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भ्रष्टाचार से नहीं बचा है कोई ऑफिस,जहाँ रिश्वत का तिरंगा ना लहरा रहा हो, इसके बाद भी आंख में सुरमा लगी है, एक दूसरे को छीनरा कहने क़ी पड़ गयी है आदत : राम इक़बाल सिंह

 





बलिया।। बीजेपी नेता और पूर्व विधायक राम इक़बाल सिंह ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से सनसनी फैला दी है। इन्होने अपनी पोस्ट मे भ्रष्टाचार से लेकर माफिया तक, घूसखोरी से लेकर वोट चोरी तक, रूपये साड़ी शराब से वोट बेचने तक की घटनाओ का उल्लेख किया है। श्री सिंह का यह पोस्ट वर्तमान राजनीति, राजनेता और नौकरशाहों को जहां बेनक़ाब किया है, वही देश की जनता किस दुर्दशा मे जीवन यापन कर रही है, उसको भी अपने शब्दों के माध्यम से उकेरा है। श्री सिंह का पोस्ट उनकी अपनी भाषा मे है, इस लिये इसको बिना संपादित किये ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर रहा हूं, अशुद्ध शब्दों के लिये बलिया एक्सप्रेस जिम्मेदार नही है। पढ़िए श्री सिंह का पूरा पोस्ट........

कोई पार्टी बची नहीं जो कफ, सिरप के खेलाड़ियों के खेल में बैटिंग ना क़ी हो, हजारों बच्चों क़ी जिंदगी और हजारों करोड़ के खेल में कोई सीरियस नहीं है, इतना बड़ा जानलेवा धंधा विना राजनितिक और प्रशासनिक संरक्षण के  हो नहीं सकता, यह कार्य आज थोड़े ही रहा है पिछली सरकारों के समय से यह राष्ट्र विरोधी कुकृत्य हो रहा था, इसका तार बांग्ला देश,नेपाल , अरवियन कंट्री, तथा साऊथ अफ्रीका से जुडा हुआ है, 

         इस देश का प्रशासन टोटल भ्र्स्ट है, इंटेलिजेन्स भी भ्र्स्ट है, वरना जिस नशीली सिरप से हजारों नौनीहालो क़ी जिंदगी माँ क़ी गोद सुनी कर दी हो, उस देश का इंटेलिजेन्स सोया है, नहीं विना खाकी वर्दी के कोई माई का लाल काला और जान लेवा धंधा कर ही नहीं सकता., उल्टे नेताओं को पैसा चाहिए चाहे जैसा भी धन हो, उनको भी अपनी अपराधी और देश द्रोही चेहरे को अबैध धंधे के नाम से नेताओं और अधिकारियो क़ी जेब भर कर  लेकर चलना है, दरसल भारत का लोकतंत्र क़ी आत्मा काले धन पर ही आधारित है, देश के संबिधान को बनाने वालों क़ी अज्ञानता ही कही जाएगी क़ी, चुनाव में कालेधन वालों के लिये फोरलेन बनाकर दे गये, क़ी खूब तेज बिना स्पीडवरेकर क़ी भरस्टाचार क़ी गाड़ी को दौड़ाते हुए पार्लियामेंट और असेंबली में जाओ,

    चुकी आजादी क़ी लड़ाई के समय नेता चोर नहीं थे नहीं देशद्रोही थे, अंग्रेज उनकी ईमानदारी पर शर्मा जाता था.

    78 साल में ही देश के राजनितिक दल काली कमाई, जातिबाद, धर्मबाद क़ी गाड़ी पर सवार होकर लोकतंत्र पर धन तंत्र से हमला कर दिए, और देश क़ी जनता और युवाओं के अरमानो क़ी होली जलाने लगे, क्रांतिकारिओ के सपने को ध्वस्त कर दिए,इतना अंग्रेज भी नहीं लुटा, वह व्यक्तिगत लुटेरा नहीं था, यहां के संसाधनों को अपने देश ले जाता था.

   मगर जो संबिधान डॉक्टर अम्बेडर साहब दिए, इसमें लूट क़ी पूरी गुंजाइस है, पूरा लोकतंत्र जनता के लुटे हुए धन पर ही चल रहा है, गजब समय आ गया, क्या भगत सिंह , आजाद, खुदीराम बोस, सरदार पटेल, शास्त्री जी, सुभाष बाबू, मंगल पांडेय , डॉक्टर लोहिया, जयप्रकास नारायण, इसी लोकतंत्र के लिये सहादत दिए, शायद उनकी आत्मा रो रही होंगी क़ी इससे अच्छा तो अंग्रेज ही था,

      नेता निर्लज्ज हो गये है, अपराधियों के साथ सेल्फी लेकर  सीना फुला रहे है, कल तक इन माफियाओ से 1990.तक कोई बात नहीं करता था क़ी कोई देख लेगा,

    आज यही छीनरे लोकतंत्र क़ी दुल्हन को डोली में बैठाकर ताज पोषी करा रहे है,

 चार साल से 74साल तक क़ी बुजुर्ग महिला का रेप हो एक ही भाषा है  कड़ी कार्यवाही होंगी, क्यों ऐसा कार्य ही हो रहा है, क्यों युवाओं को पढ़ाई क़ी आड़ में टेबलेट और मोबाईल पकड़ा कर बर्बाद कर दिए., ऑस्ट्रेलिया 16 साल के युवाओं से मोबाईल प्रतिबंधित कर दिया, चाइना भी सख़्ती कर रखा है।

   शिक्षा और स्वशथ्य दुनियां में सबसे खराब पोजीशन में है, भरस्टाचार में कोई ऑफिस नहीं बचा जहाँ रिश्वत का तिरंगा ना लहरा रहा हो, इसके बाद भी आंख में सुरमा लगी है, एक दूसरे को छीनरा कहने क़ी आदत पड़ गयी है।

   मुझे वह दिन याद है ज़ब भारत के रक्षामंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी थे बोफर्स तोप में तत्कालीन प्रधान मंत्री के साले  का नाम बोफर्स तोप दलाली में आया तो विश्वनाथ प्रताप सिंह जी नें हल्ला बोल दिया, राजीव जी क़ी सरकार पर, क्रन्तिकारी क़ी तरह स्तीफा देकर जनता में निकल गये और 1987 से 1989,तक राजीव जी क़ी सरकार को जनता के दम से उखाड़ फेका।

    उनके जन्मोर्चा फोरम के कई कार्य कर्मो में मै भी जाता था, गोरखपुर क़ी सभा में जाते समय जिस जीपसी में राजा साहब बैठे थे एक गोरखपुर का माफिया पीछे बैठ गया, वी पी सिंह जी उत्तर कर पैदल मंच तक गये,अब तो माफियाओ क़ी बल्ले बल्ले है, बेड रूम तक जाते है, सेल्फी  डालते है, नीतियों को भी प्रभावित करते है।

  कफ सिरप कांड में कुछ नहीं होना है, अधिकारियो क़ी अरबो रुपया क़ी कमाई हो रही है, पहले भी अधिकांश अधिकारियो क़ी ही जेब भरती थी कहाँ थी 20 साल से गुप्तचर बिभाग, सब मिले थे।

    अगर चाइना, अमेरिका या नाटो भारत से युद्ध करे तो, आधे से ज्यादे अधिकारी, कर्मचारी, और जनता उन्ही सबो के साथ पैसा लेकर लड़ने लगेगी, यही कारण है क़ी मुट्ठी भर इस्लाम के घुड़सावर आये और आठ सौ साल राज्य किये मुट्ठी भर लोग उनके खिलाफ लड़े अधिकांश उन्ही के साथ थे।

  मुट्ठी भर अंग्रेज व्यापार करने आया और 250 साल तक राज्य किया, बड़े बड़े जमींदार उनके ही दलाल थे अधिकांश राजा भी अंग्रेजो के पीठु थे, मुट्ठी भर युवा लड़कर आजाद कराये,  जैसे आज भी मुट्ठी भर ही नेता है देश में अधिकांश, पूजीपतियों, के दलाल है, नेता बड़े बड़े, माफियाओ के दलाल है, युवा पढ़ा नहीं, शिक्षा को समाप्त कर दिया गया, लूट आसान हो गयी, आज जो साक्षर स्नातक और और स्नाकोटर है वह ठेकेदारी और नेताओं क़ी दलाली में लगे है।

 रुपया, शराब, साड़ी पर बेच रहे है वोट, मौका मिले तो देश देंगे बेच 

 कैसर से पीड़ित मुर्दा है और कुछ कट्टर पंथी धार्मिक उन्मादी लोग है।  अब देखिये कैसे पूजी और भोग नें जनता को पथभ्र्स्ट कर दी है  रूपये पर, शराब पर, कपड़ा पर साड़ी पर अपना वोट बेच रहे है, इन्ही लोगो जैसे दलालो और लैंपटो के कारण देश में इस्लाम और अंग्रेज पैर जमाये, मंडी के भिंडीयो क़ी तरह रेट लगवाने वाले अपने खानदान, रिस्तेदार मित्र दोस्त के वोट को बेचने का सौदा कर जेब गरम कर रहे है, ये लोग अपने को नेता कहते है, दलाल कहोगे तो नाराज हो जायेगे, ज़ब क़ी दलाल ही नहीं है घर बाहर क़ी इज्जत भी बेचते है, देश तो और आसानी से बेच देंगे अवसर पाएंगे तो।

         देश को बाहरी से ज्यादे देश के दुश्मनों से खतरा 

  जो वोट बेच सकता है वह कुछ भी बेच सकता है. देश को खतरा जितना बाहरी दुश्मनो से नहीं है उससे ज्यादा भीतर ही गद्दारों से है, सब सुचना बाहर भेजते है, भारी मात्रा में सरकारी कर्मचारो इस काम.में लगे है जो विना घुस क़ी फाइल भारत के नागरिकों को छूने नहीं देते है इनकी तुलना अंग्रेजों से करना उचित नहीं है, क्यूंकि वह दूसरे का देश कब्जा किया था मै तो उन्ही गद्दारों क़ी बात कर रहा हूँ जो उनके तरफ से क्रांतिकारियों से लड़ते  थे मुखवीरी कर पकड़वाते भी थे।

     भौकाल बना कर जो काफिला में चलते है वे नेता और माफिया आप अधिकांश देश से गद्दारी के धन से भौकाल बनाये है और भौकाल से आगे और लूट करना आसान होगा,नेता नहीं हो,अपराधी हो काला धन लूट कर भौकाल बनाने वाले हो। भारत के युवाओं का भविष्य अंधकार मय है, शिक्षा और स्वशथ्य भी विमार है।


जो जितने बड़ा दागदार वह उतने बड़ा नामदार,ठग और लोभीयो क़ी दोस्ती हो चुकी है।कसाई तो जानवर क़ी कटाई से जीता है,मगर वोट के नाम पर नर नारी बेचवा,कितना भी प्रिय रिस्ता हो माँ, बहन, भाई भाभी, चाचा चाची  को लोकतंत्र क़ी मंडी में बेच आते है। ये मानवीय कसाई भेष भूषा से आईएएस लगते है मगर इनका धंधा पैसे के लिये गाँधी, सुभाष, भगत सिंह , मंगल पांडेय के सन्तानो को भी भ्र्स्ट करने क़ी कोशिश करते रहना है, आते आते चुनाव में इनको भी वोट क़ी मंडी में लेकर चले जाते है।

    आतंकी तो बाहर से आकर हमला करते है, मगर कफ सिरप वाले तो उनसे हजार गुना हत्या बच्चों को सिरप ही पीला कर कर दिए।यह देश भरस्टाचारियों क़ी विश्व का मंडी हो गया है, जहाँ घर का आदमी भी घर में ही घुस ले रहा है, कैसे महाशक्ति बनेगा ।

       जहाँ देश और जनता क़ी रक्षा करने वाले ही जनता से घुस लेकर ही कार्य कर रहे है, फिर इतना भ्र्स्ट अधिकारी  कैसे सुपर पावर होने देंगे। भरस्टाचारी तो सबसे ज्यादा माइक और मिडिया में चिलाते है, कही भरस्टाचार नहीं है, हर इन्शान खुश और सुरक्षित है, अस्पतालो में सेवा विश्वष्ट्रीय, पढ़ाई विश्वष्ट्रीय है, क्या ही कहाँ जाय।

     जो जितने ही बड़े अधिकारी है उतने ही भ्र्स्ट है ज़ब तक ऊपर के नेता या अधिकारी भ्र्स्ट नहीं होंगे तब तक निचे वाले भ्र्स्ट हो ही नहीं सकते।  बड़े लोगो क़ी देन है भरस्टाचार, ऊपर से निचे आता है तब घुस क़ी रकम निचे से ऊपर जाती है। कोई नई बात नहीं लिखा हूँ यही भारत क़ी रीती हो गयी है. फाइल ना पढ़ब, जले ना देब।

  

   26जनवरी खाती तिरंगा, सारे ईमानदार सिलवा रहे है, उस दिन सारे क्रांतिकारियों के सपने का भारत बनायेगे लोग, हद है।भारतीय दर्शन है जिसको लूटना हो, उसको भगवान बनाओ, युवाओं को प्रेरित करना है देश बनाने के लिये.आप ही लोगो के कंधे पर देश सुरक्षित है, जिस ओर जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है, कुछ दल तो कभी अपील भी नहीं करते क़ी युवाओं मेहनत से पढो तभी जिंदगी निखरेगी। वे बोलेगे पार्टी का काम करो, हम सत्ता पाएंगे तो सबको पक्की नौकरी देंगे, सब को उच्च कोटि क़ी शिक्षा देंगे, हर किसान के घर में नौकरी देंगे, फिर बचेगा क्या सब कर देंगे।

फर्जी नेताओं क़ी भीड़ लग चुकी है यही नारा देकर देश बिदेश में मौज मस्ती करते है और आप बेरोजगारों को मुंगेरी लाल के हसीन सपने आने लगते है। ज़ब तक आप स्वयं शिक्षा में तपस्या नहीं करेंगे, स्कील का सहारा नहीं लेगे, तब तक कोई रिजल्ट नहीं,दिल बहलाने के ग़ालिब ख्याल ही अच्छा है।

  

     खुद ही को कर बुलंद इतना,

खुदा बंदा से पूछे बोल तेरी रजा क्या है.

 काफ़ी काम है जनता के लिये.

   धंधा बा कफ सिरप क, शराब बालू क, गिट्टी भूमि, खनन क, विना संरक्षण क कैसे देश क चुना लगी, सबके चाही पैसा.

     सिरप पिलाओ, चाहे सूरा पिलाओ, चाहे जहर पिलाओ,

  देखते नहीं आप लोग बलिया में हर पार्टी का साझा विधायक है, सब लोग मंत्र मुग्ध रहते है क्या पक्ष क्या विपक्ष,

  सबसे बड़ा रुपैया.

 नहीं कोई नीति नहीं पार्टी, नहीं जाती नहीं धर्म, सबका सामूहिक साथ, सबकर चाही सर पर हाथ.

   अब का बिपक्ष कहाँ है, नरसरी है अपराध बिहीन लोकतंत्र करने का,सोशल मिडिया ही इसका सहारा है, सड़क छोड़ लैंड कुरुजर में है.

       सूप हँसे  तो हँसे चलनियो हंसतीया.