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ग्रीन फिल्ड निर्माण में घटिया सामग्री प्रयोग करने का लगा आरोप : जिला पंचायत सदस्य ने क्षेत्रीय अधिकारी क़ो पत्र भेजकर लगाया गंभीर आरोप




मधुसूदन सिंह

बलिया।। स्थानीय लोकप्रिय सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के अथक प्रयास से जनपद में बन रहा ग्रीन फिल्ड एक्सप्रेस वे, एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार यह निर्माण कार्य करने वाली कम्पनी द्वारा तथाकथित घटिया सामग्री का प्रयोग करने के कारण चर्चा में है। इस बात की शिकायत जिला पंचायत सदस्य इंदु पांडेय पत्नी अजय कुमार पांडेय ने क्षेत्रीय अधिकारी एनएचआई वाराणसी क़ो पत्र भेजकर की है। श्रीमती पांडेय ने इसके अलावा केंद्रीय मंत्री भूतल परिवहन मंत्री,प्रोजेक्ट मैनेजर एनएचआई आजमगढ़, परिवहन मंत्री उत्तरप्रदेश सरकार, सांसद बलिया और जिलाधिकारी बलिया क़ो भी यह शिकायती पत्र भेजा है।

बलिया एक्सप्रेस से बात करते हुए जिला पंचायत सदस्य अजय कुमार पांडेय ने कहा कि ग्रीन फिल्ड एक्सप्रेस वे के तीसरे फेज का निर्माण कर रही कम्पनी एनकेसी द्वारा निर्माण कार्य में मानकविहीन ग्रिट का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में इस एक्सप्रेस वे पर हादसा होने की संभावना अभी से दिखने लगी है। श्री पांडेय ने कहा कि स्लैब की ढलाई में इस कम्पनी द्वारा अहिरौरा ग्रिट का प्रयोग किया जा रहा है, जबकि सरकार द्वारा व एनएचआई द्वारा डाला ग्रिट का स्लैब में प्रयोग करने का आदेश दिया गया है।



श्री पांडेय ने कहा कि लगभग 39 किमी के इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 650 करोड़ रूपये है। जिसमे लगभग 200 करोड़ रूपये ग्रिट में खर्च होना है। इस 200 करोड़ रूपये में से कम्पनी ग्रिट में बदलाव करके लगभग 80 से 100 करोड़ शुद्ध मुनाफा कमाना चाहती है। कम्पनी के इसी सोच का जन प्रतिनिधि होने और लोगों की जान की फ़िक्र होने के कारण हमने विरोध करने का निर्णय किया है, ताकि निर्माण कार्य सरकार द्वारा तय मानकों के अनुरूप हो सकें। कहा कि यह मै दोनों ग्रिट के दर में भारी अंतर के कारण कह रहा हूं। अहिरौरा की ग्रिट जहां अधिकतम 60 रूपये घन मीटर है तो वही डाला का दर 100 रूपये घन मीटर है। कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा पूर्वांचल के वातावरण और भौगोलिक स्थिति क़ो देखते हुए निर्माण कार्य में केवल व केवल डाला ग्रिट के ही प्रयोग की अनुमति दी गयी है।





इस संबंध में बलिया एक्सप्रेस ने एनएचआई के प्रोजेक्ट मैनेजर आजमगढ़ एसपी पाठक से मोबाइल पर बात की तो उन्होंने अनभिज्ञता  व्यक्त करते हुए जानकारी हासिल कर जबाब देने की बात कही। लेकिन दुबारा लगातार दो दिनों तक श्री पाठक के नंबर पर कॉल की गयी लेकिन इन्होंने फोन उठाया ही नहीं।

इसके बाद एनकेसी के जीएम बीपी सिंह क़ो कई बार फोन किया गया लेकिन इन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद इसी कम्पनी के हाईवे मैनेजर सुनिल शर्मा से बात की गयी। श्री शर्मा ने बताया कि अहिरौरा पाकुड़ और डाला तीनों जगह की ग्रिट मंगाई गयी है। स्लैब की स्ट्रेंथ की टेस्टिंग के लिये तीनों के सैंपल जांच के लिये भेजा गया है। लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही ग्रिट का प्रयोग किया जायेगा। श्री शर्मा के बयान से यह साफ हो गया कि कम्पनी द्वारा निर्माण में अहिरौरा व पाकुड़ की ग्रिट का प्रयोग किया जायेगा।

बता दे कि यह प्रोजेक्ट इपीसी मोड के तहत पूरा किया जा रहा है। इस मोड में सरकार निर्माण करने वाली कम्पनी क़ो 30-30 प्रतिशत का भुगतान कुल तीन बार,99 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने पर दिया जाता है। यानी 99 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने पर 90 प्रतिशत धनराशि का भुगतान सरकार द्वारा दे दिया जाता है। इसके साथ ही इसी कम्पनी क़ो सरकार टोल वसूली का भी जिम्मा सौप देती है। टोल वसूली में से 40 प्रतिशत निर्माण करने वाली कम्पनी क़ो और 60 प्रतिशत सरकार क़ो मिलता है। इसके साथ ही 10 वर्षो तक इस सड़क की मरम्मत भी निर्माण करने वाली कम्पनी क़ो ही करना पड़ता है।