तर प्रदेश औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है।
उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष श्री सतीश महाना ने अपने सम्बोधन में कहा कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत स्तम्भ है। संविधान ने जनता के बीच से चुनकर आए व्यक्ति को जनता की जिम्मेदारी सौंपने के लिए 05 वर्ष तक की सीमा तय की है। लोक कल्याण, लोक संवर्धन तथा लोक हित की बात करना, प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है। जनता के बीच हो रहे अच्छे कार्यों का श्रेय भी उन्हें मिलता है।
विधायिका के पीठासीन अधिकारियों के इस सम्मेलन की शुरूआत वर्ष 1921 में हुई। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में बहुत महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं तथा सभी पीठासीन अधिकारियों ने अपने उद्बोधन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। लोकतंत्र में सहमति-असहमति इसका खूबसूरत पक्ष है। इसी सहमति-असहमति में से जन कल्याण की योजनाएं बनती है। विगत 04 वर्षों में उत्तर प्रदेश विधान सभा केवल दो बार स्थगित हुई। सरकार पूरी प्रतिबद्धता से जनता के कल्याण के लिए प्रभावी ढंग से योजनाओं को लागू कर विधान सभा में उनका उल्लेख करती है। विपक्ष की ओर से सकारात्मक सुझाव प्राप्त होते हैं तथा कभी-कभी आलोचना भी होती है। राजनीतिक क्षेत्र में सभी का अपना एजेण्डा है, लेकिन लक्ष्य केवल जन कल्याण है। इसी जन कल्याण के दृष्टिगत यहां प्रभावी चर्चा हुई है।
विधान परिषद के सभापति श्री कुँवर मानवेन्द्र सिंह ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के सम्मेलन की मेजबानी का अवसर हमें मिला है। सम्मेलन के दौरान हमने विधायी संस्थाओं के समक्ष उपस्थित समकालीन चुनौतियों, सदन की कार्यवाही की गरिमा, संसदीय अनुशासन, तकनीकी नवाचारों तथा जन अपेक्षाओं के अनुरूप विधायी कार्य को अधिक प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन एवं सार्थक विचार-विमर्श किया। इन चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि पीठासीन अधिकारी केवल सदन के संचालनकर्ता ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षक भी हैं।
मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा से विधान परिषद और विधानसभा में ए0आई0 तकनीक का उपयोग, डिजिटलाइजेशन, सौन्दर्यीकरण सहित कई कार्य सम्भव हुए हैं। विधान मण्डल की कार्यवाहियों का डिजिटलाइजेशन, रिकॉर्डिंग की सुविधा व हाईटेक आर्काइविंग सिस्टम स्थापित करने का कार्य किया जा चुका है। ए0आई0 तकनीक के माध्यम से विधान मण्डल में पुरानी कार्यवाहियों को खोजना आसान हुआ है। ए0आई0 आधारित वेबसाइट, डिजिटल लाइब्रेरी और मोबाइल एप्लीकेशन की सुविधा भी उपलब्ध है।
विधान भवन में ग्राफिक्स मॉनिटर, अत्याधुनिक साउण्ड सिस्टम, इमरजेंसी अनाउंसमेण्ट सिस्टम, सजीव प्रसारण की सुविधा एवं ए0आई0 वीडियो एनालिटिक्स, फायर अलार्म सिस्टम स्थापित किए गए हैं। विधान भवन में डिजिटल गैलरी का निर्माण कराया गया है, जिसके माध्यम से विधान मण्डल के माननीय सदस्यों से सम्बन्धित जानकारी उपलब्ध करायी गई है। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि सदन की गरिमा, भाषा की मर्यादा तथा संसदीय परम्पराओं का पूर्ण सम्मान बना रहे। यह सम्मेलन राज्यों के बीच श्रेष्ठ संसदीय प्रथाओं के आदान-प्रदान का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण बना है।
इस अवसर पर विभिन्न राज्यों की विधान परिषद के सभापति, उपसभापतिगण, राज्य विधान सभाओं के अध्यक्ष, उपाध्यक्षगण तथा अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।







