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नगर पालिका अध्यक्ष के पॉवर सीज करने मे जिला प्रशासन की हुई उच्च न्यायालय मे फ़जीहत, संतकुमार का पॉवर बहाल

 

 


मधुसूदन सिंह 

बलिया।। जनपद का सबसे चर्चित प्रकरण का आज उच्च न्यायालय ने पटाक्षेप करते हुए जिलाधिकारी व प्रमुख सचिव नगर विकास पर कड़ी टिप्पणी करते हुए प्रमुख सचिव नगर विकास के 28.10.2025 के आदेश को निरस्त करते हुए नगर पालिका परिषद बलिया के अध्यक्ष के वित्तीय व प्रशासनिक पॉवर को बहाल कर दिया है।इस फैसले की खबर लगते ही बलिया जनपद मे ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है। माननीय उच्च न्यायालय के फैसले को लोग बलिया की तासीर को क़ायम रखने वाला बता रहें है।

                      क्या था पूरा मामला 

ऐतिहासिक ददरी मेला के आयोजन से लगभग एक माह पहले अधिशाषी अधिकारी सुभाष कुमार से जिला प्रशासन ने गुपचुप तरीके से एक चिट्ठी लिखवा ली कि मेला के आयोजन मे नगर पालिका अध्यक्ष संत कुमार मिठाई लाल कोई रूचि नही ले रहे है, जिससे इस मेला के आयोजन मे देर हो सकती है। साथ ही जिला प्रशासन ने 2020 से 2024 तक की मेला की आय व खर्च का विवरण प्रकाशित करते हुए आरोप लगाया कि संत कुमार मिठाईलाल ने 2023 मे मेला लगाने के दरमियान लगभग साढ़े नौ हजार रूपये आमदनी से ज्यादे खर्च कर दिया था। जबकि जिला प्रशासन ने 2024 मे जब मेला लगाया था तो 56 लाख रूपये का मुनाफा हुआ था। इन्ही दोनों कारणों को आधार बनाकर जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर प्रमुख सचिव नगर विकास ने 26.10.2025 को नगर पालिका अध्यक्ष संत कुमार मिठाईलाल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मेला लगाने का अधिकार जिलाधिकारी को देते हुए, चेयरमैन संतकुमार से 15 दिनों मे जबाब तलब किया। संतकुमार मिठाईलाल द्वारा समयानुसार जबाब भी जमा कर दिया लेकिन प्रमुख सचिव नगर विकास ने जब लगभग 15 दिनों के बाद भी कोई निर्णय नही लिया तो संतकुमार ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेकर न्याय की गुहार लगायी, जिसपर शुक्रवार को डबल बेंच ने अपना फैसला सुनाया है।माननीय उच्च न्यायालय ने प्रमुख सचिव के आदेश दिनांक 26.10.2025 के आदेश को निरस्त करते हुए संतकुमार के सभी अधिकारों को बहाल करते हुए आईएएस आईएएस खेल हो रहा है क्या, टिप्पणी कर दी जो आज काफ़ी चर्चा मे है।

जनता मे चेयरमैन के खिलाफ माहौल बनाते रहे अधिकारी 

चेयरमैन संतकुमार मिठाईलाल का वित्तीय और प्रशासनिक पॉवर सीज होने के बाद अधिशाषी अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों का जनपद मे एक ही काम हो गया ददरी मेला का आयोजन, अपने चहेते कलाकारों को उनके आम लोगों के लिये निर्धारित दर से अधिक देकर कार्यक्रम कराने लगे। एक अधिकारी तो वकायदा गायक के तौर पर भारतेन्दु मंच पर अपनी प्रस्तुतियां देने मे मस्त हो गये। यह अलग बात है कि उनका गाना इतना सुरीला होता था कि दर्शक गायक के सम्मान मे पांडाल से उठने को मजबूर हो जाते थे।

इसी बीच जब नगर पालिका के सफाई कर्मियों, पेंशन, व अन्य कर्मचारियों का वेतन व मानदेय रुक गया तो ये लोग सफाई कार्य बन्द कर दिये और धरना शुरू कर दिये। नतीजन पूरे शहर मे जगह जगह गंदगी का अम्बार लग गया और इससे नाराज होकर व्यापारी व आमजन का स्वर विरोध मे मुखरित होने लगा। जब विरोध तेज होने लगा तो अपनी धुन मे बासुरी बजाने वाले सीआरओ साहब पूरे लाव लश्कर के साथ चेयरमैन के घर पहुंच गये और वेतन बिल पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाने का प्रयास कर ही रहे थे कि पता चला कि चेयरमैन साहब रसड़ा गये है तो वापस लौटे। लेकिन लौटते समय मीडिया से बातचीत मे अधिशाषी अधिकारी और सीआरओ दोनों लोगों ने कहा कि चेयरमैन का वित्तीय व अन्य पॉवर सीज नही है, वे वेतन बिल पर हस्ताक्षर कर दे जिससे वेतन आदि का भुगतान किया जा सके। हकीकत मे यह जिला प्रशासन की चेयरमैन को नगर पालिका के कर्मचारियों व जनता जनार्दन के बीच बदनाम करने और  कर्तव्य के प्रति उदासीन व्यक्ति की छवि बनाने की योजना थी जिसको माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के बाद समझा जा सकता है।


इन अधिकारियों ने अपनी मस्ती के लिये की सरकार की छवि धूमिल 

इस पूरे प्रकरण मे अगर कोई सबसे बड़ा खलनायक या मोहरा बनने वाले अधिकारी का नाम है वह है सुभाष कुमार अधिशाषी अधिकारी, इसके बाद नंबर आता है सीआरओ / प्रभारी अधिकारी नगर निकाय श्री त्रिभुवन का । इन दोनों अधिकारियो की रिपोर्ट के आधार पर ही जिलाधिकारी बलिया की महत्वाकांक्षा परवान चढ़ी और चेयरमैन का पॉवर सीज करा दिया गया।

 संतकुमार मिठाईलाल जो बीजेपी के ही चेयरमैन है, का पॉवर सीज होते ही विपक्ष बीजेपी सरकार को कटघरे मे खड़ा करने लगा। ट्रिपल इंजन की सरकार एक चुटकीला हो गयी। कई नेताओं के चरित्र पर उंगली उठायी गयी, जबकि हकीकत मे उपरोक्त तीन अधिकारियो की साजिश थी, जिससे बीजेपी की सरकार की जनमानस मे काफ़ी किरकिरी हुई।


सबसे ईमानदार राजस्व विभाग की टीम मेला मे, नगर पालिका कर्मियों को किया गया बाहर 

सन 1921 से ददरी मेला का आयोजन नगर पालिका परिषद बलिया द्वारा ही किया जाता रहा है। 2024 मे चेयरमैन संतकुमार मिठाईलाल ने सन 2023 के भुगतान को लेकर 2024 मे मेला लगाने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद जिला प्रशासन द्वारा मेला लगाया गया।इस मेले को भी नगर पालिका कर्मियों के सहयोग से ही लगाया गया, जो फायदे मे रहा।यही से प्रशासनिक अधिकारियों के मुंह मे खून लग गया और 2025 मे साजिश करते हुए चेयरमैन को हटाकर खुद मेला लगाने मे कामयाब हो गये। सबसे बड़ी बात इस बार यह हुई कि मेले के सैकड़ो साल के इतिहास मे पहली बार नगर पालिका कर्मियों को संदिग्ध मानते हुए मेला मे ड्यूटी ही नही लगायी। इनकी जगह सबसे ईमानदार विभाग राजस्व विभाग के लेखपालों व अन्य की ड्यूटी लगायी गयी। लोगों का कहना है कि जिस विभाग मे बिना चढ़ावा दिये कोई काम ही नही होता, उसको भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था देने के लिये मेला मे नियुक्त किया जाना हास्यास्पद है।

पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह ने इन अधिकारियो को बताया भ्रष्टाचार मे लिप्त 

बैरिया के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह ने माननीय उच्च न्यायालय केते फैसले का स्वागत करते हुए इसे सत्य की जीत बताया है। साथ5 ही कहा है कि जिलाधिकारी,मुख्य विकास अधिकारी, सीआरओ और अधिशाषी अधिकारी को इस पूरे प्रकरण मे दोषी मानते हुए5 मुख्यमंत्री जी से बलिया के विकास के लिये इन अधिकारियो को दोषी ठहराते हुए इनका तत्काल बलिया से अन्य जनपद स्थानांतरण करने की गुहार लगायी है।