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एक समाजसेवी अधिकारी के चलते ढ़िबरी युग से 21 वी सदी की रौशनी मे जगमग होगा बैरिया तहसील का फिरंगी टोला गांव

 



मधुसूदन सिंह / डॉ सुनील ओझा 

बलिया।। जनपद के बैरिया विधानसभा क्षेत्र के चांद दीयर का फिरंगी टोला गाँव, जहां आज़ादी के बाद से आज तक यानि पूरे 77 सालों से अंधेरा क़ायम रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख,विधायकों को छोड़िये इस विधानसभा क्षेत्र से दो सांसद भी हुए है लेकिन किसी ने भी इस गांव को बिजली से जोड़ने के लिये प्रयास ही नही किया। जबकि बीजेपी की मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल मे घोषणा की थी कि देश का कोई भी गांव बिजली बिना नही रहेगा। लेकिन दुर्भाग्य है इस गांव का कि बीजेपी की केंद्र सरकार का तीसरा कार्यकाल चल रहा है और राज्य सरकार का दूसरा कार्यकाल चल रहा है, फिर भी इस गांव की तरफ किसी की नजर ही नही पड़ी।बलिया का जिला प्रशासन हो या बिजली विभाग हो, स्थानीय ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष,विधायक, सांसद या मंत्री हो, सब ने इस गांव को लगता है देखना भी मुनासिब समझा, नतीजा 21 वी सदी मे भी ढ़िबरी युग मे जीने को मजबूर थे फिरंगी टोला के निवासी।ऐसा कोई दरवाजा नही, जहां यहां के निवासियों ने माथा न टेका हो, लेकिन सुध किसी ने नही ली।



इनके पड़े कदम, बदल गयी ग्राम वासियों की दुनिया 

बैरिया विधानसभा मे इन दिनों बिना किसी राजनैतिक पद के क्षेत्र मे गरीबों के मसीहा के रूप मे ख्याति अर्जित करने वाले भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी निर्भय नारायण सिंह जब टीम निर्भय के साथ  गांव_गांव, दरवाजे_दरवाजे भ्रमण के दौरान इस गांव की प्रमुख समस्या देखी तो आवाक रह गये।उनको विश्वास ही नही हुआ कि जिस समय देश विश्व की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की कगार पर है, पीएम मोदी जब 2047 का विजन लेकर चल रहे हो, ऐसे समय मे बैरिया का एक गांव 21 वी सदी छोड़िये,गुलामी के काल की तरह बिजली की रौशनी के  लिये तरसते हुए ढ़िबरी युग मे जीने को मजबूर है।






गांव वालों की मजबूरी को देखने के बाद निर्भय नारायण सिंह ने गांव वालों को बिना किसी दिखावे के कहा कि “मैं वादा नहीं करता,मैं काम करता हूँ।” आप लोगों को आश्वस्त करता हूं कि एक माह के अंदर आपके गांव मे भी बिजली जलेगी।

 श्री सिंह ने उसी समय बिजली विभाग की टीम को बुलाया और निर्देश दिए, 10 दिनों के भीतर काम शुरू हो जाए,और एक महीने के भीतर हर घर में रोशनी पहुँचे।”कहा कि “अब यह गाँव अंधेरे में नहीं रहेगा। श्री सिंह के प्रयास से काम भी शुरू हो गया है।लोग कह रहे हैं—“कई नेताओं से मिलकर भी जो न हो सका,वह एक सच्चे, संवेदनशील अधिकारी की नीयत ने कर दिखाया।”