दलितों के नाम पर घड़ियाली आंसू से नदियां बहाने वालो अगर एक बूंद भी आंसू बचा हो तो राजस्थान के पुजारी के नाम पर तो बहा लो : मनोज कुमार
बलिया ।। देश की राजनीति अब मंदिर मस्जिद का मुद्दा खत्म होने के बाद न बेरोजगारी,न महंगाई,न दवाई,न शिक्षा पर चल रही है बल्कि यह सिर्फ और सिर्फ दलित के ऊपर चल रही है । दलित मतदाताओं को अपना पेटेंट समझने वाली बहन जी हो या देश की राजनीति से लगभग 6 वर्षो से बेरोजगार हो चुकी कांग्रेस व उसके नेता राहुल गांधी हो या प्रियंका गांधी हो,या यूपी में यादव वोटरों पर एक छत्र राज करने के बाद दलित वोटरों को अपनी तरफ रिझाने की कोशिश करने वाली समाजवादी पार्टी व सड़को से लेकर सदनों में हो हल्ला करने वाले इस दल के नेता व नेत्री हो,या हिन्दू मतदाताओं को अपनी जागीर समझने वाली भारतीय जनता पार्टी हो,किसी भी दल को आजकल दलित उत्पीड़न के अलावा और किसी का उत्पीड़न हो, हत्या हो दिख ही नही रहा है । दलित के साथ घटना हो जाय तो सारे चैनल वाले गुड़ पर जैसे माटा टूट पड़ते है वैसे टूट पड़ रहे है लेकिन अगर किसी दलित समुदाय ने जघन्य अपराध भी कारित कर दिया तो भी इनकी नजरो से कुछ नही दिखता । यही नही उपरोक्त सभी राजनैतिक दलों के नेताओ के मुंह मे ताले लग जा रहे है और इनकी हालत ऐसी हो जा रही है जैसे सांप और छछूंदर की होती है । सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस देश मे सिर्फ और सिर्फ दलित ही उत्पीड़ित हो रहा है ?
राजस्थान के करौली में दलितों द्वारा जमीन पर कब्जा करने की नीयत से पुजारी को जिंदा जला दिया गया है और यह खबर ऐसे गुम हो गयी है जैसे कुछ हुआ ही नही ? क्या दलितों के अलावा अन्य लोगो की जान हो, मान सम्मान हो,उसका कोई मोल नही है ? यूपी में भाजपा की सरकार है तो हाथरस कांड के बाद पूरे प्रदेश में कांग्रेस के नेताओ ने गदर ढा दिया, प्रियंका गाँधी जी और इनके भाई राहुल गाँधी जी हाथरस पहुंच कर पीड़ित परिवार के संग गले लगकर खूब घड़ियाली आंसू बहाये थे,अपने आपको संवेदनशील व योगी सरकार को असंवेदनशील साबित कर रहे थे ,अब जब कांग्रेस शासित राज्य में ही मानवता शर्मसार हो गयी है,दलितों ने पुजारी को जिंदा जला दिया है,तब दोनो भाई बहन गूंगे क्यो हो गये है ,राजस्थान सरकार को असंवेदनशील क्यो नही कह रहे है,पूरे राजस्थान हो या यूपी हो, यहां के कांग्रेसी इस घटना को लेकर गदर क्यो नही काट रहे है,सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने बड़े जघन्य कांड के बाद भी राहुल गांधी अपनी बहन प्रियंका गांधी संग कब दलित वोट की राजनीति से निकल कर एक संवेदनशील नेता की तरह करौली जा कर पीड़ित ब्राह्मण पुजारी के परिजनों व सहयोगियों से मिलकर एक या दो बूंद ही सही घड़ियाली आंसू बहाएंगे ? करौली के एक मंदिर के पुजारी जिसे कुछ भूमाफिया दलितो द्वारा उसके मंदिर की जमीन को कब्जा करने की नियत से जिंदा जला कर मार दिया गया ,कम से कम हर छोटी घटना पर पुतला फूंकने वाले कांग्रेसी पूरे उत्तर प्रदेश और बलिया रोडवेज चौराहे पर कब पुतला फूंकेंगे या कम से कम किसी कांग्रेसी युवा नेता की हिम्मत हो तो राजस्थान सरकार का पुतला फूंक कर दिखाए , इस पार्टी के जिलाध्यक्ष वर्तमान में ब्राह्मण है वह तो कम से कम मीडिया में ही बयान दे दे । चूँकि यह घटना कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री अशोक गलहौत के राज्य की है इसलिये यहा सवाल आज मुख्य रूप से कांग्रेस से है । उत्तर प्रदेश की कानून ब्यवस्था पर रोज शोर करने वाले लोग राजस्थान पर क्यो नही बोलते ? इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर जितना सन्नाटा है, यह भी आश्चर्य से कम नही है जंतर मंतर पर कोई मार्च अभी तक वामपंथी मित्रो का क्यो नही आया ? कम से कम समाजवादी पार्टी के नेता जो हाथरस की घटना में केंडिल पर केंडिल जला रहे थे इनके आँसू रुक नही रहे थे ,एक छोटा सा दीया ही जला दे , थोड़ा पानी छिड़क कर रोने का नाटक ही कर ले या एक प्रतिनिधि मंडल ही भेज दे और बहन मायावती जी , इस घटना पर आपका कोई ट्वीट ही आ जाता, क्यो की आप तो सर्वजन हिताय वाली है ,ब्राह्मणों को अपनी पार्टी से जोड़ने के लिये अभियान चलाने वाली है ,लेकिन इस बार आप को भी चुप रहना मजबूरी है क्योंकि जिंदा फूंकने वाले अपराधी इस बार आप के समाज के है, तो सम्भल कर ही बोलियेगा ,शायद संविधान इस हत्याकांड से मजबूत हो गया है, बाबा साहब इस घटना पर ऊपर से मुस्कुरा रहे है।
चंद्रशेखर रावण ने अपने चश्मे का सीसा हटाकर इस घटना के बाद लोहे का प्लेट लगवा लिया क्यो कि यही सामाजिक न्याय है ।भाजपा के नेता जी लोग से भी सवाल है कि अगर हाथरस की घटना में बचाव कर लिए हो तो एक दो सवाल आप ही लोग पूछ लीजिये , वैसे कही दलित वोट खिसक न जाये ये डर होगा तो एक और एक्ट बनवा दीजियेगा ताकि देश का सवर्ण समाज जो जिंदा है ,वह गूंगा बहरा और अंधा हो जाये या दलित समाज का आरक्षण और बढ़ा दीजिएगा ।बाकी वो जांबाज पत्रकार बेटियाँ कब राजस्थान जाएंगी उनका पुलिस से झमेला कर पीड़ित परिवार के पास जाने का सीन इस बार कब दिखेगा, कब वो इंसाफ की मांग करेंगी यह देश की जनता जानना चाहती है या उनकी पढ़ाई में यह बताया गया है कि कोई सवर्ण जब मर जाये तो उसकी रिपोटिंग करने मत जाना । ऐ देश की बहादुर महिला पत्रकार बहनों ,कम से कम 10 मिनट का ही कवरेज कर दो तो उस तड़प तड़प कर मरे पुजारी की आत्मा को कुछ राहत मिल जाय ।
मेरा सबसे अधिक विरोध उन तथाकथित फर्जी ब्राह्मण संगठनों से है जो रोज रोज नेताओ के इशारे पर संगठन बना कर ब्राह्मण समाज के युवा लड़को को जातिवादी जहर घोल रहे है ,इन संगठनों के फर्जी अध्यक्ष कहा है ? वे राजस्थान की घटना पर मौन क्यो है ?
हालांकि मैं इस घटना को जातिगत रूप से नही देखता यहाँ हत्या एक ब्राह्मण की हुई है और एक दलित ने जिसे जिंदा फूंक दिया पर अगर यह घटना कही दलित को फूंकने का होता और फूंकने वाला सवर्ण होता तो जिनका मैंने उल्लेख किया है आज सड़को पर नंगा नाच करते । सड़को पर उपद्रव होता बड़े बड़े बयान आते, कारवाई के लिए तुरंत एसआईटी का गठन होता, मुख्यमंत्री सीबीआई की जांच कराने की संस्तुति करते । मेरा यह देखकर दिल दुःख रहा है कि समाज को दिशा देने वाले लोग सिर्फ वोट के लिए एक समाज को कहां लेकर जा रहे है ,बसुधैव कुटुंबकम के आधार पर चलने वाली हमारी संस्कृति को टुकड़े टुकड़े क्यो कर रहे है ।
मैं पुनः कहूंगा हर घटना को जातिगत दृष्टिकोण से नही बल्कि कानून व्यवस्था की नजर से देखने की आवश्यकता है । वह चाहे हाथरस की दलित बेटी या करौली के ब्राह्मण पुजारी के हत्या का मामला हो ,कानून और इंसाफ लोगो को दिखना चाहिए ,आरोपी पर कड़ी कारवाई होनी चाहिए पीड़ित परिवार को मुआवजा सहित पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मिलनी चाहिये। अशोक गलहौत जी आप एक बेहतर मुख्यमंत्री है मैं उम्मीद करूंगा आप की सरकार पीड़ित परिवार के साथ इंसाफ जरूर करेगी।
मनोज✍️
सामाजिक कार्यकर्ता





