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राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम एम डी ए अभियान पर जनपद स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण हुआ सम्पन्न : जिले में 10 फरवरी से 28 फ़रवरी 2026 तक चलेगा एमडीए अभियान

 




● कार्यक्रम के तहत घर-घर जाकर खिलाई जाएगी फाइलेरिया से बचाने की दवा  ●स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा अपने सामने खिलाई जाएगी दवा

● हम सब का अब यही हो नारा फाइलेरिया मुक्त हो जिला हमारा

बलिया, 02 जनवरी 2026।।10 फरवरी से चलने वाले राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम एम डी ए अभियान को सफल बनाने के लिए कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभागार मे  मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव के अध्यक्षता में जनपद स्तरीय प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण शुक्रवार को हुआ।यह प्रशिक्षण पाथ संस्था के सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर एन टी डी डॉ. शोएब अनवर एवं डब्लू एच ओ के जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. मंजीत सिंह चौधरी द्वारा दिया गया।

यह प्रशिक्षण जनपद के अर्बन सहित 12 ब्लॉकों के अधीक्षक/ एमओआईसी, बीसीपीएम/ बीपीएम, नोडल वीबीडी को प्रशिक्षित किया गया।

  मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने कहा कि इस बीमारी के दुष्परिणाम कई वर्षों के बाद देखने को मिलते हैं । शुरूआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं और एक संक्रमित व्यक्ति दूसरे स्वस्थ व्यक्ति को बिना कोई बाहरी लक्षण दिखे संक्रमित करता रहता है। 

इस बीमारी से हाथ, पैर, स्तन  और अंडकोष में सूजन पैदा हो जाती है। सूजन के कारण फाइलेरिया प्रभावित अंग भारी हो जाता है और दिव्यांगता जैसी स्थिति बन जाती है । प्रभावित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टदायक एवं कठिन हो जाता है। यह एक लाइलाज बीमारी है | इस बीमारी से बचाव के लिए वर्ष में एक बार दवा खाना जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षण ले रहे सभी प्रतिभागियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने ब्लॉक में विधिवत कार्य योजना बनाते हुए कार्यक्रम को समुचित रूप से संचालित करें। उसका पर्यवेक्षक करें और ससमय रिपोर्ट जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में प्रेषित करें।

वेक्टर बॉर्न के नोडल अधिकारी डॉ.अभिषेक मिश्रा ने कहा कि जनपद में 10 फरवरी से 28 फ़रवरी तक एम डी ए अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान के अन्तर्गत दो वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को छोड़कर सभी को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी ई सी और अल्बेंडाजॉल की निर्धारित खुराक घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मी अपने सामने  खिलायेगे एवं किसी भी स्थिति में दवा का वितरण नहीं किया जायेगा।

 उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे सामान्यता हाथीपाँव के नाम से भी जाना जाता है। पेशाब में सफेद रंग के द्रव्य का जाना जिसे काईलूरिया भी कहते हैं जो फाइलेरिया का ही एक लक्षण है। इसके प्रभाव से पैरों व हाथों में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) और महिलाओं में ब्रेस्ट में सूजन की समस्या आती है। फाइलेरिया होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है।

जिला मलेरिया अधिकारी श्री राजीव त्रिपाठी ने कहा कि  सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। अगर किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक है कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के कीटाणु मौजूद हैं, जो की दवा खाने के बाद कीटाणुओं के मरने के कारण उत्पन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि साल में केवल एक बार फाइलेरिया रोधी दवा खाने से फाइलेरिया के संक्रमण से बचा जा सकता है।

वेक्टर बॉर्न के नोडल अधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि 10 फरवरी से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम जब आपके घर पर जाये तो आप उनके सामने ही फाइलेरिया रोधी दवाओ ( डी.ई.सी और एल्बेंडाजॉल) का सेवन करें और जनपद को फाइलेरिया मुक्त बनाने में अपना अमूल्य योगदान दे। उन्होंने स्लोगन के द्वारा कहा कि आओ हम संकल्प करें फाइलेरिया को जड़ से दूर करें।इस प्रशिक्षण में मलेरिया/ फाइलेरिया विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी,पाथ, पीसीआई और सी-फार संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।