आज के समाज में विलुप्त होती गुरुकुल परंपरा को संरक्षित करना हमारा परम कर्तव्य :आचार्य मोहित पाठक
(बलिया एक्सप्रेस के उपसंपादक डॉ सुनील कुमार ओझा से विशेष बातचीत)
बलिया।। आज के आधुनिक और भौतिकता-प्रधान समाज में जहाँ शिक्षा व्यवसाय बनती जा रही है, वहीं महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम जैसी संस्थाएँ भारतीय संस्कृति, शास्त्र और संस्कार की लौ जलाए हुए हैं। गंगापुर, रामगढ़ (बलिया) स्थित यह गुरुकुल वैदिक परंपरा को जीवंत रखने का एक सशक्त प्रयास कर रही हैं ।रसड़ा ब्लाक के जकरिया ग्राम सभा के प्रधानपति एवं समाजसेवी डॉ राकेश सिंह ने बटुकों एवं आचार्य से मुलाकात कर संस्था की एक शाखा अपने क्षेत्र में खोलने का आग्रह किया ताकि क्षेत्र लाभान्वित हो और ज्ञान का प्रसार हो। साथ में डॉ सुनील कुमार ओझा भी उपस्थित रहे।
बलिया एक्सप्रेस द्वारा जानने के प्रयास में कुछ अंश
प्रश्न : आज गुरुकुल परंपरा पर बात करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर : आज का समाज तेजी से भौतिकता की ओर बढ़ रहा है। शिक्षा व्यवसाय बनती जा रही है, जबकि गुरुकुल परंपरा शिक्षा को संस्कार से जोड़ती है। यदि इसे अभी संरक्षित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कट जाएँगी।
प्रश्न : महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम की स्थापना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर : हमारा उद्देश्य केवल अक्षर-ज्ञान देना नहीं है, बल्कि शास्त्र, संस्कृति और संस्कार से युक्त शिक्षा देना है। हम ऐसे नागरिक तैयार करना चाहते हैं जो चरित्रवान, संस्कारशील और समाज के प्रति जिम्मेदार हों।
प्रश्न : गुरुकुल के पीछे आपकी मूल प्रेरणा क्या है?
उत्तर : मेरा सपना है कि काशी की परंपरा हर जनपद में स्थापित हो। भृगु क्षेत्र काशी का ही दूसरा रूप है और यह गंगा की पावन धरा से जुड़ा है। जीवन की शुरुआत भी गंगा से है और अंत भी—इसलिए शास्त्र और संस्कृति के साथ जीवन जीना ही हमारा लक्ष्य है।
प्रश्न : वर्तमान समय में गुरुकुलों की स्थिति को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर : यह अत्यंत दुखद है कि गुरुकुल परंपरा क्षेत्र में धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। संसाधनों की कमी और सामाजिक उपेक्षा इसके मुख्य कारण हैं, फिर भी हम इसे जीवंत रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
प्रश्न : गुरुकुल में किस वर्ग के विद्यार्थी अध्ययन करते हैं?
उत्तर : हमारे यहाँ अधिकांश विद्यार्थी गरीब और साधनहीन परिवारों से आते हैं। उनमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा, संस्कार और निखार की आवश्यकता है, जिसे गुरुकुल पूरी निष्ठा से प्रदान करता है।
प्रश्न : समाज और प्रशासन से आपकी क्या अपेक्षा है?
उत्तर : समाज, प्रशासन और जागरूक नागरिकों को आगे आना होगा। गुरुकुल बचेगा तो संस्कृति बचेगी और संस्कृति बचेगी तो राष्ट्र की आत्मा सुरक्षित रहेगी।
प्रश्न : अंत में आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर : गुरुकुल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार और संस्कृति का संरक्षण स्थल है। इसे बचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।


